धान की पौध उखाड़ने से पहले करें ये 1 जरूरी काम, वरना 24 घंटे में शुरू हो सकता है बड़ा नुकसान
धान की रोपाई के समय की गई एक छोटी गलती पूरी फसल पर भारी पड़ सकती है. कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को पौध उखाड़ने, रोपाई और शुरुआती देखभाल को लेकर जरूरी सलाह दी है. सही तरीका अपनाने से पौधे जल्दी जमते हैं, नुकसान कम होता है और अच्छी पैदावार मिलने की संभावना बढ़ जाती है.
Rice Transplanting: खरीफ सीजन में धान की रोपाई का समय किसानों के लिए सबसे महत्वपूर्ण चरण होता है. इस दौरान की गई छोटी-सी लापरवाही भी पूरी फसल की बढ़वार और उत्पादन को प्रभावित कर सकती है. कृषि विशेषज्ञ प्रमोद कुमार के अनुसार, नर्सरी से पौध उखाड़ने से पहले सही तैयारी करना और वैज्ञानिक तरीके से रोपाई करना बेहद जरूरी है. यदि पौधों की जड़ों को नुकसान पहुंचता है या रोपाई में देरी होती है, तो पौधे सूख सकते हैं और पैदावार पर सीधा असर पड़ सकता है.
पौध उखाड़ने से पहले करें खेत की सही तैयारी
कृषि विशेषज्ञ प्रमोद कुमार के अनुसार, धान की नर्सरी से पौध उखाड़ने से एक दिन पहले उसमें पर्याप्त पानी भर देना चाहिए. इससे मिट्टी नरम और नम हो जाती है, जिससे पौधों की जड़ें आसानी से बाहर निकलती हैं और उन पर अतिरिक्त दबाव नहीं पड़ता. यदि सूखी मिट्टी से पौध उखाड़ी जाती है, तो जड़ें टूटने की संभावना बढ़ जाती है, जिससे मुख्य खेत में रोपाई के बाद पौधों की बढ़वार प्रभावित हो सकती है.
रोपाई में देरी और गलत तरीका बन सकता है नुकसान की वजह
पौध उखाड़ते समय हमेशा उसे जड़ के पास से धीरे-धीरे पकड़कर निकालना चाहिए. इससे जड़ें सुरक्षित रहती हैं और पौधे जल्दी नए खेत में स्थापित हो जाते हैं. उखाड़ी गई पौध को लंबे समय तक खुले में नहीं छोड़ना चाहिए. विशेषज्ञों का कहना है कि 24 घंटे के भीतर रोपाई पूरी कर लेनी चाहिए. अधिक देर होने पर पौधों की नमी कम हो जाती है, जिससे उनके सूखने का खतरा बढ़ जाता है. रोपाई से पहले मुख्य खेत की अच्छी तरह जुताई और पडलिंग करना भी जरूरी है. इससे मिट्टी समतल होती है और खेत में पानी लंबे समय तक बना रहता है, जो नई पौध के विकास के लिए लाभदायक होता है.
सही दूरी और पोषण से मिलेगी बेहतर पैदावार
धान की रोपाई हमेशा लाइन विधि से करनी चाहिए. लाइन से लाइन की दूरी करीब 20 सेंटीमीटर और पौधे से पौधे की दूरी लगभग 15 सेंटीमीटर रखना बेहतर माना जाता है. एक स्थान पर 2 से 3 स्वस्थ पौधे ही लगाने चाहिए, ताकि कल्ले अच्छी संख्या में निकल सकें और फसल मजबूत बने. रोपाई के बाद शुरुआती एक सप्ताह तक खेत में 2 से 3 इंच पानी बनाए रखना चाहिए. इससे पौधों की जड़ें जल्दी जमती हैं और तेज धूप का असर कम होता है. साथ ही मिट्टी परीक्षण के आधार पर नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश और जिंक सल्फेट जैसी आवश्यक खादों का संतुलित उपयोग करना चाहिए, जिससे पौधों की बढ़वार तेज होती है और रोगों का खतरा भी कम रहता है.
शुरुआती दिनों में खरपतवार और कीटों से करें बचाव
रोपाई के 15 से 20 दिनों के भीतर खेत में खरपतवार तेजी से उग सकते हैं, जो फसल के पोषक तत्वों को नुकसान पहुंचाते हैं. इसलिए समय पर उचित खरपतवार नाशक का उपयोग करना चाहिए और खेत की नियमित निगरानी करते रहना चाहिए. यदि किसी प्रकार के कीट या रोग के शुरुआती लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत नियंत्रण के उपाय अपनाने चाहिए. विशेषज्ञों का मानना है कि शुरुआती चरण में सही देखभाल करने से धान की फसल मजबूत होती है और किसानों को बेहतर उत्पादन के साथ अधिक लाभ मिलने की संभावना बढ़ जाती है.