डल्लेवाल का बड़ा आरोप! MSP सिर्फ दिखावा, किसान कर्ज में डूबे.. 23 साल में 111 लाख करोड़ का नुकसान

किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल ने किसान इंडिया से कहा कि एमएसपी की गारंटी नहीं होने से देश में किसानों को हर साल हजारों करोड़ रुपये का आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है. इसके चलते किसान कर्ज में डूबते चले जा रहे हैं. यही वजह है कि किसानों की आत्महत्या करने के मामले भी बढ़ रहे हैं.

नोएडा | Updated On: 30 Mar, 2026 | 02:02 PM

Mandi Rate: टमाटर, आलू, प्याज और मक्का सहित कई फसलों की कीमतों में भारी गिरावट आने पर दिग्गज किसान नेता और भारतीय किसान यूनियन (एकता सिद्धूपुर) के अध्यक्ष जगजीत सिंह डल्लेवाल ने राज्य और केंद्र सरकार पर नाराजगी जताई है. उन्होंने किसान इंडिया से बात करते हुए कहा कि पंजाब, हरियाणा सहित कई राज्यों में आलू, प्याज, टमाटर जैसी नकदी फसलों के रेट में भारी गिरावट आई है. ऐसे में किसान कम रेट पर अपनी उपज बेचने को मजबूर हो गए हैं, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है. उन्होंने कहा कि नकदी फसल की खेती करने वाले किसानों को घाटे से उबारने के लिए सरकार को आर्थिंक मदद करनी चाहिए. डल्लेवाल ने बताया कि 23 साल में एमएसपी से कम रेट होने के चलते किसानों को 111 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है.

वहीं, एमएसपी के तहत आने वाली फसलों की कीमतों में गिरावट पर जगजीत सिंह डल्लेवाल  ने केंद्र सरकार को आड़े हाथ लिया. उन्होंने कहा कि केवल एमएसपी तय करने से कुछ नहीं होने वाला है. केंद्र सरकार को एमएसपी की गारंटी देनी चाहिए. डल्लेवाल ने किसान इंडिया से बात करते हुए कहा कि देश की कई मंडियों में एमएसपी के तहत आने वाली फसलों का रेट भी कम है. किसान औने-पौने दाम पर अपनी उपज बेचने को मजबूर हैं. उन्होंने कहा कि इससे साफ होता है कि केवल एमएसपी की घोषणा से किसानों का भला नहीं होने वाला है. जब, तक सरकार एमएसपी की गारंटी नहीं देती, तब तक किसानों को मार्केट में उनकी मेहनत का पूरा हक नहीं मिलेगा.

किसानों को मिले एमएसपी की गारंटी

जगजीत सिंह डल्लेवाल ने किसान इंडिया से कहा कि एमएसपी की गारंटी नहीं होने से देश में किसानों को हर साल हजारों करोड़ रुपये का आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है. इसके चलते किसान कर्ज में डूबते चले जा रहे हैं. यही वजह है कि किसानों की आत्महत्या करने के मामले भी बढ़ रहे हैं. उन्होंने बताया कि साल 2002 से 2025 तक केवल 23 साल में एमएसपी से कम रेट होने के चलते किसानों को 111 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है. इसलिए सरकार को किसानों को घाटे से उबारने के लिए एमएसपी की गारंटी देनी चाहिए.

पंजाब की मंडियों में आलू, प्याज, टमाटर के रेट

आलू (अहमदगढ़ APMC, 28 मार्च)

टमाटर (पटियाला APMC, 28 मार्च)

प्याज (पटियाला APMC, 28 मार्च)

अगर पंजाब की मंडियों में पर एक नजर डालें तो 28 मार्च को आलू का रेट काफी कम दर्ज किया गया. Agmarknet के आंकड़ों के मुताबिक, इस दिन अहमदगढ़ APMC बाजार में स्थानीय आलू की कुल 0.20 मीट्रिक टन आवक हुई. कीमतें 500 से 600 रुपये प्रति क्विंटल के बीच रहीं, जबकि मॉडल प्राइस 600 रुपये प्रति क्विंटल रहा. यानी किसानों को मार्केट में 5 रुपये किलो की दर से रेट मिला. जबकि, आलू की खेती में लागत 8 से 10 रुपये किलो आती है. इसका मतलब यह हुआ कि किसान घाटे में आलू बेच रहे हैं.

मंडी में टमाटर की आवक और रेट

वहीं, पटियाला APMC बाजार में 28 मार्च को टमाटर का व्यापार  हुआ. इस दिन कुल 55 मीट्रिक टन टमाटर मंडी में आए. कीमतें 400 से 800 रुपये प्रति क्विंटल के बीच रहीं, जबकि मॉडल कीमत 600 रुपये प्रति क्विंटल रही. यानी प्रदेश के टमाटर किसान आर्थिक नुकसान में उपज बेच रहे हैं. हालांकि, इस मंडी में प्याज किसानों को भी अच्छा रेट नहीं मिला. 28 मार्च को पटियाला APMC बाजार में प्याज की कुल आवक 43.50 मीट्रिक टन रही. कीमतें 1,000 से 1,400 रुपये प्रति क्विंटल के बीच रहीं, जबकि मॉडल प्राइस 1,200 रुपये प्रति क्विंटल रहा. कृषि एक्सपर्ट का कहना है कि प्याज की खेती में प्रति क्विंटल 1800 रुपये की लागत आती है. यानी पंजाब के किसान आलू के साथ-साथ प्याज भी घाटे में बेच रहे हैं.

मंडी रेट के आंकड़े Agmarknet से लिए गए हैं

स्थान / मंडी तारीख आवक (मीट्रिक टन) फसल / किस्म न्यूनतम कीमत (₹/क्विंटल) अधिकतम कीमत (₹/क्विंटल) मॉडल कीमत (₹/क्विंटल)
नवांशहर APMC 04/03/2026 36.12 मक्का 1,744 1,744 1,744
नवांशहर APMC 15/03/2026 27.50 मक्का (लोकल) 1,935 1,935 1,935
टप्पा APMC 20/03/2026 10.00 मक्का 2,280 2,280 2,280
आगर APMC (मध्य प्रदेश) 17/03/2026 1.07 मक्का (लोकल) 1,570 1,570 1,570
बगरू APMC (राजस्थान) 29/03/2026 26.00 बाजरा 1,750 1,850 1,800

किस मंडी में कितना है मक्का का रेट

बात अगर मक्का की करें तो पूरे मार्च महीने के दौरान पंजाब में मक्का का रेट एमएसपी से कम रहा. नवांशहर APMC में 4 मार्च को 36.12 मीट्रिक टन मक्का आया, जिसकी कीमत 1,744 रुपये प्रति क्विंटल रही. वहीं, 15 मार्च को 27.50 मीट्रिक टन स्थानीय मक्का मंडी में आया, जिसकी कीमत 1,935 रुपये प्रति क्विंटल रही. इसी तरह टप्पा APMC में 20 मार्च को मक्का की कीमत 2,280 रुपये प्रति क्विंटल रही. हालांकि, अभी मक्का का एमएसपी 2400 रुपये क्विंटल है. इससे स्पष्ट होता है कि आलू, प्याज और टमाटर की तरह मक्का किसान भी घाटे में उपज बेच रहे हैं. खास बात यह है कि देश के सबसे बड़े मक्का उत्पादक राज्यों में से एक मध्य प्रदेश में भी बुरा हाल है. आगर APMC में 17 मार्च को 1.07 मीट्रिक टन स्थानीय मक्का आया. इसकी मिनिमम, मैक्सिमम और मॉडल कीमत 1,570 रुपये प्रति क्विंटल रही. वहीं, राजस्थान में बाजरे का रेट भी एमएसपी 2775 प्रति क्विंटल से काफी कम है. Agmarknet के मुताबिक, 29 मार्च को बगरू APMC में 26 मीट्रिक टन हाइब्रिड बाजरे की आवक हुई. इसकी कीमत 1,750 से 1,850 रुपये प्रति क्विंटल के बीच रही, जबकि मॉडल कीमत 1,800 रुपये प्रति क्विंटल रही.

Published: 30 Mar, 2026 | 01:26 PM

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