Cotton Cultivation: हरियाणा में कपास की खेती करने वाले किसानों के लिए राहत की खबर है. अब जल्द ही फसल बीमा दावों का भुगतान हो सकता है. क्योंकि राज्य शिकायत निवारण समिति (SGRC) ने क्षेमा जनरल इंश्योरेंस कंपनी को लगभग 255 करोड़ रुपये के फसल बीमा दावों का भुगतान करने का निर्देश दिया है. कहा जा रहा है कि इससे भिवानी और चरखी दादरी के कपास किसानों को बड़ी राहत मिलेगी. ऐसे यह भुगतान फसल कटाई प्रयोग (CCE) के जरिए दर्ज किए गए वास्तविक औसत उत्पादन के आधार पर किया जाएगा.
द ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, यह फैसला किसानों और उनके संगठनों के एक साल से अधिक समय तक किए गए प्रयासों के बाद आया है. किसानों ने खरीफ 2023 के नुकसान के आकलन के लिए तकनीक आधारित अनुमान के बजाय वास्तविक खेतों के उत्पादन के आधार पर मूल्यांकन की मांग की थी. SGRC के अनुसार, कई किसानों को उनका ‘हक का बीमा क्लेम’ इसलिए नहीं मिल पाया क्योंकि फसल कटाई प्रयोग (CCE) के आधार पर होने वाले उत्पादन डेटा की जगह तकनीक आधारित अनुमान का इस्तेमाल किया गया था.
11 मई की बैठक में फैसला
यह फैसला 11 मई को हुई समिति की 15वीं बैठक में लिया गया, जिसकी अध्यक्षता कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव विजयेंद्र कुमार ने की थी. यह मामला किसान संगठनों की ओर से दिए गए ज्ञापनों के जरिए समिति तक पहुंचा था. इनमें अखिल भारतीय किसान सभा (हरियाणा) जैसे संगठन शामिल थे, जिन्होंने अगस्त 2024 में राज्य तकनीकी सलाहकार समिति (STAC) के फैसले की समीक्षा की मांग की थी.
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भिवानी के किसानों को ज्यादा होगा भुगतान
किसान प्रतिनिधि डॉ. राम कंवर ने बताया कि किसानों ने पूर्व कृषि मंत्री जेपी दलाल से मुलाकात की थी, जिन्होंने इस मामले में हस्तक्षेप किया. उनके हस्तक्षेप के बाद ही राज्य सरकार ने SGRC का गठन किया, जिसने अब यह फैसला लिया है. इस नए फैसले के तहत भिवानी के किसानों को लगभग 213 करोड़ रुपये और चरखी दादरी के किसानों को करीब 42 करोड़ रुपये मिलने की उम्मीद है. यह विवाद भिवानी की 158 और चरखी दादरी की 135 बीमा इकाइयों से जुड़ा हुआ था.
हरियाणा में कपास की खेती
हरियाणा में कपास की खेती ज्यादातर राज्य के पश्चिमी और दक्षिण-पश्चिमी इलाकों में होती है. लेकिन पिछले कुछ सालों में कपास की खेती कम हो गई है. इसका कारण कीटों का हमला (जैसे गुलाबी सुंडी), खराब मौसम और कम मुनाफा है. कपास की बुवाई का सही समय अप्रैल के मध्य से लेकर मई के पहले हफ्ते तक होता है. किसान आमतौर पर मॉनसून आने से पहले ही इसकी बुवाई कर लेते हैं, क्योंकि यह सबसे अच्छा समय माना जाता है. हरियाणा के प्रमुख कपास उत्पादक जिले सिरसा, फतेहाबाद, हिसार, भिवानी, चरखी दादरी, जींद और झज्जर हैं. इनमें सिरसा को कपास उत्पादन का सबसे बड़ा केंद्र माना जाता है.