Cotton Farming: कपास किसानों को बड़ी राहत, सरकार ने 15 दिन के लिए बढ़ाई पंजीकरण अवधि

पंजाब सरकार ने कपास बीज पर 33 फीसदी सब्सिडी के लिए पंजीकरण की अवधि 15 दिन बढ़ा दी है. राज्य में कपास का रकबा लक्ष्य से काफी कम रहा है. किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए यह कदम उठाया गया है, जबकि नई देसी कपास किस्म PBD-88 को भी अच्छा समर्थन मिला है.

Kisan India
नोएडा | Published: 4 Jun, 2026 | 09:50 AM

Punjab News: पंजाब में कपास की खेती करने वाले किसानों को बड़ी राहत है. कृषि विभाग ने कपास बीज पर 33 प्रतिशत सब्सिडी पाने के लिए पोर्टल पर पंजीकरण की अवधि 15 दिन बढ़ा दी है. हालांकि, राज्य में कपास बुवाई का आधिकारिक सीजन 31 मई को समाप्त हो गया है. विभाग को उम्मीद है कि उसके इस फैसले से कपास के रकबे में बढ़ोतरी होगी. सब्सिडी के चलते कई किसान अभी भी कपास की बुवाई कर सकते हैं. ऐसे में धान का रकबा कम होगा, जिससे भूजल स्तर में सुधार होगा.

द ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, कृषि विभाग का कहना है कि पंजाब में 1.25 लाख हेक्टेयर के लक्ष्य के मुकाबले अब तक केवल 77,500 हेक्टेयर क्षेत्र में ही कपास की बुवाई हो सकी है. अधिकारियों का कहना है कि कई किसान समय पर पंजीकरण  नहीं करा पाए थे, इसलिए समय सीमा बढ़ाने का निर्णय लिया गया. साथ ही हाल ही में संपन्न हुए निकाय चुनावों के कारण विभागीय कर्मचारी चुनावी कार्यों में व्यस्त थे, जिससे किसानों तक जानकारी पहुंचाने और पंजीकरण कराने का काम भी प्रभावित हुआ.

समय के साथ घट गया कपास का रकबा

पिछले कुछ वर्षों में कपास की खेती का रकबा लगातार घटता जा रहा है. वर्ष 2022 में 2.48 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में कपास की बुवाई हुई थी, जो 2023 में घटकर 2.14 लाख हेक्टेयर रह गई. इसके बाद 2024 में यह आंकड़ा सिर्फ 1 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया, जबकि 2025 में 1.19 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में कपास की खेती की गई. हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि किसानों की कपास की खेती  में घटती रुचि के पीछे कई कारण हैं. फसल पर बार-बार सफेद मक्खी (व्हाइटफ्लाई) और पिंक बॉलवर्म जैसे कीटों का हमला, न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) का लाभ नहीं मिलना, मजदूरों की कमी और बेमौसम बारिश से होने वाले नुकसान ने किसानों को कपास की खेती से दूर कर दिया है. यही वजह है कि हर साल कपास का रकबा कम होता जा रहा है.

किस जिले में कितनी हुई कपसा की बुवाई

कृषि विभाग की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, इस साल कपास की सबसे ज्यादा बुवाई फाजिल्का जिले में हुई है, जहां 40,610 हेक्टेयर क्षेत्र में फसल लगाई गई है. इसके बाद मानसा में 15,535 हेक्टेयर, मुक्तसर में 10,800 हेक्टेयर और बठिंडा में 10,352 हेक्टेयर क्षेत्र में कपास की खेती की गई है. वहीं, अन्य जिलों में कपास का रकबा काफी कम रहा है. फरीदकोट में 116 हेक्टेयर, बरनाला में 80 हेक्टेयर, संगरूर में 65 हेक्टेयर और मोगा में केवल 22 हेक्टेयर क्षेत्र में कपास की बुवाई दर्ज की गई है. आंकड़े बताते हैं कि राज्य में कपास की खेती कुछ चुनिंदा जिलों तक ही सीमित होती जा रही है.

बीजों पर 33 प्रतिशत तक सब्सिडी

कपास किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार बीटी और देसी कपास  के बीजों पर 33 प्रतिशत तक सब्सिडी दे रही है. यह लाभ अधिकतम दो हेक्टेयर क्षेत्र तक की खेती के लिए मिलेगा. सब्सिडी पाने के लिए किसानों को कृषि विभाग के पोर्टल पर पंजीकरण कर जरूरी जानकारी जमा करनी होगी. पंजाब कृषि विभाग के निदेशक गुरजीत सिंह बराड़ ने कहा है कि पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (PAU), लुधियाना द्वारा विकसित नई देसी कपास किस्म PBD-88 को किसानों का अच्छा समर्थन मिला है. इस सीजन में 1,388 हेक्टेयर क्षेत्र में इस किस्म की बुवाई की गई है, जो किसानों के बढ़ते भरोसे को दर्शाता है.

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