Paddy Cultivation: कर्नाटक के उत्तर कन्नड़ जिले के सिरसी तालुक में इस बार मॉनसून की बेरुखी ने धान किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है. बारिश की आस में खेत तैयार कर चुके किसानों के लिए लंबे समय से सूखा जैसे हालात परेशानी का कारण बन गए हैं. समय पर वर्षा न होने से न केवल खेती का काम ठप पड़ा है, बल्कि किसान फिलहाल कामकाज के बिना खाली बैठे हैं और पूरी कृषि गतिविधि प्रभावित हो गई है.
जून का आधा महीना बीत जाने के बाद भी क्षेत्र में अब तक उम्मीद के मुताबिक बारिश नहीं हुई है. इसका सीधा असर ‘अगे माड़ी’ (डैपोग विधि) पर पड़ रहा है, जिसका इस्तेमाल धान की नर्सरी तैयार करने के लिए किया जाता है. बारिश न होने से नर्सरी का काम आगे नहीं बढ़ पा रहा है. सिरसी में धान की पूरी खेती मानसून पर ही निर्भर है, इसलिए बारिश में देरी से किसानों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है.
7,000 हेक्टेयर में धान की खेती होती
इस तालुक में करीब 7,000 हेक्टेयर में धान की खेती होती है और सैकड़ों किसान परिवार अपनी आजीविका के लिए इसी पर निर्भर हैं. लेकिन सूखे जैसे हालात के कारण किसान चिंता में हैं और बारिश का इंतजार कर रहे हैं. इस क्षेत्र में किसान पारंपरिक रूप से सीधे बुवाई के बजाय रोपाई प्रणाली अपनाते हैं. इसमें पहले नर्सरी बेड में ‘अगे माड़ी’ तैयार की जाती है और बाद में उन पौधों को खेतों में रोप दिया जाता है. इस पूरी प्रक्रिया के लिए जून और जुलाई में अच्छी बारिश जरूरी होती है.
किसान नहीं तैयार कर पा रहे धान की नर्सरी
किसान सोमशेखर गौडर (भाशी) ने ‘डेक्कन हेराल्ड’ को कहा कि बारिश न होने के कारण इस समय नर्सरी तैयार नहीं हो पा रही है, जिससे खेती का काम प्रभावित हो गया है. दसनकोप्पा, दानगनहल्ली और वड्डाला जैसे इलाकों में किसानों ने पहले से तैयारी करके बुवाई शुरू कर दी थी. लेकिन बुवाई के तुरंत बाद ही बारिश कम पड़ने लगी, जिससे सूखे जैसे हालात बन गए हैं. अब हाल ही में निकले छोटे पौधों को पानी की भारी कमी का सामना करना पड़ रहा है. किसान इन फसलों को बचाने को लेकर चिंतित हैं.
बारिश नहीं होने से कृषि कार्य प्रभावित
होसकोप्पा के किसान आनंद गौड़ा ने कहा कि बारिश के इस असंतुलन की वजह से पूरा कृषि कार्यक्रम बिगड़ गया है और खेती का काम तय समय से काफी पीछे चला गया है. सिरसी तालुक में चल रहे सूखे जैसे हालात ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है. बारिश में देरी के कारण खेती को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है. किसानों को डर है कि अगर मानसून और देर से आया, तो धान की रोपाई का समय बिगड़ सकता है और इस साल पैदावार पर भी असर पड़ सकता है. फिलहाल कृषि कार्य रुके हुए हैं और पूरी खेती व्यवस्था बारिश पर ही निर्भर हो गई है.