प्याज पैदावार में 29 फीसदी गिरावट की आशंका, रकबा भी हुआ कम.. बारिश से फसल चौपट

कृषि विभाग के अनुसार उत्पादन पिछले साल के करीब 58.84 लाख टन से घटकर इस बार लगभग 41.63 लाख टन रह सकता है. अधिकारियों का कहना है कि बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से फसल को भारी नुकसान हुआ है, जिससे उत्पादन क्षमता भी कम हो गई. औसत पैदावार 25 टन प्रति हेक्टेयर से घटकर करीब 23 टन प्रति हेक्टेयर रह गई है.

नोएडा | Updated On: 19 Apr, 2026 | 10:47 AM

Onion Farming: महाराष्ट्र के नासिक जिले में इस बार ग्रीष्मकालीन प्याज की पैदावार करीब 29 फीसदी तक घटने की आशंका है. इसकी वजह खेती का रकबा कम होना और बेमौसम बारिश व ओलावृष्टि से फसलों को नुकसान पहुंचना है. राज्य कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 2024-25 सीजन में जहां 2.51 लाख हेक्टेयर में ग्रीष्मकालीन प्याज की खेती हुई थी, वहीं 2025-26 में यह घटकर 2.25 लाख हेक्टेयर रह गई है. इसके अलावा 19 मार्च से 2 अप्रैल के बीच हुई तेज बारिश और ओलावृष्टि से लगभग 44,000 हेक्टेयर में फसल खराब हो गई, जिससे उत्पादन पर बड़ा असर पड़ेगा.

कृषि विभाग के अनुसार उत्पादन पिछले साल के करीब 58.84 लाख टन से घटकर इस बार लगभग 41.63 लाख टन रह सकता है. अधिकारियों का कहना है कि बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से फसल को भारी नुकसान हुआ है, जिससे उत्पादन क्षमता  भी कम हो गई. औसत पैदावार 25 टन प्रति हेक्टेयर से घटकर करीब 23 टन प्रति हेक्टेयर रह गई है. महाराष्ट्र देश के सबसे बड़े प्याज निर्यातक राज्यों में शामिल है, जहां से करीब 65 फीसदी प्याज का निर्यात होता है. इसमें भी नासिक जिला अकेले राज्य के लगभग 90 फीसदी निर्यात में योगदान देता है.

पैदावार में भारी गिरावट का अनुमान

हॉर्टिकल्चर प्रोड्यूस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के वाइस-प्रेसिडेंट विकास सिंह ने ‘द टाइसम्स ऑफ इंडिया’ से कहा कि केंद्रीय कृषि मंत्रालय के अनुसार इस साल देश में गर्मियों की प्याज  की पैदावार में करीब 11 फीसदी की गिरावट का अनुमान है. पहले अग्रिम अनुमान के मुताबिक, देश में गर्मियों की प्याज का उत्पादन पिछले साल 377 लाख मीट्रिक टन था, जो इस साल घटकर लगभग 277 लाख मीट्रिक टन रह सकता है. मार्च और अप्रैल में तैयार होना वाला ग्रीष्मकालीन प्याज की मांग आमतौर पर मार्च से मई के बीच विदेशों में काफी रहती है. लेकिन इस साल भू-राजनीतिक तनाव, खासकर ईरान- अमेरिका/इजराइल संघर्ष से जुड़ी स्थितियों के कारण निर्यात पर असर पड़ा है. खाड़ी देशों और अन्य बाजारों में प्याज की शिपमेंट काफी कम हो गई है.

प्याज निर्यात हुआ महंगा

उन्होंने कहा कि इस दौरान मालभाड़ा भी बहुत बढ़ गया है, जो पहले एक कंटेनर के लिए लगभग 600 डॉलर था, वह अब बढ़कर करीब 7,500 डॉलर तक पहुंच गया है. एक कंटेनर में लगभग 30 मीट्रिक टन प्याज जाता है, जिससे कई व्यापारियों के लिए निर्यात करना अब आर्थिक रूप से घाटे का सौदा बन गया है. विकास सिंह के अनुसार उत्पादन में गिरावट के बावजूद देश में प्याज की कमी होने की संभावना नहीं है. उन्होंने कहा कि निर्यात में कमी आने से घरेलू बाजार में प्याज की पर्याप्त उपलब्धता बनी रहेगी.

खरीफ प्याज की शेल्फ लाइफ कम होती है

अधिकारियों ने कहा कि खरीफ और देर खरीफ प्याज (जुलाई से नवंबर में उगाई जाने वाली फसल) की शेल्फ लाइफ  कम होती है, इसलिए इसे किसानों को जल्दी बेच देना पड़ता है. वहीं, गर्मियों के प्याज, जिसकी बुवाई दिसंबर-जनवरी में होती है और कटाई मार्च-अप्रैल की जाती है, उसे 6-7 महीने तक स्टोर किया जा सकता है. किसान आमतौर पर अपनी आर्थिक जरूरत के अनुसार इस स्टॉक को APMC मंडियों में बेचते हैं. मई से अक्टूबर के बीच नई प्याज की फसल उपलब्ध नहीं होती, ऐसे में पुराना स्टॉक ही बाजार की मांग पूरी करता है, जब तक कि अक्टूबर के अंत में खरीफ की नई फसल आना शुरू नहीं हो जाती.

Published: 19 Apr, 2026 | 09:29 AM

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