पूर्वोत्तर के लिए बड़ी सौगात, 1.8 लाख हेक्टेयर में लगी नई रबर खेती, 2 लाख किसानों को मिलेगा फायदा
Project INROAD India: पूर्वोत्तर भारत में प्रोजेक्ट INROAD के तहत पिछले पांच वर्षों में करीब 1.80 लाख हेक्टेयर में नई प्राकृतिक रबर की खेती शुरू की गई है, जो 2 लाख हेक्टेयर के लक्ष्य के करीब पहुंच चुकी है. इस पहल से 2 लाख से अधिक छोटे और सीमांत किसानों को लाभ मिला है.
Rubber Plantation: देश में प्राकृतिक रबर (नेचुरल रबर) की खेती बढ़ाने के लिए चलाया जा रहा प्रोजेक्ट INROAD तेजी से सफल हो रहा है. इस योजना के तहत पिछले पांच साल में पूर्वोत्तर भारत के राज्यों में करीब 1.80 लाख हेक्टेयर जमीन पर नई रबर की खेती शुरू की जा चुकी है. सरकार और रबर उद्योग मिलकर इस योजना पर काम कर रहे हैं. इसका लक्ष्य 2 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में नई रबर की खेती शुरू करना है, जिसे जल्द पूरा करने की तैयारी है. इस योजना का मकसद सिर्फ रबर का उत्पादन बढ़ाना नहीं है, बल्कि छोटे किसानों की कमाई बढ़ाना, उन्हें रोजगार के नए मौके देना और पूर्वोत्तर के ग्रामीण इलाकों की अर्थव्यवस्था को मजबूत करना भी है.
क्या है प्रोजेक्ट INROAD?
प्रोजेक्ट INROAD (Indian Natural Rubber Operations for Assisted Development) की शुरुआत वित्त वर्ष 2021-22 में की गई थी. यह दुनिया की अपनी तरह की पहली पहल मानी जाती है, जिसमें देश की प्रमुख टायर कंपनियां सीधे रबर की खेती को बढ़ावा देने के लिए निवेश कर रही हैं. इस परियोजना को रबर बोर्ड लागू कर रहा है, जबकि इसके लिए Apollo Tyres, CEAT, JK Tyre और MRF जैसी बड़ी टायर कंपनियां आर्थिक सहयोग दे रही हैं.
113 जिलों में बढ़ी रबर की खेती
पिछले पांच साल में इस योजना के तहत पूर्वोत्तर भारत के 113 जिलों में करीब 1.79 लाख हेक्टेयर जमीन पर नई रबर की खेती शुरू की गई है. इतने कम समय में इतने बड़े क्षेत्र में रबर की खेती बढ़ाने का यह देश का सबसे बड़ा अभियान माना जा रहा है. परियोजना से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि 2 लाख हेक्टेयर में रबर की खेती शुरू करने का लक्ष्य भी जल्द पूरा कर लिया जाएगा. इससे आने वाले समय में रबर उत्पादन बढ़ने के साथ-साथ किसानों की कमाई में भी इजाफा होने की उम्मीद है.
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2 लाख से ज्यादा किसानों को मिला फायदा
इस योजना का सबसे ज्यादा फायदा छोटे और सीमांत किसानों को मिला है. खास तौर पर उन किसानों को प्राथमिकता दी गई, जिनके पास एक हेक्टेयर से भी कम जमीन है, ताकि वे भी रबर की खेती से अच्छी कमाई कर सकें. अब तक 2 लाख से ज्यादा किसान इस योजना से जुड़ चुके हैं. इससे किसानों की आमदनी बढ़ने में मदद मिली है. साथ ही गांवों में रोजगार और दूसरे आर्थिक काम भी बढ़े हैं, जिससे ग्रामीण इलाकों की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है.
नर्सरी और बेहतर पौधों पर दिया गया जोर
इस योजना के तहत सिर्फ नई रबर की खेती शुरू नहीं कराई गई, बल्कि किसानों को अच्छी क्वालिटी के रबर के पौधे भी दिए गए. अब तक किसानों के बीच 8.3 करोड़ से ज्यादा रबर के पौधे बांटे जा चुके हैं. इसके अलावा पूरे पूर्वोत्तर क्षेत्र में 200 से ज्यादा आधुनिक नर्सरी तैयार की गई हैं. यहां ऐसे रबर के पौधे तैयार किए जा रहे हैं, जो स्थानीय मौसम के हिसाब से बेहतर बढ़ते हैं और ज्यादा उत्पादन देते हैं. इससे किसानों को अच्छी पैदावार मिलने की उम्मीद बढ़ी है.
अब किसानों को मिलेगा प्रशिक्षण
रबर की पैदावार बढ़ाने और उसकी क्वालिटी बेहतर करने के लिए इस योजना का अगला चरण भी शुरू हो गया है. इसके तहत iSPEED (INROAD Skilling and Production Efficiency Enhancement Drive) नाम का नया कार्यक्रम चलाया जा रहा है. इस कार्यक्रम के जरिए किसानों को आधुनिक स्मोक हाउस, रबर की बेहतर प्रोसेसिंग की सुविधाएं और नई तकनीकों की जानकारी दी जाएगी. इसके अलावा ऑनलाइन और सीधे प्रशिक्षण के माध्यम से किसानों को रबर की खेती और उत्पादन के नए तरीके सिखाए जाएंगे, ताकि वे कम खर्च में बेहतर और ज्यादा उत्पादन हासिल कर सकें.
किसानों की आय बढ़ाने पर रहेगा फोकस
विशेषज्ञों का कहना है कि नई तकनीक, अच्छी क्वालिटी के पौधों और सही प्रशिक्षण की मदद से रबर की खेती पहले से बेहतर होगी. इससे रबर की क्वालिटी सुधरेगी और किसानों को अपनी उपज का अच्छा दाम मिलने की संभावना भी बढ़ेगी. आने वाले समय में यह योजना पूर्वोत्तर भारत में रबर उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ लाखों किसानों की कमाई बढ़ाने और ग्रामीण इलाकों की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में भी अहम भूमिका निभा सकती है.