पहले थोड़ी मेहनत, फिर लागत कम और कमाई ज्यादा! वैज्ञानिक ने बताया प्राकृतिक खेती का पूरा फॉर्मूला

खेती की बढ़ती लागत से परेशान हैं तो प्राकृतिक खेती आपके लिए राहत का रास्ता बन सकती है. वैज्ञानिक ने बताया कि किसान पहले सिर्फ एक-चौथाई जमीन पर यह तरीका अपनाएं. गोबर खाद, प्राकृतिक मल्चिंग और जैविक घोलों से खाद-कीटनाशक का खर्च घटाकर मुनाफा बढ़ाया जा सकता है.

Saurabh Sharma
नोएडा | Published: 15 Sep, 2026 | 05:42 PM

Natural Farming: खेती में लगातार बढ़ती लागत किसानों के लिए बड़ी चिंता बनती जा रही है. रासायनिक खाद और कीटनाशकों के ज्यादा इस्तेमाल से जहां उत्पादन लागत बढ़ रही है, वहीं मिट्टी की सेहत पर भी असर पड़ रहा है. ऐसे में प्राकृतिक खेती किसानों के लिए लागत घटाकर मुनाफा बढ़ाने का एक बेहतर विकल्प बन सकती है. कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि किसान एक साथ पूरी जमीन पर बदलाव करने के बजाय धीरे-धीरे प्राकृतिक खेती की शुरुआत कर सकते हैं.

पहले साल खेत के एक चौथाई हिस्से से करें शुरुआत

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय (JNKVV), जबलपुर के संचालक प्रभारी विस्तार योजनाओं के प्रभारी डॉ. टीआर शर्मा के मुताबिक, किसान प्राकृतिक खेती  की शुरुआत अपनी कुल जमीन के करीब एक चौथाई हिस्से से कर सकते हैं. इससे किसानों को बिना ज्यादा जोखिम के इस तरीके को समझने और अपनाने का मौका मिलेगा. प्राकृतिक खेती में मिट्टी की सेहत सुधारने पर जोर दिया जाता है. जैविक पदार्थों के इस्तेमाल से मिट्टी में कार्बन की मात्रा बढ़ती है. इससे मिट्टी में मौजूद सूक्ष्म जीव सक्रिय रहते हैं और पौधों को जरूरी पोषक तत्व मिलने में मदद मिलती है.

शुरुआत में उत्पादन थोड़ा कम, लेकिन गुणवत्ता बेहतर

प्राकृतिक खेती अपनाने के शुरुआती दौर में किसानों को उत्पादन में कुछ कमी  देखने को मिल सकती है. हालांकि, वैज्ञानिकों के मुताबिक इस दौरान मिलने वाली उपज की गुणवत्ता बेहतर हो सकती है. जैसे-जैसे मिट्टी की सेहत सुधरती है और किसान प्राकृतिक तरीके को लगातार अपनाते हैं, खेती की लागत धीरे-धीरे कम होने लगती है. इसका सबसे बड़ा फायदा खाद और कीटनाशकों के खर्च में कमी के रूप में मिलता है. लागत घटने के साथ किसानों का मुनाफा बढ़ सकता है. साथ ही लोगों को पोषक तत्वों से भरपूर अनाज और सब्जियां मिलने की संभावना भी बढ़ती है.

एक एकड़ में गोबर की सड़ी खाद का करें इस्तेमाल

प्राकृतिक खेती की शुरुआत करने के लिए किसान एक एकड़ खेत में अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद का इस्तेमाल  कर सकते हैं. इससे मिट्टी में जैविक पदार्थ बढ़ता है और फसल को जरूरी पोषण देने में मदद मिलती है. इस तरीके को अपनाने से यूरिया और डीएपी जैसी रासायनिक खाद पर निर्भरता कम की जा सकती है. इससे किसानों की खेती की लागत भी घट सकती है. हालांकि, खाद की मात्रा और इस्तेमाल का तरीका फसल और मिट्टी की स्थिति के अनुसार तय करना बेहतर रहता है.

प्राकृतिक मल्चिंग और जैविक घोल से घटेगा खर्च

सब्जियों की खेती  करने वाले किसान प्राकृतिक मल्चिंग का इस्तेमाल कर सकते हैं. इसके लिए धान या गेहूं के डंठल और खेत में उपलब्ध दूसरे जैविक अवशेषों का उपयोग किया जा सकता है. प्राकृतिक मल्चिंग मिट्टी में नमी को लंबे समय तक बनाए रखने में मदद करती है. बाद में यही जैविक सामग्री सड़कर मिट्टी में मिल जाती है और कार्बन तथा जैविक खाद का काम करती है.

फसलों को कीटों से बचाने के लिए किसान जीवामृत, घनजीवामृत, ब्रह्मास्त्र और नीमास्त्र जैसे जैविक घोलों का इस्तेमाल कर सकते हैं. इन्हें फसल की जरूरत के अनुसार अलग-अलग समय पर प्रयोग किया जाता है. इससे रासायनिक कीटनाशकों पर होने वाला खर्च कम किया जा सकता है. हालांकि, प्राकृतिक खेती में शुरुआत में मेहनत कुछ ज्यादा करनी पड़ सकती है, लेकिन लंबे समय में मिट्टी की सेहत, लागत और मुनाफे के लिहाज से यह तरीका किसानों के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है.

 

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Published: 15 Sep, 2026 | 05:42 PM

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