Rice Price Hike: कर्नाटक में कम बारिश और सूखे जैसे हालात का असर चीनी और प्याज की कीमतों के साथ-साथ चावल पर भी दिखने लगा है. पिछले एक महीने में चावल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी हुई है. चीनी के बढ़ते दामों के बीच अब चावल की महंगाई ने भी लोगों की चिंता बढ़ा दी है. 26 किलो कच्चे चावल के पैकेट की कीमत 1,664 रुपये से बढ़कर 1,924 रुपये हो गई है, यानी इसमें 260 रुपये की बढ़ोतरी हुई है. राज्य में चावल की लगभग सभी किस्मों के दाम बढ़े हैं. आम तौर पर इस्तेमाल होने वाले स्टीम्ड चावल की 26 किलो की बोरी भी पिछले 30 दिनों में 250 से 300 रुपये तक महंगी हो गई है.
लोगों का कहना है कि चावल रोजमर्रा की जरूरत है और इसकी खपत भी ज्यादा है, इसलिए कीमत बढ़ने का सीधा असर घरेलू बजट पर पड़ रहा है. एक चावल मिल मालिक के मुताबिक, फिलहाल सप्लाई मांग के हिसाब से नहीं हो पा रही है. ऐसे में अगले हफ्ते चावल के दाम किस स्तर पर रहेंगे, यह कहना मुश्किल है. वहीं, राज्य में अगस्त के दौरान चीनी के थोक भाव लगातार बढ़े हैं.
कर्नाटक में चीनी का थोक भाव 63 रुपये किलो पहुंचा
वहीं, चीनी के साथ प्याज की कीमतों में भी पिछले 20 दिनों में तेज बढ़ोतरी हुई है. कृषि उपज बाजार समिति (APMC) के सलाहकार रमेश चंद्र लाहोटी ने द न्यू इंडियन एक्सप्रेस से कहा कि चीनी का थोक भाव 45 रुपये से बढ़कर करीब 63 रुपये प्रति किलो पहुंच गया है. लाहोटी ने कहा कि मॉनसून में कम बारिश के कारण राज्य में उत्पादन प्रभावित हुआ है. वहीं, त्योहारी सीजन और इथेनॉल की बढ़ती मांग से चीनी की मांग बढ़ी है, जबकि सप्लाई कम हुई है. उन्होंने कहा कि इस साल कम बुवाई का असर अगले साल की फसल पर भी पड़ सकता है.
कर्नाटक में प्याज 50 रुपये किलो तक पहुंचा
इसी तरह कर्टनाक में प्याज भी महंगा हो गया है. 20-30 रुपये प्रति किलो बिकने वाला प्याज अब 40-50 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है. कारोबारियों के मुताबिक, राज्य में कम बारिश और सूखे जैसे हालात के कारण प्याज की खेती प्रभावित हुई है. बेंगलुरु पोटैटो एंड अनियन मर्चेंट्स एसोसिएशन के सचिव बी. रविशंकर ने कहा कि नई प्याज की फसल आमतौर पर अगस्त के आखिर से दिसंबर तक बाजार में आती है. लेकिन इस बार बारिश देर से होने के कारण बुवाई और फसल की बढ़वार प्रभावित हुई है. उन्होंने कहा कि बारिश पर निर्भर किसानों को सबसे ज्यादा परेशानी हुई है. कुछ इलाकों में बीज खराब हो गए, जबकि जिन किसानों ने बुवाई कर ली है, उन्हें उत्पादन को लेकर चिंता बनी हुई है. अगर बारिश बेहतर होती है तो फसल तैयार होने में करीब एक महीने का समय लग सकता है, वरना किसानों को नुकसान उठाना पड़ सकता है.