मिलर्स ने फोर्टिफाइड राइस कर्नल्स की सीमित आपूर्ति को लेकर चिंता जताई, चावल की डिलीवरी में हो रही है देरी

मिलर्स को ब्लैकमेल होने का डर इसलिए है क्योंकि सीमित आपूर्तिकर्ता होने के कारण उनका मिलर्स पर असमान दबदबा बन जाता है. उन्हें समय पर CMR डिलीवरी करने का दबाव होता है, जिससे उन्हें FRK खरीदना पड़ता है और कुछ मिलर्स का शोषण होने का खतरा बढ़ जाता है.

नोएडा | Updated On: 21 Feb, 2026 | 01:57 PM

Haryana News: हरियाणा के चावल मिलर्स और डीलरों ने फोर्टिफाइड राइस कर्नल्स (FRK) की सीमित आपूर्ति को लेकर चिंता जताई है. इन FRK का मिश्रण अनिवार्य रूप से कस्टम-मिल्ड राइस (CMR) में करना होता है. राज्य में लगभग 1,400 CMR चावल मिलर्स की जरूरत पूरी करने के लिए केवल चार आपूर्तिकर्ताओं को ही अधिकृत किया गया है. FRK चावल के दानों को विशेष रूप से आयरन, फोलिक एसिड और विटामिन B12 जैसे माइक्रोन्यूट्रिएंट्स से समृद्ध किया जाता है और इसे चावल के आटे से तैयार किया जाता है. देश और राज्य में एनीमिया रोकने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने CMR में 1 फीसदी फोर्टिफाइड राइस डालने का निर्णय लिया है. CMR नीति के तहत, मिलर्स अपने आवंटित धान का 67 फीसदी चावल भारतीय खाद्य निगम (FCI) को सप्लाई करते हैं.

राज्य के चावल मिलर्स और डीलर नाराज हैं क्योंकि सरकार ने केवल चार FRK आपूर्तिकर्ताओं को ही लगभग 30,000 मीट्रिक टन फोर्टिफाइड राइस  राज्य के लगभग 1,400 CMR मिलर्स तक पहुंचाने के लिए अधिकृत किया है. कई मिलर्स को बहुत कम मात्रा मिली है, जो सही तरीके से CMR सप्लाई करने के लिए पर्याप्त नहीं है. मिलर्स का कहना है कि FRK की कमी के कारण वे CMR की डिलीवरी शुरू नहीं कर पा रहे हैं. इस कमी से चावल की डिलीवरी में देरी हो रही है, FRK की कीमतें बढ़ रही हैं और ब्लैक मार्केटिंग  का खतरा बढ़ रहा है, जिससे मिलर्स के लिए सरकारी नियमों का पालन मुश्किल हो गया है. कुछ मिलर्स ने पहले ही नमी वाला धान खरीदा है, जो देर होने पर खराब हो सकता है. हरियाणा राइस मिलर्स और डीलर्स एसोसिएशन का कहना है कि कई मिलर्स FRK न मिलने की वजह से CMR डिलीवरी का दबाव महसूस कर रहे हैं.

109 आपूर्तिकर्ताओं को अधिकृत किया गया है

द ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, मिलर्स को ब्लैकमेल होने का डर इसलिए है क्योंकि सीमित आपूर्तिकर्ता होने के कारण उनका मिलर्स पर असमान दबदबा बन जाता है. उन्हें समय पर CMR डिलीवरी करने का दबाव होता है, जिससे उन्हें FRK खरीदना पड़ता है और कुछ मिलर्स का शोषण होने का खतरा बढ़ जाता है. मिलर्स का कहना है कि इन आपूर्तिकर्ताओं के FRK का पूरा सैंपलिंग  भी नहीं हुआ है. पंजाब में FRK सप्लाई के लिए 109 आपूर्तिकर्ताओं को अधिकृत किया गया है. ज्यादा आपूर्तिकर्ता होने से वितरण सुचारू रहता है और FRK की कीमतें 40 से 49 रुपये प्रति किलोग्राम रहती हैं, जिससे डिलीवरी में देरी या ब्लैक मार्केटिंग का खतरा कम होता है. इसके विपरीत, हरियाणा में मिलर्स को FRK लगभग 57 रुपये प्रति किलोग्राम मिल रहा है, जो पंजाब से अधिक है.

टेंडर और आपूर्तिकर्ताओं की संख्या बढ़ाने की मांग की

मिलर्स ने इस समस्या को लेकर पहले ही कई कदम उठाए हैं. 10 फरवरी को हरियाणा राइस मिलर्स और डीलर्स एसोसिएशन  ने खाद्य, नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता मामलों के विभाग के महानिदेशक अंशज सिंह से मुलाकात की, जिन्होंने वादा किया कि 28 फरवरी तक 20 फीसदी FRK उपलब्ध होगा, लेकिन मिलर्स का कहना है कि अब तक पर्याप्त आपूर्ति नहीं हुई है. 19 फरवरी को उन्होंने करनाल में भी प्रदर्शन किया और शुक्रवार को करनाल जिला खाद्य आपूर्ति नियंत्रक से मुलाकात कर उचित FRK आपूर्ति की मांग की. साथ ही, उन्होंने सरकार से तुरंत हस्तक्षेप, FRK आपूर्ति का फिर से टेंडर और आपूर्तिकर्ताओं की संख्या बढ़ाने की मांग की. नए CMR शेड्यूल के अनुसार, मिलर्स को दिसंबर-अंत तक 15 फीसदी, जनवरी-अंत तक 25 फीसदी, फरवरी-अंत तक 20 फीसदी, मार्च-अंत तक 15 फीसदी, मई-अंत तक 15 फीसदी और जून-अंत तक शेष 10 फीसदी CMR डिलीवर करना है. मिलर्स का कहना है कि पर्याप्त FRK के बिना ये लक्ष्य पूरा करना असंभव है.

Published: 21 Feb, 2026 | 01:52 PM

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