सड़ी गाजर-नींबू से बन रहा था अचार.. छापे में खुला बड़ा खेल, ऐसे करें असली अचार की पहचान

गाजियाबाद में खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्रवाई के दौरान अचार निर्माण से जुड़ी गंभीर अनियमितताएं सामने आईं. जांच में खराब गुणवत्ता वाली सामग्री और असुरक्षित माहौल में खाद्य उत्पाद तैयार किए जाने के संकेत मिले. अधिकारियों ने बड़ी मात्रा में सामान नष्ट कराया और नमूने जांच के लिए भेजकर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है.

Saurabh Sharma
नोएडा | Published: 26 Jun, 2026 | 10:24 PM

Pickle Factory Raid: उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद के खोड़ा क्षेत्र में खाद्य सुरक्षा विभाग की छापेमारी ने अचार निर्माण से जुड़ी गंभीर लापरवाही को उजागर कर दिया. जांच में सड़ी-गली गाजर और नींबू से अचार बनता मिला, जबकि एक फैक्ट्री भैंस के तबेले में संचालित हो रही थी. अधिकारियों ने बड़ी मात्रा में खराब सामग्री नष्ट कर नमूने जांच के लिए भेजे हैं. इस घटना के बाद उपभोक्ताओं के लिए अचार खरीदते समय सतर्क रहना और उसकी गुणवत्ता की पहचान करना बेहद जरूरी हो गया है. विशेषज्ञों का कहना है कि रंग, महक, तेल और फफूंदी की जांच कर सुरक्षित अचार की पहचान की जा सकती है.

तबेले में बन रहा था अचार, गंदगी का मिला अंबार

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारीयों ने सबसे पहले आदर्श नगर स्थित एक अचार निर्माण  इकाई पर छापा मारा. जांच के दौरान पाया गया कि फैक्ट्री भैंस के तबेले में संचालित की जा रही थी. वहां रखे ड्रम बेहद गंदे थे और अचार का भंडारण भी असुरक्षित परिस्थितियों में किया गया था. अधिकारियों को मौके पर बड़ी मात्रा में सड़े-गले नींबू और गाजर मिले, जिनका उपयोग अचार बनाने में किया जा रहा था. तैयार अचार से दुर्गंध आ रही थी और कई स्थानों पर फंगस भी दिखाई दी.

30 क्विंटल से अधिक माल कराया गया नष्ट

खाद्य सुरक्षा विभाग की छापेमारी में बड़ी मात्रा में खराब अचार और कच्चा माल बरामद हुआ. अधिकारियों ने एक फैक्ट्री से 20 क्विंटल नींबू का अचार, 4 क्विंटल मिक्स अचार और सिरका नष्ट कराया, जबकि दूसरी फैक्ट्री में करीब 1,000 किलोग्राम खराब अचार मिला. 180 किलोग्राम अचार और बड़ी मात्रा में नमक को सील किया गया. जांच के लिए छह नमूने प्रयोगशाला भेजे गए हैं. कार्रवाई के दौरान संचालक खाद्य लाइसेंस और पंजीकरण से जुड़े दस्तावेज नहीं दिखा सके. खाद्य सुरक्षा मानकों के उल्लंघन पर विभाग ने सख्त कदम  उठाए.

रिटायर्ड दरोगा से जुड़ा नाम, रिपोर्ट के बाद होगी अगली कार्रवाई

मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि तबेले में संचालित फैक्ट्री का संबंध दिल्ली पुलिस के एक रिटायर्ड दरोगा से है. बताया जा रहा है कि कार्रवाई के दौरान प्रभाव दिखाने की कोशिश भी की गई, लेकिन विभागीय टीम ने जांच जारी रखी. अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि भेजे गए नमूनों की रिपोर्ट आने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी. यदि जांच में खाद्य सुरक्षा नियमों  के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो संबंधित संचालकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया जा सकता है. यह कार्रवाई उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य की सुरक्षा और खाद्य गुणवत्ता सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है.

अचार खरीदते समय बरतें सावधानी

बाजार में मिलावटी और खराब गुणवत्ता  वाले खाद्य उत्पादों की बढ़ती शिकायतों के बीच अचार खरीदते समय भी सतर्क रहना जरूरी है. विशेषज्ञों के अनुसार, सही और सुरक्षित अचार की पहचान उसके रंग, महक, स्वाद और रखरखाव के तरीके से की जा सकती है. यदि अचार का रंग बहुत ज्यादा चमकीला लाल या पीला दिखाई दे, तो उसमें कृत्रिम रंग मिलाए जाने की संभावना हो सकती है. वहीं, अचार में मसालों और तेल की प्राकृतिक खुशबू आनी चाहिए. यदि उसमें बासीपन या खमीर जैसी दुर्गंध महसूस हो, तो उसका सेवन नहीं करना चाहिए.

फंगस और नमी पर रखें खास नजर

विशेषज्ञ बताते हैं कि पारंपरिक अचार हमेशा तेल में डूबा रहता है, क्योंकि तेल प्राकृतिक संरक्षक  का काम करता है. अचार के ऊपर सफेद या रंगीन फफूंदी दिखाई दे तो यह खराब होने का संकेत है. इसके अलावा अचार को कांच या चीनी मिट्टी के बर्तनों में रखना बेहतर माना जाता है. सही पहचान और सावधानी से खरीदा गया अचार न केवल स्वाद बढ़ाता है बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी सुरक्षित रहता है.

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Published: 26 Jun, 2026 | 10:24 PM

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