Organic Fertilizer: जैविक खेती का गोल्डेन विकल्प, भेड़-बकरी के गोबर से बनी खाद बढ़ाएगी पैदावार और मिट्टी की ताकत

भेड़ और बकरी की खाद को पोषण के मामले में बेहद ताकतवर माना जा रहा है. इसमें नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटेशियम की अच्छी मात्रा होती है. यह मिट्टी की उर्वरता और नमी बनाए रखने की क्षमता बढ़ाती है, जिससे बंजर जमीन भी उपजाऊ बन सकती है.

नोएडा | Published: 22 Feb, 2026 | 11:33 AM

Organic Fertilizer: खेती में अच्छी फसल की पहली शर्त है उपजाऊ मिट्टी. ज्यादातर किसान खाद के लिए गाय और भैंस के गोबर पर भरोसा करते हैं. लेकिन अब कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि एक ऐसा जीव भी है जिसकी खाद ताकत के मामले में उससे भी आगे है. सही तरीके से इस्तेमाल की जाए तो यह खाद बंजर जमीन को भी फिर से उपजाऊ बना सकती है.

क्यों खास है यह खाद?

आम तौर पर किसान गाय-भैंस के गोबर को सबसे बेहतर मानते हैं. इसमें पोषक तत्व संतुलित मात्रा  में होते हैं, जो मिट्टी को धीरे-धीरे ताकत देते हैं. लेकिन भेड़ और बकरी के वेस्ट से बनी खाद पोषण के मामले में ज्यादा असरदार मानी जा रही है. वैज्ञानिक आंकड़ों के अनुसार, भेड़ की खाद में लगभग 3 प्रतिशत नाइट्रोजन, 1 प्रतिशत फास्फोरस और 2 प्रतिशत पोटेशियम पाया जाता है. ये तीनों तत्व फसलों की बढ़त के लिए बेहद जरूरी होते हैं. खासकर फास्फोरस और पोटेशियम की अच्छी मात्रा इसे खास बनाती है. यही कारण है कि इसे प्राकृतिक रूप से बहुत ताकतवर खाद माना जाता है.

मिट्टी को कैसे बनाती है मजबूत?

यह खाद सिर्फ पौधों को पोषण  ही नहीं देती, बल्कि मिट्टी की बनावट भी सुधारती है. इससे जमीन की जल धारण क्षमता बढ़ती है. यानी मिट्टी ज्यादा समय तक नमी को संभालकर रख सकती है. इससे सिंचाई की जरूरत भी कम होती है और पौधों को लगातार पोषण मिलता रहता है. अगर किसी खेत की मिट्टी कमजोर हो गई हो या कई सालों की रासायनिक खेती से उसकी ताकत घट गई हो, तो इस खाद के इस्तेमाल से उसमें नई जान डाली जा सकती है. यही वजह है कि जैविक खेती करने वाले किसान इसे खास महत्व देते हैं.

हर किसान क्यों नहीं कर पाता ज्यादा इस्तेमाल?

इतनी ताकतवर होने के बावजूद यह खाद हर जगह आसानी से उपलब्ध नहीं होती. भेड़ और बकरी का वेस्ट सीमित मात्रा में मिलता है, इसलिए बड़े पैमाने पर इसका इस्तेमाल करना थोड़ा मुश्किल होता है. जिन किसानों के पास खुद भेड़-बकरी नहीं है, उन्हें यह खाद खरीदनी पड़ती है, जो हर जगह आसानी से नहीं मिलती. फिर भी, जहां यह उपलब्ध है, वहां किसान इसे खास फसलों के लिए इस्तेमाल करते हैं. सब्जियां, फल और जैविक खेती  में इसकी मांग ज्यादा है. गुणवत्ता के मामले में इसे जैविक खेती के लिए एक तरह का गोल्ड स्टैंडर्ड माना जाता है.

कम मात्रा में भी बड़ा असर

इस खाद की खास बात यह है कि कम मात्रा में भी इसका असर दिखता है. अगर किसान इसे अन्य जैविक खाद के साथ मिलाकर इस्तेमाल करें, तो बेहतर परिणाम मिल सकते हैं. धीरे-धीरे किसान पारंपरिक खाद के साथ-साथ इस विकल्प को भी अपनाने लगे हैं. खेती में बदलाव का समय है. नई जानकारी और सही प्रयोग से किसान अपनी मिट्टी को फिर से उपजाऊ  बना सकते हैं. आसान शब्दों में कहें तो सही खाद का चुनाव ही अच्छी फसल की कुंजी है और यह खाद उस दिशा में एक मजबूत कदम साबित हो सकती है.

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