देश में फ्लोरीकल्चर बना मुनाफे का बड़ा जरिया, फिर भी पूर्वोत्तर राज्यों में क्यों नहीं मिल रही सफलता?

Floriculture Business India: भारत में फूलों की खेती तेजी से बढ़ रही है और 2025-26 तक इसका क्षेत्रफल करीब 4 लाख हेक्टेयर पहुंच गया है. इससे किसानों की आय भी बढ़ी है और यह एक मजबूत नकदी फसल बनकर उभरी है. लेकिन पूर्वोत्तर भारत में बाजार, कोल्ड स्टोरेज और परिवहन की कमी के कारण इस खेती में गिरावट देखने को मिली है.

Isha Gupta
नोएडा | Updated On: 15 Jun, 2026 | 04:34 PM

Flower Farming: भारत में फूलों की खेती यानी फ्लोरीकल्चर का कारोबार पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ा है. साल 2025-26 तक देश में इसका क्षेत्रफल बढ़कर करीब 4 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया है. यह दिखाता है कि किसान अब पारंपरिक खेती के साथ-साथ नकदी फसलों की ओर भी तेजी से बढ़ रहे हैं.

इसी दौरान फूलों के कारोबार से होने वाला सकल मूल्य वर्धन (GVA) भी 2019-20 के 39,287 करोड़ रुपये से बढ़कर 2023-24 में 51,643 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है. यह आंकड़े बताते हैं कि यह सेक्टर लगातार मजबूत हो रहा है.

पूर्वोत्तर भारत में घटती फूलों की खेती

जहां देश के कई हिस्सों में फूलों की खेती बढ़ रही है, वहीं पूर्वोत्तर भारत की कहानी थोड़ी अलग है. यहां कई राज्यों में फूलों की खेती का क्षेत्र लगातार घटता जा रहा है. बिजनेस लाइन की रिपोर्ट के अनुसार, अरुणाचल प्रदेश इसका बड़ा उदाहरण है. कभी यह राज्य एंथूरियम फूलों के उत्पादन के लिए जाना जाता था, लेकिन अब किसान धीरे-धीरे इस खेती से दूर हो रहे हैं और दूसरी फसलों की ओर रुख कर रहे हैं. इसका असर यह हुआ कि अब एंथूरियम की खेती मेघालय, नागालैंड, बिहार, पश्चिम बंगाल और केरल जैसे राज्यों में फैल रही है.

क्यों पिछड़ रहा है पूर्वोत्तर?

विशेषज्ञों के अनुसार, पूर्वोत्तर में फूलों की खेती के पीछे कई बड़ी समस्याएं हैं.

  • मजबूत बाजार व्यवस्था की कमी
  • कोल्ड स्टोरेज और परिवहन सुविधाओं का अभाव
  • तुरंत मुनाफा देने वाली दूसरी फसलों का आकर्षण
  • प्रसंस्करण और विपणन ढांचे की कमजोरी

इन सभी कारणों से यहां की प्राकृतिक अनुकूलता होने के बावजूद भी यह क्षेत्र पीछे रह गया है.

नागालैंड, सिक्किम और मिजोरम की स्थिति

इन चुनौतियों के बीच नागालैंड ने एक सकारात्मक उदाहरण पेश किया है. यहां 2015-16 में फूलों की खेती सिर्फ 70 हेक्टेयर में होती थी, जो 2023-24 तक बढ़कर 1,190 हेक्टेयर तक पहुंच गई. यह बताता है कि अगर सही नीति, बाजार सुविधा और समर्थन मिले तो फूलों की खेती किसानों के लिए बड़ी आय का जरिया बन सकती है.

सिक्किम में ऑर्किड की खेती लंबे समय से स्थिर बनी हुई है. यहां लगभग 242 हेक्टेयर क्षेत्र में इसकी खेती होती है. वहीं मिजोरम में स्थिति चिंताजनक है, जहां 2017-18 में 240 हेक्टेयर में फूलों की खेती होती थी, लेकिन अब यह घटकर सिर्फ 50 हेक्टेयर रह गई है.

देश में कौन से राज्य आगे हैं?

भारत में फूल उत्पादन में कुछ राज्य प्रमुख भूमिका निभा रहे हैं:

  • तमिलनाडु – 19 फीसदी
  • मध्य प्रदेश – 14 फीसदी
  • कर्नाटक – 12 फीसदी
  • आंध्र प्रदेश – 11 फीसदी
  • पश्चिम बंगाल – 10 फीसदी

ये राज्य देश के फ्लोरीकल्चर उद्योग की रीढ़ माने जाते हैं.

बढ़ती संभावनाएं और भविष्य

भारत में बागवानी उत्पादन लगातार बढ़ रहा है और 2025-26 में यह 377.78 मिलियन टन तक पहुंच गया है. इसमें फ्लोरीकल्चर की हिस्सेदारी भी बढ़कर 1.2 फीसदी हो गई है.

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Published: 15 Jun, 2026 | 04:34 PM

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