दलहन की खेती ने पकड़ी रफ्तार! 1.67 लाख हेक्टेयर में ज्यादा बुवाई, इन राज्यों में बढ़ा रकबा

Kharif Pulses: 11 सितंबर 2026 तक देश में खरीफ दलहन की बुवाई 118.46 लाख हेक्टेयर पहुंच गई है, जो पिछले साल की समान अवधि से 1.67 लाख हेक्टेयर ज्यादा है. उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा 3.97 लाख हेक्टेयर, झारखंड में 0.98 लाख और तेलंगाना में 0.87 लाख हेक्टेयर की बढ़ोतरी हुई है.

Isha Gupta
नोएडा | Published: 15 Sep, 2026 | 04:53 PM

Kharif Pulses Sowing 2026: खरीफ सीजन में दलहन की खेती को लेकर इस बार अच्छी खबर सामने आई है. 11 सितंबर 2026 तक देश में दलहन की बुवाई 118.46 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है. यह पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 1.67 लाख हेक्टेयर ज्यादा है. कम बारिश और मौसम में उतार-चढ़ाव के बावजूद दलहन की खेती का रकबा बढ़ना अहम माना जा रहा है. दलहन किसानों के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि ये फसलें कम पानी वाले इलाकों में भी उगाई जा सकती हैं और मिट्टी की सेहत के लिए भी फायदेमंद मानी जाती हैं. ऐसे में दलहन की बढ़ती खेती खेती-किसानी के साथ देश की दालों की जरूरत को पूरा करने में भी मदद कर सकती है.

118.46 लाख हेक्टेयर में हुई दलहन की बुवाई

कृषि से जुड़े आंकड़ों के मुताबिक 11 सितंबर तक देशभर में दलहन का कुल रकबा 118.46 लाख हेक्टेयर पहुंच गया है. पिछले साल इसी समय तक जितने क्षेत्र में दलहन बोई गई थी, उसकी तुलना में इस बार 1.67 लाख हेक्टेयर की बढ़ोतरी हुई है. दलहन की खेती बढ़ने का एक बड़ा फायदा यह है कि इससे किसानों के पास फसलों के विकल्प बढ़ते हैं. खासकर ऐसे समय में जब कुछ इलाकों में बारिश सामान्य से कम रही है, दलहन का रकबा बढ़ना किसानों के लिए राहत की बात है.

उत्तर प्रदेश सबसे आगे

दलहन की बुवाई बढ़ाने वाले राज्यों में उत्तर प्रदेश सबसे ऊपर है. प्रदेश में 3.97 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में दलहन की खेती बढ़ी है. इसके बाद झारखंड का नंबर है, जहां 0.98 लाख हेक्टेयर की बढ़ोतरी दर्ज की गई. तेलंगाना में भी दलहन की खेती के रकबे में 0.87 लाख हेक्टेयर का इजाफा हुआ है. इन राज्यों में बढ़ता रकबा बताता है कि किसान खरीफ सीजन में दलहन की फसलों को लेकर पहले से ज्यादा रुचि दिखा रहे हैं.

कम बारिश के बीच बढ़ा फसल विविधीकरण

इस साल कई इलाकों में मॉनसून की बारिश सामान्य से कम रही है. ऐसे में फसल विविधीकरण का महत्व और बढ़ जाता है. एक ही फसल पर निर्भर रहने के बजाय किसान अलग-अलग फसलों की खेती करके मौसम के जोखिम को कुछ हद तक कम कर सकते हैं. दलहन की कई फसलें अपेक्षाकृत कम पानी में भी उगाई जा सकती हैं. यही वजह है कि कम बारिश वाले क्षेत्रों में किसान इन्हें एक बेहतर विकल्प के तौर पर देख रहे हैं. इससे खेतों में फसल का संतुलन भी बना रहता है और किसी एक फसल के खराब होने पर पूरा नुकसान नहीं उठाना पड़ता.

दालों की उपलब्धता के लिए भी अहम बढ़ोतरी

देश में दालों की मांग लगातार बनी रहती है. ऐसे में घरेलू स्तर पर दलहन की खेती बढ़ने से दालों की उपलब्धता मजबूत हो सकती है. इससे आने वाले समय में घरेलू जरूरतों को पूरा करने में मदद मिल सकती है. दलहन की खेती मिट्टी के लिए भी उपयोगी मानी जाती है.

किसानों के लिए क्या है इसका मतलब?

दलहन के रकबे में बढ़ोतरी किसानों के लिए एक सकारात्मक संकेत है. खासकर उत्तर प्रदेश, झारखंड और तेलंगाना जैसे राज्यों में खेती बढ़ने से ग्रामीण इलाकों में फसल के विकल्प मजबूत हुए हैं. हालांकि, सिर्फ बुवाई का रकबा बढ़ना ही पर्याप्त नहीं है. आगे फसल को मौसम, कीट और बीमारी से कितना नुकसान होता है, साथ ही पैदावार कैसी रहती है, यह भी अहम होगा. फिलहाल 118.46 लाख हेक्टेयर तक पहुंचा दलहन का रकबा खरीफ सीजन में फसल विविधीकरण और देश में दालों की उपलब्धता बढ़ाने की दिशा में एक मजबूत कदम माना जा सकता है.

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