आम की तुड़ाई के बाद करें ये 5 काम, अगले साल पेड़ों पर फिर लहलहाएंगे भरपूर फल

आम की तुड़ाई के बाद बागवानों को पेड़ों की देखभाल पर विशेष ध्यान देना चाहिए. सही समय पर कटाई-छंटाई, खाद प्रबंधन, सिंचाई और रोग नियंत्रण से अगले साल बेहतर फल उत्पादन मिल सकता है. विशेषज्ञों के अनुसार, इस समय की गई लापरवाही पेड़ों को कमजोर कर सकती है और पैदावार प्रभावित हो सकती है.

Saurabh Sharma
नोएडा | Published: 29 Jul, 2026 | 11:30 PM

Mango Farming: आम की फसल की तुड़ाई खत्म होते ही बागवानों की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है. यही समय तय करता है कि अगले सीजन में पेड़ों पर कितना बौर आएगा और फल उत्पादन कैसा रहेगा. अगर तुड़ाई के बाद पेड़ों की सही देखभाल नहीं की गई तो पोषण की कमी, कीटों का हमला और कम पैदावार जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं. NHRDF के संयुक्त निदेशक डॉ. रजनीश मिश्रा के अनुसार, इस समय कटाई-छंटाई, खाद प्रबंधन, जल निकासी और रोग नियंत्रण पर विशेष ध्यान देना बेहद जरूरी है.

तुड़ाई के बाद पेड़ों की करें सही कटाई-छंटाई

आम की फसल  लेने के बाद पेड़ों को नई ऊर्जा की जरूरत होती है. राष्ट्रीय बागवानी अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान (NHRDF) के संयुक्त निदेशक डॉ. रजनीश मिश्रा के अनुसार, तुड़ाई के तुरंत बाद आम के पेड़ों की वैज्ञानिक तरीके से कटाई-छंटाई करनी चाहिए. सूखी, रोगग्रस्त और आपस में उलझी हुई टहनियों को हटा देना चाहिए, ताकि पेड़ के अंदर तक धूप और हवा आसानी से पहुंच सके. उन्होंने बताया कि सही समय पर छंटाई करने से नई शाखाओं का विकास बेहतर होता है और अगले सीजन में फूल आने की संभावना बढ़ जाती है. कटाई के बाद टहनियों पर फफूंद संक्रमण रोकने के लिए बोर्डो पेस्ट या कॉपर आधारित दवाओं का उपयोग किया जा सकता है.

खाद और पोषण प्रबंधन से मजबूत होंगे पेड़

फसल देने के बाद आम के पेड़ों में पोषक तत्वों की कमी  हो जाती है. ऐसे में पेड़ों को संतुलित खाद और उर्वरक देना जरूरी होता है. विशेषज्ञों के अनुसार, प्रत्येक वयस्क पेड़ के आसपास गोबर की सड़ी हुई खाद डालें और जरूरत के अनुसार नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश का संतुलित प्रयोग करें. इसके अलावा जिंक और बोरॉन जैसे सूक्ष्म पोषक तत्वों का छिड़काव भी पेड़ों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मदद करता है. इससे फूलों का झड़ना कम होता है और अगले साल बेहतर फल उत्पादन की संभावना बढ़ती है.

जलभराव और खरपतवार से बचाएं बाग

बरसात के मौसम में आम के बागों  में पानी जमा होना पेड़ों के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है. ज्यादा नमी के कारण जड़ों में सड़न और बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है. इसलिए बाग में जल निकासी की बेहतर व्यवस्था रखना जरूरी है. पेड़ों के आसपास उगने वाले खरपतवारों को समय-समय पर हटाते रहें, क्योंकि ये मिट्टी से पोषक तत्व और नमी खींच लेते हैं. हल्की जुताई करने से मिट्टी भुरभुरी बनी रहती है और जड़ों को पर्याप्त हवा मिलती है.

कीट और रोग नियंत्रण पर दें विशेष ध्यान

तुड़ाई के बाद आम के बागों में कीट और फफूंद जनित रोगों  का खतरा बढ़ जाता है. इस दौरान पत्तियों, टहनियों और तने की नियमित निगरानी करनी चाहिए. गिरे हुए पत्तों और संक्रमित हिस्सों को हटाकर नष्ट कर देना चाहिए. विशेषज्ञों के अनुसार, लीफ वेबर, चेपा और एंथ्रेक्नोज जैसी समस्याओं से बचाव के लिए समय पर उचित दवाओं का छिड़काव जरूरी है. साथ ही तने पर चूना और कॉपर सल्फेट का लेप लगाने से कई कीटों से सुरक्षा मिलती है. अगर किसान तुड़ाई के बाद इन सभी उपायों को अपनाते हैं तो आम के पेड़ों की सेहत बेहतर बनी रहती है और अगले सीजन में अच्छी पैदावार मिलने की संभावना बढ़ जाती है.

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Published: 29 Jul, 2026 | 11:30 PM

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