Cucumber Farming: हाइब्रिड खीरे की खेती, उत्पादन इतना कि सिर्फ 45 दिनों में हो जाएंगे मालामाल!

Commercial Crops: अब किसान अपनी मेहनत और नई सोच से खेती को मुनाफे का जरिया बना रहे हैं. जैविक तरीके से की गई हाइब्रिड खीरे की खेती से हर सीजन में तकरीबन 70 क्विंटल तक की पैदावार ली जा सकती है.

किसान इंडिया डेस्क
नोएडा | Published: 14 Jan, 2026 | 04:49 PM

Cucumber Farming: अब किसान अपनी मेहनत और नई सोच से खेती को मुनाफे का जरिया बना रहे हैं. अपनी जमीन पर हाइब्रिड खीरे की खेती कर रहे हैं और हर सीजन में तकरीबन 70 क्विंटल तक की पैदावार ले रहे हैं. जैविक तरीके से की गई खीरे की खेती से अधिक मुनाफा प्राप्त कर रहे हैं. इस फसल को स्थानीय बाजार से लेकर दिल्ली तक भेजा जाता है जहां इसकी खूब डिमांड रहती है.

उत्तर प्रदेश के किसान अपनी जमीन पर हाइब्रिड खीरे की खेती कर रहे हैं और हर सीजन में तकरीबन 70-72  क्विंटल तक की पैदावार ले रहे हैं. किसान कहते हैं कि एक पैकेट बीज 10 ग्राम का होता है. इस बार उन्होंने 55 पैकेट बीज बोए हैं. एक बीघा में तकरीबन 5 से 12 क्विंटल तक का उत्पादन करते हैं और हर सीजन में वे 70 से 72 क्विंटल तक का उत्पादन लेते हैं.

कब करें खीरे की बुवाई

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार खीरे की डिमांड स्थानीय बाजारों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि बड़ी मंडियों में भी इसकी बहुत डिमांड होती है. किसान कहते हैं कि फरवरी के आखिर या मार्च के पहले हफ्ते में बुवाई करना सबसे अच्छा रहता है. इस समय पौधे तेजी से बढ़ते हैं और अप्रैल-मई तक फसल तैयार हो जाती हैं. बरसात के बाद जुलाई-अगस्त में दूसरी बार बुवाई की जा सकती है.

कैसे करें खेत की तैयारी

खीरे की खेती करने से पहले खेत की दो बार जुताई करनी चाहिए, जिससे खेत की मिट्टी नरम और भुरभुरी हो जाती है. फिर गोबर की खाद या जैविक खाद डालना चाहिए ताकि मिट्टी उपजाऊ बन जाए. बीज बोते समय खेत की मिट्टी का नम होना आवश्यक है.

जरूरत के अनुसार करें सिंचाई

खीरे की फसल को नियमित सिंचाई की जरूरत होती है लेकिन जलभराव नहीं होना चाहिए. हर तीन दिन में सिंचाई करनी चाहिए. फसल को कीटों से बचने के लिए जैविक कीटनाशक का इस्तेमाल किया जा सकता है. खीरे की फसल की खासियत यह है कि यह कम समय में तैयार हो जाती है और इसकी हार्वेस्टिंग 45 -50 दिनों में शुरू हो जाती है.

बड़ी मंडियों में खूब डिमांड

किसान बताते हैं कि हर सीजन में तकरीबन 70 क्विंटल खीरा मिलता है. जिसे वे दिल्ली, मुरादाबाद और बरेली के बाजारों में भेजते हैं. जब दाम अच्छा मिलता हैं तो हर बीघों से हजारों रुपये का मुनाफा होता है.

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