मखाना किसानों के लिए गोल्डन टिप्स, सही छिड़काव से दोगुना उत्पादन.. मुनाफा भी बढ़ेगा

मखाना किसानों के लिए फूल अवस्था बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है, जिसमें सही पोषण प्रबंधन से उत्पादन में बड़ा सुधार संभव है. विशेषज्ञों के अनुसार बोरोन, एनपीके और सी-वीड के छिड़काव से दाने मजबूत होते हैं और उपज बढ़ती है. वैज्ञानिक देखभाल से किसानों को बेहतर गुणवत्ता और अधिक मुनाफा मिल सकता है.

Saurabh Sharma
नोएडा | Published: 27 Jun, 2026 | 09:00 PM

Makhana Farming: मखाना की खेती अब तेजी से किसानों के बीच लोकप्रिय हो रही है. पारंपरिक फसलों की तुलना में इसमें बेहतर आमदनी मिलने के कारण बड़ी संख्या में किसान इसकी ओर आकर्षित हो रहे हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि सही समय पर वैज्ञानिक तरीके से फसल प्रबंधन करने पर उत्पादन और गुणवत्ता दोनों में बड़ा सुधार संभव है.

कृषि विशेषज्ञ प्रमोद कुमार के अनुसार, इस समय मखाना की फसल फूल अवस्था में है, जो उत्पादन के लिहाज से सबसे अहम चरण माना जाता है. इस दौरान पौधों को संतुलित पोषण, सही जल स्तर और सूक्ष्म पोषक तत्वों की विशेष जरूरत होती है. यदि किसान इस समय सही देखभाल करें, तो दानों का विकास बेहतर होता है और पैदावार में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हो सकती है.

फूल अवस्था में फसल प्रबंधन बेहद जरूरी

विशेषज्ञ के अनुसार, फूल आने के समय खेत  में पानी का स्तर संतुलित रखना बेहद जरूरी है. न तो पानी की कमी होनी चाहिए और न ही अधिकता. इस अवधि में फसल की लगातार निगरानी जरूरी है ताकि किसी भी कीट या रोग का समय रहते नियंत्रण किया जा सके. स्वस्थ फूल ही आगे चलकर मजबूत और गुणवत्तापूर्ण दानों का निर्माण करते हैं.

बोरोन छिड़काव से होगा बेहतर फलन

कृषि विशेषज्ञ प्रमोद कुमार बताते हैं कि इस अवस्था में बोरोन का छिड़काव बेहद लाभकारी है. मखाना के पत्तों  पर 1 से 5 ग्राम बोरोन प्रति लीटर पानी में मिलाकर 15 दिनों के अंतराल पर छिड़काव करने से फूलों की गुणवत्ता बेहतर होती है. इससे फलन बढ़ता है और दाने अधिक पुष्ट बनते हैं. इसके साथ 19:19:19 एनपीके जल घुलनशील उर्वरक का उपयोग भी फायदेमंद माना जाता है. इसे 5 ग्राम प्रति लीटर पानी में मिलाकर 10 से 15 दिनों के अंतराल पर दो से तीन बार छिड़काव करने की सलाह दी जाती है. इससे पौधों में फूल और फल की संख्या बढ़ती है तथा कुल उत्पादन क्षमता में सुधार होता है.

सी-वीड स्प्रे से मिलेगी बेहतर गुणवत्ता

सी-वीड आधारित जैव उत्पाद का प्रयोग भी इस समय उपयोगी माना जाता है. इसे 2 से 3 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी में मिलाकर 15 दिनों के अंतराल पर छिड़काव करने से पौधों की वृद्धि अच्छी होती है. इससे फूल मजबूत बनते हैं और दानों की गुणवत्ता  तथा आकार में भी सुधार देखने को मिलता है. विशेषज्ञों का कहना है कि यदि किसान इस महत्वपूर्ण चरण में वैज्ञानिक तरीके से पोषण प्रबंधन और नियमित देखभाल करें, तो आने वाले समय में मखाना की पैदावार में बड़ी बढ़ोतरी संभव है और किसानों को बेहतर आर्थिक लाभ मिल सकता है.

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Published: 27 Jun, 2026 | 09:00 PM

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