किसान ध्यान दें! मूंग बोने से पहले बीजों पर डालें ये चीज, फसल में नहीं लगेगी बीमारी, पैदावार भी होगी दोगुनी!
Tips For Farmers: मूंग की बुवाई से पहले बीज उपचार करना फसल को फंगस, कीट और मिट्टी से होने वाले रोगों से बचाने का सस्ता और असरदार तरीका है. विशेषज्ञों के अनुसार ट्राइकोडर्मा, ब्यूवेरिया बासियाना और स्यूडोमोनास जैसे जैविक तत्वों से बीज शोधन करने पर अंकुरण बेहतर होता है और उत्पादन में 15-20 फीसदी तक बढ़ोतरी हो सकती है.
Moong Ki Kheti: खेती में अच्छी पैदावार पाने के लिए केवल अच्छे बीज चुनना ही काफी नहीं होता, बल्कि उनकी सही तैयारी भी बेहद जरूरी होती है. खासकर मूंग जैसी दलहनी फसलों में बुवाई से पहले बीज उपचार यानी बीज शोधन करना किसानों के लिए काफी फायदेमंद माना जाता है. कृषि वैज्ञानिक डॉ. प्रमोद कुमार के अनुसार बीज उपचार एक ऐसा आसान और सस्ता तरीका है, जिससे फसल को शुरुआती बीमारियों, फंगस और मिट्टी में मौजूद हानिकारक कीटों से बचाया जा सकता है.
इन दिनों मूंग की बुवाई का मौसम चल रहा है. ऐसे में यदि किसान बिना उपचार किए बीजों की बुवाई करते हैं, तो अंकुरण के समय ही पौधों में बीमारी लगने का खतरा बढ़ जाता है. वहीं सही तरीके से शोधन करने पर फसल सुरक्षित रहती है और उत्पादन में 15 से 20 प्रतिशत तक बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है.
क्यों जरूरी है बीज उपचार?
कई बार बीजों पर फंगस और बैक्टीरिया के सूक्ष्म कण पहले से मौजूद रहते हैं. जैसे ही बीज मिट्टी में नमी के संपर्क में आते हैं, ये सक्रिय होकर छोटे पौधों को नुकसान पहुंचाने लगते हैं. इसके कारण जड़ सड़न, उकठा और अन्य रोग तेजी से फैल सकते हैं. बीज उपचार इन समस्याओं से बचाने का सबसे प्रभावी तरीका माना जाता है. इससे पौधों की शुरुआती वृद्धि बेहतर होती है और फसल स्वस्थ रहती है.
जैविक उपचार क्यों है बेहतर विकल्प?
रासायनिक दवाओं की तुलना में जैविक बीज उपचार ज्यादा सुरक्षित और फायदेमंद होता है. ट्राइकोडर्मा, ब्यूवेरिया बासियाना और स्यूडोमोनास जैसे जैविक तत्व फसल को रोगों से बचाने में मदद करते हैं. इन जैविक उत्पादों की खास बात यह है कि ये मिट्टी की उर्वरता को नुकसान नहीं पहुंचाते और पर्यावरण के लिए भी सुरक्षित रहते हैं. साथ ही इनकी कीमत भी काफी कम होती है. सरकारी कृषि केंद्रों पर ये उत्पाद करीब 25 रुपये प्रति किलो तक उपलब्ध हो जाते हैं, जिससे किसानों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ नहीं पड़ता.
बीज उपचार से क्या होंगे फायदे?
बीज उपचार करने से कई बड़े फायदे मिलते हैं:
- बीजों का अंकुरण बेहतर होता है
- पौधों में रोग लगने का खतरा कम हो जाता है
- फसल की शुरुआती बढ़वार तेज होती है
- उत्पादन में 15-20 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हो सकती है
- मिट्टी की गुणवत्ता बनी रहती है
- रासायनिक कीटनाशकों की जरूरत कम पड़ती है
इसके अलावा जैविक उपचार से तैयार फसल और उसके अवशेष पशुओं के चारे के लिए भी सुरक्षित माने जाते हैं.
बीज शोधन करने का आसान तरीका
किसान घर पर भी आसानी से बीज उपचार कर सकते हैं. इसके लिए ज्यादा खर्च या कठिन प्रक्रिया की जरूरत नहीं होती.
ऐसे करें बीज उपचार
- सबसे पहले 1 किलो मूंग के बीज लें
- इसमें 5 ग्राम ट्राइकोडर्मा मिलाएं
- फिर 5 ग्राम ब्यूवेरिया बासियाना और 5 ग्राम स्यूडोमोनास मिलाएं
- हल्का पानी छिड़कें ताकि मिश्रण बीजों पर अच्छी तरह चिपक जाए
- उपचार के बाद बीजों को छाया में सुखाएं
- सूखने के बाद तुरंत बुवाई करें
अगर किसान रासायनिक तरीका अपनाना चाहें, तो कार्बेंडाजिम का इस्तेमाल भी कर सकते हैं. हालांकि विशेषज्ञ जैविक उपचार को ज्यादा सुरक्षित मानते हैं.
धूप में सुखाने से बचें
बीज उपचार के बाद सबसे जरूरी बात यह है कि बीजों को कभी भी तेज धूप में न सुखाएं. सीधी धूप जैविक तत्वों की प्रभावशीलता को कम कर सकती है. इसलिए हमेशा छाया में ही बीज सुखाने चाहिए.
मूंग की खेती में बीज उपचार एक छोटा लेकिन बेहद महत्वपूर्ण कदम है. कम खर्च में किया गया यह उपाय फसल को रोगों से बचाकर उत्पादन बढ़ाने में मदद करता है. अगर किसान बुवाई से पहले सही तरीके से बीज शोधन करें, तो उन्हें बेहतर अंकुरण, स्वस्थ पौधे और अधिक पैदावार का लाभ मिल सकता है.