टमाटर किसानों के लिए बड़ा खतरा! ‘धब्बा रोग’ से बर्बाद हो सकती है पूरी फसल, जानिए एक्सपर्ट टिप्स

Tomato Farming: टमाटर की खेती करने वाले किसानों के सामने एक बड़ी समस्या खड़ी हो गई है, जिसे टमाटर का जीवाणु धब्बा रोग (बैक्टीरियल स्पॉट डिजीज़) कहते हैं. इस रोग के लगने से भारी नुकसान का सामना करना पड़ता है. कैसे बचाएं टमाटर की फसल को जानिए इस रिपोर्ट में.

किसान इंडिया डेस्क
नोएडा | Updated On: 29 Mar, 2026 | 07:38 PM

टमाटर की खेती करने वाले किसानों को टमाटर की फसल में लगने वाले रोग अक्सर परेशान कर देते हैं. इस रोग के लगने से किसानों की लगभग पूरी फसल बर्बाद हो जाती है जिसके कारण उन्हें भारी नुकसान का सामना करना पड़ता है. यह रोग जैथोमोनास कैंपेस्ट्रिम पी.सी वेसिकेटोरिया नामक बैक्टीरिया से होता है, जो पौधे के हर हिस्से को संक्रमित करता है. इस बीमारी की शुरुआत पौधे की पत्तियों और फलों पर हल्के हरे या पीले धब्बे से होती है, जो धीरे-धीरे काले और उभरे हुए बन जाते हैं. फलों पर यह धब्बे कठोर और पपड़ीदार हो जाते हैं, जिनसे उनका बाजार मूल्य घट जाता है.

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार इस रोग का प्रकोप गर्मियों के मौसम में उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड जैसे राज्य में अधिक देखने को मिलता है. इस रोग के कारण किसानों की मेहनत और फसल दोनों ही बर्बाद हो जाती है और उन्हें भारी आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ता है.

कैसे फैलता है रोग

एक्सपर्ट के अनुसार यह रोग टमाटर की फसलों में तेजी से फैलता है. इस रोग के फैलाव का कारण संक्रमित बीज, पुराने पौधों के अवशेष या खरपतवार होते हैं. ये बैक्टीरिया जनित रोग खेत के मलबे में लंबे समय तक जीवित रह सकते हैं और नमी मिलने पर फिर से सक्रिय हो सकते हैं. इस बैक्टीरिया का असर सबसे पहले पौधों की पत्तियों पर दिखाई देता है. पत्तियों पर पानी से भीगे धब्बे दिखने लगते हैं, जो धीरे-धीरे पूरी पत्ती में फैल जाते हैं और जिस कारण पत्तियां सूखने लगती हैं. फल बनने के समय अगर संक्रमण फैल जाता है तो इससे फलों की गुणवत्ता प्रभावित होती है. उत्पादन में कमी आती है और बाजार मूल्य भी प्रभावित होता है. इस रोग के लग जाने के कारण किसानों का न केवल उत्पादन घटता है बल्कि पौधों की वृद्धि भी प्रभावित होती है.

कैसे करें बचाव

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार किसान इस रोग से अपनी फसल को बचाने के लिए कुछ सावधानियां अपना सकते हैं. सबसे पहले रोग मुक्त बीज और पौधों का चुनाव करें. बीज को बोने से पहले गर्म पानी या जीवाणुनाशक घोल से उपचारित करना चाहिए. स्प्रिंकल इरिगेशन की जगह ड्रिप इरीगेशन अपनाए, ताकि पत्तियों पर नमी न रहे जिससे बैक्टीरिया का फैलाव नही होगा. खेतों में मौजूद पुराने पौधों के अवशेष को नष्ट कर देना चाहिए और खरपतवार नियमित रूप से हटाते रहना चाहिए ताकि बैक्टीरिया न फैले.

कॉपर फंगीसाइड से राहत

रोग को रोकने के लिए वैज्ञानिकों ने कॉपर आधारित फफूंदनाशी (कॉपर फंगीसाइड) के छिड़काव की सलाह दी है. इससे बैक्टीरिया की वृद्धि रुक जाती है और नए पौधों को संक्रमण से बचाया जा सकता है. इसके अलावा, किसान हर सिंचाई या फसल कार्य के बाद औजारों को साफ करें और खेतों को स्वच्छ रखें. ग्रीनहाउस में उत्पादन करने वाले किसान तापमान और नमी का संतुलन बनाए रखें ताकि बैक्टीरिया का फैलाव ना हो सके.

कुल मिलाकर साफ-सुथरी खेती, रोग-मुक्त बीज और नियमित निगरानी अपनाकर किसान इस बीमारी से फसल को सुरक्षित रख सकते हैं. ऐसा करने से खेत लहलहाते रहेंगे और उत्पादन भी बढ़ता है.

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Published: 29 Mar, 2026 | 03:17 PM
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