मॉनसून का कहर.. कई इलाकों में भूस्खलन और पेड़ गिरे, फसल बुवाई के लिए किसानों को एडवाइजरी   

Maharashtra Kharif Crop Sowing : डॉ. बालासाहेब सावंत कोंकण कृषि विश्वविद्यालय की कृषि सलाह में कहा गया है कि राज्य के कुछ हिस्सों में मॉनसूनी बारिश कम हुई है. ऐसे इलाकों के किसान बुआई तब तक न करें जब तक कि इलाके में कम से कम 100 मिलीमीटर बारिश न हो जाए, ताकि पौधों के जीवित रहने की संभावना बनी रहे.

Kisan India
नोएडा | Published: 24 Jun, 2026 | 03:53 PM

महाराष्ट्र में मॉनसून की दस्तक के साथ जोरदार बारिश दर्ज की गई है. मुंबई के वाशिम समेत अन्य हिस्सों में कई जगह जलभराव से जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है. वहीं, ठाणे और पालघर में जोरदार बारिश दर्ज की गई. जबकि, मालशेज घाट पर भूस्खलन और पेड़ गिरे हैं. वहीं, महाराष्ट्र के रत्नागिरी जिले में स्थित डॉ. बालासाहेब सावंत कोंकण कृषि विश्वविद्यालय की ओर से जारी मौसम आधारित कृषि सलाह में किसानों को खरीफ फसलों की बुवाई के संबंध में गाइड किया है.

ठाणे और पालघर में जोरदार बारिश, बांधों का जलस्तर बढ़ा

महाराष्ट्र में पिछले 24 घंटों में तेज बारिश दर्ज की गई है. क्षेत्रीय आपदा प्रबंधन सेल (RDMC) ने कहा है कि ठाणे और पालघर जिलों में सबसे ज्यादा बारिश हुई, जिससे खूबसूरत मालशेज घाट पर भूस्खलन हुआ और पेड़ गिरने की कई शिकायतें मिलीं हैं. बुधवार सुबह 8.30 बजे तक पिछले 24 घंटों में ठाणे शहर में 77.97 मिमी बारिश दर्ज की गई, जिससे इस मौसम की कुल बारिश 81.26 मिमी हो गई.

इस इलाके के लिए पानी का मुख्य स्रोत शाहपुर तालुका का भातसा बांध में पिछले 24 घंटों में 20 मिमी बारिश दर्ज की गई. बांध का जल स्तर अभी 108.79 मीटर है और उपयोगी जल भंडारण इसकी कुल क्षमता का 29.22 प्रतिशत है. अधिकारियों ने बताया कि बांध से अभी तक कोई पानी नहीं छोड़ा गया है.

भूस्खलन और पेड़ गिरने की शिकायतें

ठाणे के रेजिडेंट डिप्टी कलेक्टर संदीप माने ने बताया कि मंगलवार शाम को ठाणे और पुणे जिलों को जोड़ने वाले अहम मालशेज घाट इलाके में हल्का भूस्खलन हुआ. क्षेत्रीय आपदा प्रबंधन सेल (RDMC) के के अनुसार पिछले 24 घंटों में ठाणे में 27 शिकायतें मिलीं, जिनमें पेड़ या टहनियां गिरने की 18 और आग से जुड़ी चार कॉल शामिल हैं. बुधवार सुबह ठाणे शहर के चराई इलाके में सड़क किनारे खड़ी दो कारों पर एक बड़ा पेड़ गिर गया, जिससे दोनों गाड़ियां क्षतिग्रस्त हो गईं.

बारिश वाले इलाकों में जुताई के 4 दिन बाद बुवाई करें किसान

महाराष्ट्र के रत्नागिरी जिले में स्थित डॉ. बालासाहेब सावंत कोंकण कृषि विश्वविद्यालय की ओर से जारी मौसम आधारित कृषि सलाह में किसानों को 2 दिन बाद खेत का पानी सूखने पर जुताई करने की सलाह दी गई है. खेत को जोतकर 4 दिन डालने के बाद खरीफ फसलों की बुवाई शुरू कर सकते हैं. हालांकि, जिन हिस्सों में सिंचाई की सुविधाएं बेहतर नहीं हैं, वहां के किसानों को बुवाई में जल्दी नहीं दिखाने की सलाह दी गई है.

100 मिमी बारिश होने का इंतजार करें किसान

राज्य के कुछ हिस्सों में मॉनसूनी बारिश नहीं हुई है. ऐसे इलाकों के किसानों को से अपील की गई है कि वे बुआई तब तक न करें जब तक कि इलाके में कम से कम 100 मिलीमीटर बारिश न हो जाए, ताकि पौधों के जीवित रहने की संभावना बनी रहे. उन्होंने कहा कि अल नीनो के असर के चलते मॉनसूनी बारिशें शुरू नहीं हुई हैं. इसके चलते बीज को अंकुरित होने के लिए जरूरी नमी नहीं मिलेगी और बीज मर जाएगा.

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