गाय नहीं, भेड़-बकरी की खाद से बढ़ेगी पैदावार, बंजर जमीन भी बनेगी उपजाऊ
खेती में अच्छी पैदावार के लिए सही खाद बेहद जरूरी होती है. भेड़ और बकरी के मल से बनी जैविक खाद पोषक तत्वों से भरपूर मानी जाती है. यह मिट्टी की उर्वरता बढ़ाकर फसल को बेहतर बढ़ने में मदद करती है. हालांकि इसकी उपलब्धता कम होने के कारण किसान इसका सीमित उपयोग कर पाते हैं.
Organic Fertilizer: खेती में अच्छी पैदावार के लिए सही खाद का चुनाव बेहद जरूरी होता है. आमतौर पर किसान गाय या भैंस के गोबर से बनी खाद का ही इस्तेमाल करते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि एक ऐसी जैविक खाद भी है, जो जमीन की ताकत कई गुना बढ़ा सकती है? यह खाद भेड़ और बकरी के मल से तैयार होती है और पोषक तत्वों के मामले में बेहद समृद्ध मानी जाती है.
भेड़ और बकरी की खाद क्यों मानी जाती है खास
जब भी जैविक खाद की बात होती है तो सबसे पहले गाय के गोबर का नाम आता है. यह परंपरागत और भरोसेमंद खाद मानी जाती है. लेकिन कृषि विशेषज्ञों के अनुसार भेड़ और बकरी के मल से बनी खाद उर्वरता के मामले में ज्यादा प्रभावी होती है. इस खाद में नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटेशियम जैसे जरूरी पोषक तत्व अच्छी मात्रा में पाए जाते हैं. यही तत्व फसल की बढ़वार, जड़ों की मजबूती और पौधों के अच्छे विकास के लिए जरूरी होते हैं. खास बात ये है कि यह खाद मिट्टी की जलधारण क्षमता भी बढ़ाती है, जिससे जमीन लंबे समय तक उपजाऊ बनी रहती है.
पोषक तत्वों का भंडार है यह जैविक खाद
अगर पोषक तत्वों की तुलना करें तो गाय के गोबर में नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटेशियम संतुलित मात्रा में होते हैं, जो मिट्टी की सेहत सुधारने में मदद करते हैं. भैंस के गोबर में ये तत्व थोड़े कम माने जाते हैं. वहीं भेड़ की खाद में करीब 3 प्रतिशत तक नाइट्रोजन, 1 प्रतिशत फास्फोरस और 2 प्रतिशत पोटेशियम पाया जाता है. यही कारण है कि इसे ज्यादा ताकतवर जैविक खाद माना जाता है. यह खाद फसलों को तेजी से बढ़ने में मदद करती है और उत्पादन बढ़ाने में भी सहायक होती है. जो किसान जैविक खेती करना चाहते हैं, उनके लिए यह खाद काफी फायदेमंद साबित हो सकती है.
फिर क्यों कम इस्तेमाल होती है यह खाद?
अब सवाल यह उठता है कि जब यह खाद इतनी फायदेमंद है, तो किसान इसका ज्यादा उपयोग क्यों नहीं करते? इसका सबसे बड़ा कारण इसकी उपलब्धता है. गाय और भैंस का गोबर आसानी से और बड़ी मात्रा में मिल जाता है, लेकिन भेड़ और बकरी का मल सीमित मात्रा में ही उपलब्ध होता है. इसे इकट्ठा करना और खाद के रूप में तैयार करना थोड़ा मुश्किल होता है. इसी वजह से किसान इसका बड़े स्तर पर उपयोग नहीं कर पाते. हालांकि जहां यह खाद उपलब्ध होती है, वहां किसान इसका इस्तेमाल सब्जियों, अनाज और बागवानी फसलों में कर बेहतर परिणाम पा रहे हैं.
मिट्टी को बनाती है ज्यादा उपजाऊ
भेड़ और बकरी की खाद न सिर्फ पौधों को पोषण देती है, बल्कि मिट्टी की संरचना भी सुधारती है. यह जमीन को भुरभुरी बनाती है और पानी को ज्यादा समय तक रोकने में मदद करती है. इससे सूखे की स्थिति में भी फसल को सहारा मिलता है. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर किसान जैविक खादों का संतुलित उपयोग करें, तो रासायनिक खाद पर निर्भरता कम हो सकती है. इससे खेती की लागत भी घटेगी और जमीन की सेहत भी लंबे समय तक बनी रहेगी. कुल मिलाकर, भेड़ और बकरी के मल से बनी खाद खेती के लिए एक छुपा हुआ खजाना है, जिसे सही जानकारी और सही तरीके से अपनाकर किसान अपनी पैदावार और मुनाफा दोनों बढ़ा सकते हैं.