कम लागत में करनी हैं बंपर कमाई तो गन्ने के साथ मूंगफली उगाएं, बस इस तरह करें बुवाई

भारत में तिलहन उत्पादन बढ़ाने के लिए गन्ने के साथ मूंगफली की सहफसली खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है. गन्ने की कतारों के बीच मूंगफली उगाने से बिना अतिरिक्त जमीन के दूसरी फसल मिलती है. इससे किसानों की आय बढ़ सकती है और खाद्य तेल के लिए आयात पर निर्भरता घटाने में मदद मिलेगी. उत्तर प्रदेश में 10 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में योजना विस्तार की तैयारी है.

नोएडा | Updated On: 20 Aug, 2026 | 03:55 PM

अगर आप किसान हैं और कम लागत में ज्यादा कमाई करना चाहते हैं, तो गन्ना के साथ मूंगफली की खेती कर सकते हैं. क्योंकि केंद्र सरकार घरेलू स्तर पर तिलहन उत्पादन बढ़ाने के लिए गन्ने के साथ मूंगफली की सहफसली खेती को बढ़ावा दे रही है. इसका मकसद बिना अतिरिक्त कृषि भूमि बढ़ाए देश में खाद्य तेल के लिए जरूरी तिलहन का उत्पादन बढ़ाना है. यह पहल CIMMYT और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) ने मिलकर विकसित की है. इसके तहत गन्ने की फसल के शुरुआती महीनों में उसकी कतारों के बीच कम समय में तैयार होने वाली मूंगफली की किस्मों की खेती की जाती है.

इस तरीके से एक ही खेत में गन्ने के साथ मूंगफली की फसल भी ली जा सकती है. इससे किसानों को अतिरिक्त फसल से आय मिल सकती है और देश में मूंगफली समेत तिलहन का उत्पादन  बढ़ाने में मदद मिलेगी. खास बात यह है कि इसे तरीके में गन्ने की कतारों के बीच खाली जगह में मूंगफली उगाई जाती है. इससे गन्ने की खेती के लिए इस्तेमाल होने वाली जमीन कम किए बिना एक अतिरिक्त तिलहन फसल पैदा की जा सकती है.

गन्ने की कतारों के बीच खाली जगह में होगी मूंगफली की खेती

गन्ने की कतारों के बीच आमतौर पर 60 से 120 सेंटीमीटर की दूरी होती है. इसी खाली जगह का इस्तेमाल मूंगफली की खेती के लिए किया जाता है. गन्ने की पत्तियां फैलकर छाया करने से पहले मूंगफली की फसल तैयार हो जाती है और उसकी कटाई कर ली जाती है. इस सहफसली व्यवस्था से सिर्फ मूंगफली का उत्पादन ही नहीं बढ़ता, बल्कि गन्ने को भी फायदा हो सकता है.

मूंगफली से बढ़ेगा तिलहन उत्पादन

दरअसल, मूंगफली दलहन फसल है, जो मिट्टी में नाइट्रोजन बढ़ाने में मदद करती है. इसके पौधे जमीन को ढककर मिट्टी की नमी बनाए रखने और खरपतवार कम करने में भी मदद करते हैं. भारत अपनी घरेलू जरूरत के करीब 60 फीसदी खाद्य तेल का आयात  करता है. ऐसे में मूंगफली जैसी तिलहन फसलों का उत्पादन बढ़ाकर आयात पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है. उत्तर प्रदेश में करीब 27 लाख हेक्टेयर जमीन पर गन्ने की खेती होती है. परियोजना के अनुमान के मुताबिक, अगर इसके 20  फीसदी क्षेत्र में गन्ने के साथ मूंगफली की खेती की जाए तो हर साल करीब 6.53 लाख टन अतिरिक्त मूंगफली का उत्पादन हो सकता है.

यूपी में 10 लाख हेक्टेयर गन्ना क्षेत्र में मूंगफली की खेती की तैयारी

उत्तर प्रदेश सरकार ने इस मॉडल को बढ़ाने के लिए 10 लाख हेक्टेयर गन्ना क्षेत्र में कार्यक्रम शुरू किया है. इसके तहत किसानों को वैज्ञानिक मदद, बेहतर बीज और खेती के लिए जरूरी मशीनें उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है. भारत के लिए यह मॉडल तिलहन उत्पादन बढ़ाने का एक आसान तरीका हो सकता है. इससे बिना अतिरिक्त कृषि जमीन बढ़ाए देश में तिलहन का उत्पादन बढ़ेगा और खाद्य तेल बनाने के लिए कच्चे माल की उपलब्धता भी बढ़ सकती है. इससे भारत को खाद्य तेल  के मामले में आत्मनिर्भर बनने में मदद मिलेगी.

Published: 20 Aug, 2026 | 03:22 PM

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