राजस्थान में 6 डिग्री ज्यादा तापमान, गेहूं और सरसों पर मंडराने लगा खतरा.. एक्सपर्ट ने बताए बचाव के टिप्स

सिंचाई की कमी ने किसानों पर दबाव बढ़ा दिया है. कृषि विभाग के अनुसार, तापमान के बढ़ने से राहत पाने का तत्काल उपाय सिर्फ सिंचाई है. श्री गंगानगर के कृषि विज्ञान केंद्र के संयुक्त निदेशक सुरजीत बिश्नोई कहते हैं कि फसलों में पानी देने से गर्मी का तनाव कम किया जा सकता है, लेकिन कई किसान सिंचाई का खर्च वहन नहीं कर पा रहे हैं.

नोएडा | Published: 18 Feb, 2026 | 01:51 PM

Rajasthan Agriculture News: राजस्थान के हनुमानगढ़ और श्री गंगानगर जिले में फरवरी के दूसरे हफ्ते में अचानक तापमान में बढ़ोतरी ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है. अधिकतम तापमान सामान्य से 5-6 डिग्री सेल्सियस अधिक दर्ज किया गया. हाल के दिनों में हनुमानगढ़ में 29°C, सांगरिया में 28.2°C और श्री गंगानगर में 30.4°C तापमान रिकॉर्ड हुआ. खड़ी रबी फसल अब असामयिक गर्मी का सामना कर रही है, जिससे किसानों की चिंता बढ़ रही है. साथ ही किसानों का कहना है कि अगर तापमान बढ़ता रहा, तो रबी फसल खासकर गेहूं को नुकसान होगा. हालांकि, अभी में गेहूं की फसल मिल्की स्टेज में है, यानी दाने बनने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है. किसानों के मुताबिक, इस समय मौसम सामान्य होना चाहिए था, लेकिन बढ़ता तापमान उन्हें बेचैन कर रहा है.

7,14,680 हेक्टेयर में रबी फसल बोई गई

डाउन टू अर्थ की रिपोर्ट के मुताबिक, हनुमानगढ़ और श्री गंगानगर में कुल 7,14,680 हेक्टेयर में रबी फसल बोई गई  है. इसमें सबसे बड़ी हिस्सेदारी गेहूं और सरसों की है, जिसमें अकेले गेहूं 4,80,900 हेक्टेयर में बोया गया है. कृषि विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि इतने बड़े क्षेत्र में अचानक तापमान बढ़ने से गंभीर नुकसान हो सकता है. सांगरिया के कृषि विज्ञान केंद्र के प्रधान वैज्ञानिक अनूप कुमार के अनुसार, बढ़ती गर्मी खासकर गेहूं के लिए हानिकारक है. सरसों को भी नुकसान हो सकता है, लेकिन गेहूं सबसे ज्यादा प्रभावित होगा. उन्होंने कहा कि ये फसलें अभी शुरुआती स्टेज में हैं और दाने बनने की प्रक्रिया अभी शुरू हुई है.

क्या कहते हैं स्थानीय किसान

मेहरवाला गांव के किसान गुरचरन सिंह भी इसी चिंता को साझा करते हैं. उन्होंने नौ बीघा में सरसों और चार बीघा में गेहूं  बोया है. उनका कहना है कि कम से कम एक महीने तक मौसम सामान्य होना चाहिए, लेकिन अचानक तापमान बढ़ रहा है. श्री गंगानगर के कृषि विज्ञान केंद्र के संयुक्त निदेशक सुरजीत बिश्नोई ने कहा कि सामान्य से अधिक तापमान से फसल जल्दी पक सकती है. सरसों लगभग पक चुकी है और उसे बड़ा नुकसान नहीं होगा, लेकिन गेहूं और जौ मिल्की स्टेज में हैं. अगर तापमान बढ़ता रहा, तो दाने सिकुड़ सकते हैं और कुल उत्पादन कम हो सकता है.

सिंचाई करने की सलाह

वहीं, सिंचाई की कमी ने किसानों पर दबाव बढ़ा दिया है. कृषि विभाग के अनुसार, तापमान के बढ़ने से राहत पाने का तत्काल उपाय सिर्फ सिंचाई है. श्री गंगानगर के कृषि विज्ञान केंद्र के संयुक्त निदेशक सुरजीत बिश्नोई कहते हैं कि फसलों में पानी देने से गर्मी का तनाव कम किया जा सकता है, लेकिन कई किसान सिंचाई का खर्च वहन नहीं कर पा रहे हैं. सिंचाई के पानी की भारी कमी के कारण अधिकांश नहरें बंद हैं. संयुक्त किसान संघर्ष मोर्चा  द्वारा आयोजित एक किसान बैठक में बताया गया कि गंग नहर परियोजना के लिए कम से कम 1,500 क्यूसेक पानी चाहिए, जबकि वर्तमान में केवल 970 क्यूसेक ही उपलब्ध है. इससे परियोजना की 23 में से केवल तीन नहरें ही चल रही हैं.

 

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