ICAR और ICRISAT ने विकसित की हाई ओलिक मूंगफली, किसानों को मिलेगा बेहतर तेल और ज्यादा दाम
ICRISAT और ICAR के तहत विकसित नई हाई-ओलिक मूंगफली किस्में किसानों के लिए लाभकारी साबित होंगी. इनमें अधिक तेल, बेहतर गुणवत्ता और लंबी भंडारण क्षमता है, जिससे उत्पादन बढ़ेगा और बाजार में बेहतर कीमत मिलने की संभावना मजबूत होगी.
High-Oleic Peanut: मूंगफली की खेती करने वाले किसानों के लिए अच्छी खबर है. अर्ध-शुष्क उष्णकटिबंधीय के लिए अंतर्राष्ट्रीय फसल अनुसंधान संस्थान (ICRISAT) ने मूंगफली की दो नई हाई-ओलिक किस्में विकसित की हैं. सरकार और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के तहत संचालित अखिल भारतीय समन्वित मूंगफली अनुसंधान परियोजना (AICRP-G) ने हाल ही में इन दोनों किस्मों ICGV 201214 और ICGV 181030 को राष्ट्रीय स्तर पर जारी करने के लिए चुना है. इन नई किस्मों का उद्देश्य किसानों को बेहतर उत्पादन, अधिक गुणवत्ता वाला तेल और बाजार में बेहतर कीमत दिलाना है.
ज्यादा ओलिक एसिड से मिलेगा बेहतर दाम और लंबी स्टोरेज
ICRISAT के अनुसार, इन दोनों नई किस्मों में सामान्य मूंगफली की तुलना में ओलिक एसिड की मात्रा काफी अधिक है. हाई-ओलिक मूंगफली से निकलने वाले तेल की भंडारण क्षमता अधिक होती है, यानी यह लंबे समय तक खराब नहीं होता. इसके साथ ही यह पोषण के लिहाज से भी बेहतर माना जाता है. खाद्य उत्पाद बनाने वाली कंपनियों और स्वास्थ्य के प्रति जागरूक उपभोक्ताओं के बीच ऐसे तेल की मांग लगातार बढ़ रही है. ऐसे में किसानों को अपनी फसल का प्रीमियम यानी सामान्य किस्मों की तुलना में बेहतर दाम मिलने की संभावना बढ़ेगी.
कई राज्यों के किसानों के लिए बेहतर विकल्प
नई किस्म ICGV 181030 को ICRISAT और कृषि विज्ञान विश्वविद्यालय, धारवाड़ (कर्नाटक) ने मिलकर विकसित किया है. यह मध्यम अवधि वाली स्पैनिश बंच किस्म है, जिसे खरीफ मौसम के लिए अनुशंसित किया गया है. यह जोन-2 (गुजरात, राजस्थान और महाराष्ट्र) तथा जोन-4 (झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर राज्यों) के किसानों के लिए उपयुक्त मानी गई है. ICRISAT की प्रधान वैज्ञानिक (मूंगफली प्रजनन) जनीला पशुपोलेटी के अनुसार, इस किस्म में लगभग 78 प्रतिशत ओलिक एसिड पाया जाता है. लगातार तीन वर्षों के परीक्षण में इसने जोन-4 में प्रचलित किस्म गिरनार-3 की तुलना में 7 प्रतिशत अधिक उपज दर्ज की है.
81 फीसदी ओलिक एसिड, 53 फीसदी तेल, 27 फीसदी प्रोटीन
दूसरी नई किस्म ICGV 201214 को ICRISAT और जूनागढ़ कृषि विश्वविद्यालय ने संयुक्त रूप से विकसित किया है. यह भी मध्यम अवधि की स्पैनिश बंच किस्म है और खरीफ सीजन में जोन-2 (गुजरात और राजस्थान) के किसानों के लिए अनुशंसित की गई है. इस किस्म की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें 81 प्रतिशत ओलिक एसिड, 53 प्रतिशत तेल और 27 प्रतिशत प्रोटीन पाया जाता है. इसके दाने आकार में बड़े और आकर्षक होते हैं, जिससे बाजार में इसकी मांग अधिक रहने की संभावना है. विशेषज्ञों का मानना है कि इन नई हाई-ओलिक किस्मों के आने से किसानों को बेहतर उत्पादन, अधिक गुणवत्ता वाला तेल और बाजार में प्रीमियम कीमत मिलने का रास्ता खुलेगा.