महाराष्ट्र में आम और काजू की फसल 70 फीसदी तक बर्बाद, CM ने आर्थिक मदद देने का किया ऐलान

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि एक समीक्षा बैठक में यह सामने आया कि कई जगहों पर फसल को भारी नुकसान हुआ है. सर्वे के अनुसार पालघर में करीब 45 फीसदी और सिंधुदुर्ग में लगभग 90 फीसदी आम की फसल खराब हो गई है. साथ ही काजू की फसल को भी नुकसान हुआ है.

नोएडा | Updated On: 19 Mar, 2026 | 01:04 PM

Maharashtra News: महाराष्ट्र सरकार ने बागवानी करने वाले किसानों के हित में बड़ा फैसला लिया है. मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की सरकार ने घोषणा की है कि प्रदेश के आम और काजू किसानों को मौसम की मार के चलते फसल बर्बाद होने पर आर्थिक मदद दी जाएगी. सरकार ने यह फैसला सिंधुदुर्ग और रत्नागिरि जिले में 70 से 90 फीसदी तक आम और काजू की फसल बर्बाद होने के बाद लिया है. कहा जा रहा है कि इस फैसले से प्रदेश के लाखों बागवानी किसानों ने राहत की सांस ली है. सरकार को उम्मीद है कि उसके इस फैसले से बागवानी करने वाले किसानों को नुकसान से बचने में मदद मिलेगी और वे पहले ज्यादा रकबे में खेती करेंगे.

दरअसल, कोकण क्षेत्र में उगने वाले अल्फांसो आम और काजू की फसल  इस साल मौसम के अचानक बदलाव से काफी प्रभावित हुई है. मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि एक समीक्षा बैठक में यह सामने आया कि कई जगहों पर फसल को भारी नुकसान हुआ है. सर्वे के अनुसार पालघर में करीब 45 फीसदी और सिंधुदुर्ग में लगभग 90 फीसदी आम की फसल खराब हो गई है. साथ ही काजू की फसल को भी नुकसान हुआ है, जिसकी जांच कुछ जिलों में पूरी हो चुकी है और बाकी जगहों पर अभी जारी है.

बागवानी करने वाले किसानों में खुशी का माहौल

राज्य सरकार के इस फैसल से बागवानी करने वाले किसानों में खुशी का माहौल है. किसानों ने सरकार के इस फैसले का स्वागत किया है. कोकण मैंगो ग्रोअर्स एंड सेलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष विवेक भिड़े ने हिन्दुस्तान टाइम्स से कहा है कि इस साल आम और काजू की फसल को भारी नुकसान हुआ है, जिससे किसान बहुत परेशान हुए. उन्होंने कहा कि किसानों ने अपनी समस्याएं पहले ही स्थानीय नेताओं तक पहुंचाई थीं और अब वे सरकार की मदद के फैसले से खुश हैं, लेकिन उन्हें वित्तीय सहायता की पूरी जानकारी का इंतजार है.

किसानों को काफी नुकसान उठाना पड़ा

वहीं रत्नागिरी के काजू किसान विवेक बरगीर ने भी इस मदद का स्वागत किया, लेकिन साथ ही सरकार से अपील की कि डापोली के कृषि संस्थान के विशेषज्ञों को खेतों में भेजा जाए ताकि वे किसानों की समस्याओं को बेहतर समझ सकें. उन्होंने कहा कि इस साल कीटों के बार-बार हमले के कारण भी किसानों को काफी नुकसान  उठाना पड़ा है. ऐसे में सरकार की ये घोषणा किसानों के लिए राहत लेकर आई है.

20,173 टन आम निर्यात किया गया था

कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार, महाराष्ट्र में आम की खेती करीब 1.67 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में होती है, जिसमें से लगभग 1.23 लाख हेक्टेयर कोकण क्षेत्र में है. कोकण के रत्नागिरी और सिंधुदुर्ग जिले में किसान बड़े स्तर पर अल्फांसो आम की खेती करते हैं. रत्नागिरी में करीब 68,550 हेक्टेयर और सिंधुदुर्ग में 34,760 हेक्टेयर में आम का रकबा फैला हुआ है. इन दोनों जिलों में हर साल औसतन 2.25 लाख टन अल्फांसो आम का उत्पादन होता है. इसके अलावा ठाणे, पालघर और रायगढ़ में भी करीब 26,089 हेक्टेयर में आम उगाया जाता है, लेकिन वहां अल्फांसो किस्म नहीं होती. साल 2025 में महाराष्ट्र से 20,173 टन आम का निर्यात किया गया था.

श्रेणी स्थान/जिला आम क्षेत्रफल (हेक्टेयर) काजू क्षेत्रफल (हेक्टेयर) आम उत्पादन काजू उत्पादन आम नुकसान (%) काजू नुकसान (%)
कुल महाराष्ट्र 1.67 लाख
क्षेत्रीय कोकण 1.23 लाख 1.75 लाख 3 लाख मीट्रिक टन/वर्ष
जिला रत्नागिरी 68,550 (75% का हिस्सा) | | 80–90% 50%
जिला सिंधुदुर्ग 34,760 (75% का हिस्सा) | | 85–90% 60–70%
जिला रायगढ़ 70–80%
जिला ठाणे 60%
जिला पालघर 45%
उत्पादन रत्नागिरी + सिंधुदुर्ग 2.25 लाख टन/वर्ष
निर्यात महाराष्ट्र (2025) 20,173 टन

लगभग 1.75 लाख में हेक्टेयर होती है आम की खेती

अगर काजू की बात करें तो कोकण क्षेत्र में लगभग 1.75 लाख हेक्टेयर में इसकी खेती होती है, जिसमें से करीब 75 फीसदी हिस्सा रत्नागिरी और सिंधुदुर्ग में है. कोकण में हर साल लगभग 3 लाख मीट्रिक टन काजू का उत्पादन होता है. अतिरिक्त मुख्य सचिव विकास चंद्र रस्तोगी के अनुसार, सिंधुदुर्ग में आम की फसल का करीब 85 फीसदी से 90 फीसदी तक नुकसान हुआ है, जबकि रत्नागिरि में यह नुकसान 80 फीसदी से 90 फीसदी तक है. रायगढ़ में 70 फीसदी से 80 फीसदी, थाणें में करीब 60 फीसदी और पालघल में लगभग 45 फीसदी आम की फसल खराब हुई है. वहीं काजू की फसल में सिंधुदुर्ग में 60 फीसदी से 70 फीसदी और रत्नागिरी में करीब 50 फीसदी नुकसान हुआ है. बैठक में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने आश्वासन दिया कि वे इस मुद्दे पर उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे  और सुनेत्रा पवार सहित अन्य मंत्रियों से चर्चा करेंगे. इसके बाद राज्य सरकार बजट सत्र खत्म होने से पहले किसानों के लिए आर्थिक सहायता की घोषणा करेगी.

Published: 19 Mar, 2026 | 12:21 PM

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