चने की कटाई के बाद खाली खेत न छोड़ें, सूरजमुखी की खेती से 90 दिन में मिल सकता है अच्छा मुनाफा!

चने की कटाई के बाद खेत खाली छोड़ने की बजाय किसान सूरजमुखी की खेती कर अच्छी कमाई कर सकते हैं. यह फसल कम पानी में तैयार हो जाती है और लगभग 90 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो जाती है. सूरजमुखी के बीजों से तेल उत्पादन होने के कारण बाजार में इसकी अच्छी मांग रहती है.

नोएडा | Updated On: 2 Apr, 2026 | 06:58 PM

Sunflower Farming: अक्सर किसान चने की कटाई के बाद खेत को खाली छोड़ देते हैं. इससे जमीन कुछ समय तक बेकार पड़ी रहती है और किसान अतिरिक्त कमाई का मौका खो देते हैं. लेकिन अगर इसी खाली खेत में सही समय पर दूसरी फसल बो दी जाए, तो वही जमीन कुछ ही महीनों में अच्छी आमदनी का जरिया बन सकती है. कृषि वैज्ञानिक एफ.आर. कोसरिया (उद्यान विभाग छत्तीसगढ़) के अनुसार, चने की कटाई के बाद सूरजमुखी की खेती किसानों के लिए कम लागत में ज्यादा मुनाफा देने वाला शानदार विकल्प बन सकती है.

चने के बाद सूरजमुखी की खेती क्यों फायदेमंद

कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक, चने की कटाई  के बाद खेत में नमी और पोषक तत्व काफी हद तक मौजूद रहते हैं. ऐसे में अगर किसान उसी खेत में सूरजमुखी की बुवाई कर दें, तो उन्हें अलग से ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ती. सूरजमुखी एक तिलहनी फसल है, जो कम पानी में भी अच्छी पैदावार दे सकती है. इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह फसल कम समय में तैयार हो जाती है. लगभग 90 से 100 दिनों में सूरजमुखी की फसल कटाई के लिए तैयार हो जाती है, जिससे किसान कम समय में अच्छी कमाई कर सकते हैं.

कम समय में तैयार सूरजमुखी फसल किसानों को अच्छा मुनाफा.

खेती के लिए कैसी मिट्टी और मौसम चाहिए

कृषि वैज्ञानिक एफ.आर. कोसरिया के अनुसार, सूरजमुखी की खेती  के लिए अच्छी जल निकासी वाली दोमट या हल्की बलुई दोमट मिट्टी सबसे अच्छी मानी जाती है. मिट्टी का पीएच मान लगभग 6.5 से 7.5 के बीच होना चाहिए. इस फसल को अच्छी धूप की जरूरत होती है, इसलिए इसे खुले खेत में उगाना ज्यादा फायदेमंद होता है. जहां गर्मी और धूप अच्छी मिलती है, वहां सूरजमुखी की पैदावार भी बेहतर होती है. यही कारण है कि कई क्षेत्रों में किसान अब इस फसल की ओर तेजी से आकर्षित हो रहे हैं.

बुवाई का सही तरीका और बीज की मात्रा

सूरजमुखी की खेती में बुवाई का तरीका भी बहुत महत्वपूर्ण होता है. विशेषज्ञों के अनुसार, बुवाई हमेशा कतारों में करनी चाहिए. कतार से कतार की दूरी करीब 60 सेंटीमीटर और पौधे से पौधे की दूरी लगभग 30 सेंटीमीटर रखना बेहतर माना जाता है. अगर एक हेक्टेयर खेत में सूरजमुखी की खेती  करनी है, तो लगभग 5 से 6 किलोग्राम बीज पर्याप्त होता है. सही दूरी और सही बीज मात्रा रखने से पौधों को बढ़ने के लिए पर्याप्त जगह मिलती है और पैदावार भी अच्छी होती है.

सूरजमुखी की खेती

अच्छी पैदावार के लिए खाद और सिंचाई जरूरी

अच्छी फसल के लिए खेत की तैयारी और खाद का सही इस्तेमाल  बहुत जरूरी होता है. बुवाई से पहले खेत में 8 से 10 टन सड़ी हुई गोबर की खाद डालना फायदेमंद माना जाता है. इससे मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है और पौधे तेजी से बढ़ते हैं. इसके अलावा नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश जैसे उर्वरकों का संतुलित उपयोग भी जरूरी होता है. सूरजमुखी की फसल को ज्यादा पानी की जरूरत नहीं होती, लेकिन समय पर सिंचाई करना जरूरी है. बुवाई के बाद अंकुरण के समय, फूल आने के समय और दाना बनने के समय सिंचाई करने से पैदावार बेहतर मिलती है.

90 दिनों में तैयार, बाजार में अच्छी मांग

सूरजमुखी की फसल लगभग 90 से 100 दिनों में पूरी तरह तैयार हो जाती है. अगर खेती सही तरीके से की जाए, तो एक हेक्टेयर खेत से औसतन 18 से 25 क्विंटल तक उत्पादन मिल सकता है. बाजार में सूरजमुखी के तेल  की मांग लगातार बढ़ रही है, इसलिए किसानों को इसका अच्छा दाम भी मिलता है. कम लागत, कम पानी और कम समय में तैयार होने वाली यह फसल किसानों के लिए आय बढ़ाने का अच्छा मौका बन सकती है. कृषि वैज्ञानिक एफ.आर. कोसरिया का कहना है कि अगर किसान चने की कटाई के बाद खेत खाली छोड़ने की बजाय सूरजमुखी की खेती करें, तो वे कम समय में अच्छी कमाई कर सकते हैं और अपनी खेती को ज्यादा लाभदायक बना सकते हैं.

Published: 3 Apr, 2026 | 06:00 AM

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