एक बार करें इस मसाले की खेती, 40 साल तक आएगा पैसा! सरकार भी दे रही मोटी सब्सिडी, जानें पूरा बिजनेस प्लान

Tips For Farmers: लौंग की खेती आज किसानों के लिए एक फायदे का सौदा बनती जा रही है. बाजार में लगातार ऊंचे दाम और कम उत्पादन के कारण इसकी मांग हमेशा बनी रहती है. सही मौसम, धैर्य और देखभाल के साथ किसान एक एकड़ से सालाना करीब 3 लाख रुपये तक कमा सकते हैं. साथ ही सरकारी सब्सिडी इस खेती को और आसान बना रही है.

नोएडा | Published: 27 Jan, 2026 | 11:54 AM

Laung Ki Kheti: आज की खेती-किसानी में वही किसान आगे बढ़ रहे हैं जो पारंपरिक फसलों से हटकर ऐसी नगदी फसलों को चुन रहे हैं, जिनकी बाजार में लगातार मांग बनी रहती है. ऐसी ही एक फसल है लौंग, जो भले ही दिखने में छोटी हो, लेकिन मुनाफे के मामले में बड़ी भूमिका निभा रही है. भारतीय रसोई से लेकर आयुर्वेदिक दवाओं तक, लौंग की जरूरत हर जगह होती है. यही वजह है कि इसकी मांग हमेशा बनी रहती है, जबकि देश में उत्पादन सीमित है.

भारत में लौंग का ज्यादातर हिस्सा इंपोर्ट किया जाता है. ऐसे में जो किसान इसकी खेती शुरू कर रहे हैं, उनके लिए यह फसल ‘लॉन्ग टर्म इनकम’ का मजबूत जरिया बनती जा रही है. खास बात यह है कि एक बार पौधे तैयार हो जाएं तो यह फसल कई पीढ़ियों तक कमाई देती है.

लौंग की खेती के लिए जरूरी मौसम और मिट्टी

लौंग की खेती के लिए गर्म और नम जलवायु सबसे उपयुक्त मानी जाती है. इसका पौधा ज्यादा ठंड या जल भराव को सहन नहीं कर पाता. 20 से 35 डिग्री सेल्सियस तापमान इसके विकास के लिए बेहतर रहता है. मिट्टी की बात करें तो उपजाऊ काली मिट्टी या लाल दोमट मिट्टी, जिसमें पानी निकास की अच्छी व्यवस्था हो, लौंग के लिए सही मानी जाती है.

खेती का तरीका और रोपाई

लौंग की खेती में धैर्य सबसे जरूरी है. किसान नर्सरी से 1-2 साल पुराने पौधे लाकर रोपाई करें तो बेहतर परिणाम मिलते हैं. खेत में करीब 3 मीटर की दूरी पर गड्ढे खोदकर उनमें गोबर की खाद मिलाई जाती है. मानसून की शुरुआत, यानी जून-जुलाई का समय पौधारोपण के लिए सबसे अच्छा होता है. शुरुआती समय में पौधों को तेज धूप से बचाना जरूरी होता है.

देखभाल, सिंचाई और कटाई

लौंग के पौधों को बहुत ज्यादा पानी की जरूरत नहीं होती, लेकिन नमी बनी रहनी चाहिए. गर्मियों में सप्ताह में एक बार और सर्दियों में 15-20 दिन में एक बार सिंचाई पर्याप्त रहती है. करीब 6-7 साल बाद पौधे फूल की कलियां देना शुरू करते हैं. हल्का गुलाबी रंग आने पर कलियों को तोड़ लिया जाता है और धूप में सुखाकर बाजार के लिए तैयार किया जाता है.

कमाई का पूरा गणित

एक परिपक्व लौंग का पेड़ सालाना 2 से 4 किलो सूखी लौंग देता है. अगर एक एकड़ में 100 पेड़ लगाए जाएं तो औसतन 300 किलो उत्पादन संभव है. बाजार में लौंग का भाव ₹800 से ₹1200 प्रति किलो तक रहता है. इस हिसाब से किसान सालाना करीब 3 लाख रुपये तक की कमाई कर सकते हैं. साथ ही, नारियल या केला जैसी इंटरक्रॉपिंग से अतिरिक्त आमदनी भी हो सकती है.

सरकारी मदद और भविष्य की संभावनाएं

नेशनल हॉर्टिकल्चर मिशन के तहत कई राज्यों में लौंग की खेती पर 40-50 प्रतिशत तक सब्सिडी दी जा रही है. किसान अपने जिले के कृषि विज्ञान केंद्र या उद्यान विभाग से जानकारी लेकर इस योजना का लाभ उठा सकते हैं.

कुल मिलाकर, लौंग की खेती उन किसानों के लिए बेहतरीन विकल्प है जो कम जोखिम में स्थायी और लंबी अवधि की कमाई चाहते हैं. थोड़े धैर्य और सही देखभाल के साथ यह फसल खेत को भविष्य की पूंजी में बदल सकती है.

Topics: