Sugar Import: देश में चीनी की कीमतों पर नियंत्रण रखने के लिए सरकार ने कच्ची चीनी के शुल्क मुक्त आयात को मंजूरी दी थी. अब इसी योजना के तहत चीनी मिलों और प्रोसेसिंग इकाइयों को मिले 10 लाख टन के आयात कोटे के बचे हिस्से को वापस करने की समयसीमा बढ़ा दी गई है. कोटा पाने वाली इकाइयां अब 30 सितंबर तक अपने इस्तेमाल में न लाए गए कोटे को सरेंडर कर सकती हैं. सरकार के इस फैसले से उन मिलों और कारोबारियों को राहत मिलेगी, जो आवंटित मात्रा में से पूरा कोटा इस्तेमाल नहीं कर पाए हैं.
30 सितंबर तक वापस कर सकेंगे बचा हुआ कोटा
सरकार ने साफ किया है कि शुल्क मुक्त आयात के लिए आवंटित कोटे की जो मात्रा अभी इस्तेमाल नहीं हुई है, उसे 30 सितंबर तक वापस किया जा सकता है. यानी जिन चीनी मिलों या प्रोसेसिंग इकाइयों को कोटा मिला था, लेकिन उन्होंने पूरी मात्रा का आयात नहीं किया है, वे बचा हुआ हिस्सा तय समय के भीतर सरेंडर कर सकेंगी. हालांकि, इसके लिए एक शर्त भी रखी गई है. कोटा लौटाने वाली इकाई को सरेंडर की गई मात्रा के सीआईएफ मूल्य का 0.5 फीसदी शुल्क देना होगा. सीआईएफ कीमत में सामान की लागत के साथ बीमा और माल ढुलाई का खर्च भी शामिल होता है.
बाकी नियमों में नहीं किया गया बदलाव
विभाग की ओर से कहा गया है कि 20 अगस्त को जारी किए गए मूल नोटिस की बाकी सभी शर्तें पहले की तरह लागू रहेंगी. यानी कोटे को सरेंडर करने की समयसीमा में ही बदलाव किया गया है, बाकी नियमों में कोई नया बदलाव नहीं किया गया है. इससे उन इकाइयों को एक और मौका मिल गया है, जो किसी वजह से तय समय के भीतर अपने हिस्से का आयात नहीं कर सकी थीं.
चीनी के दाम काबू में रखने के लिए लिया गया था फैसला
दरअसल, घरेलू बाजार में चीनी की कीमतों में तेजी को देखते हुए सरकार ने 20 अगस्त को 10 लाख टन कच्ची चीनी के बिना शुल्क आयात की अनुमति दी थी. इसका मकसद बाजार में चीनी की उपलब्धता बढ़ाना और बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करना था. सरकार की इस पहल के बाद खुदरा बाजार में कीमतों में कुछ नरमी देखने को मिली है. हालांकि, अलग-अलग शहरों और बाजारों में दाम थोड़े अलग हो सकते हैं, लेकिन कुल मिलाकर कीमतों पर दबाव पहले की तुलना में कुछ कम हुआ है.
लगातार चौथे दिन 60 रुपये से नीचे रही औसत कीमत
सोमवार को देश में चीनी की औसत खुदरा कीमत 59.57 रुपये प्रति किलो दर्ज की गई. यह लगातार चौथा दिन है, जब औसत खुदरा भाव 60 रुपये प्रति किलो से नीचे रहा है. हालांकि एक दिन पहले रविवार को औसत कीमत 58.99 रुपये प्रति किलो थी. यानी सोमवार को भाव में मामूली बढ़ोतरी हुई, लेकिन फिर भी यह 60 रुपये की सीमा के नीचे बनी रही.
आगे बाजार पर सरकार की नजर
चीनी की कीमतों को लेकर सरकार लगातार बाजार की स्थिति पर नजर बनाए हुए है. शुल्क मुक्त आयात से घरेलू बाजार में अतिरिक्त चीनी पहुंचने की उम्मीद है, जिससे उपलब्धता बेहतर रह सकती है. अब कोटा सरेंडर करने की समयसीमा बढ़ाए जाने के बाद यह देखना होगा कि कितनी अप्रयुक्त मात्रा वापस की जाती है और आने वाले दिनों में इससे आयात, घरेलू स्टॉक और बाजार भाव पर क्या असर पड़ता है. फिलहाल सरकार की कोशिश यही है कि त्योहारों और बढ़ी मांग के दौर में बाजार में चीनी की पर्याप्त उपलब्धता बनी रहे और आम लोगों पर बढ़ती कीमतों का बोझ न पड़े.