पानी भरे खेत में डाल रहे यूरिया? हो जाएं सावधान, वरना मेहनत और पैसा दोनों हो जाएगा बर्बाद!
धान की फसल में यूरिया का इस्तेमाल सोच-समझकर करना बेहद जरूरी है. पानी भरे खेत में यूरिया डालने से खाद का बड़ा हिस्सा बेकार हो सकता है. कृषि विशेषज्ञ प्रमोद कुमार के अनुसार, सही समय, सही मात्रा और सही तरीके से यूरिया देने पर लागत घटेगी और उत्पादन बढ़ेगा.
Paddy Cultivation: धान की बेहतर पैदावार के लिए संतुलित उर्वरक प्रबंधन बेहद जरूरी है. खासकर नाइट्रोजन की पूर्ति के लिए किसान यूरिया का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन अगर इसे गलत समय और गलत तरीके से डाला जाए तो फसल को नुकसान हो सकता है और खाद की लागत भी बढ़ सकती है. कृषि विशेषज्ञ प्रमोद कुमार के अनुसार, धान के खेत में यूरिया का इस्तेमाल हमेशा सही अवस्था और खेत की स्थिति को देखकर करना चाहिए. पानी भरे खेत में यूरिया डालने से नाइट्रोजन का बड़ा हिस्सा बेकार हो जाता है, जिससे किसानों को अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाता.
पानी भरे खेत में यूरिया डालने से नहीं मिलता पूरा फायदा
कृषि विशेषज्ञ प्रमोद कुमार के अनुसार, कई किसान धान के खेत में पानी भरा होने के बावजूद यूरिया का छिड़काव कर देते हैं. इससे यूरिया पानी के साथ बह सकता है या नाइट्रोजन जमीन की गहराई में चली जाती है. इसके अलावा कुछ मात्रा गैस के रूप में भी उड़ जाती है. ऐसी स्थिति में पौधों को पर्याप्त मात्रा में नाइट्रोजन नहीं मिल पाती और किसान को अतिरिक्त खाद डालनी पड़ती है. उन्होंने बताया कि यूरिया डालने से पहले खेत का अतिरिक्त पानी निकाल देना चाहिए. खेत में केवल नमी या हल्की कीचड़ की स्थिति होनी चाहिए, ताकि यूरिया सीधे मिट्टी में मिलकर पौधों की जड़ों तक पहुंच सके.
तीन किस्तों में यूरिया देने से बढ़ेगी पैदावार
कृषि विशेषज्ञ के मुताबिक, धान में यूरिया की पूरी मात्रा एक साथ डालने के बजाय इसे तीन भागों में बांटकर देना ज्यादा फायदेमंद रहता है. पहली खुराक रोपाई के 7 से 10 दिन के अंदर दी जा सकती है. इस समय पौधों की जड़ें मजबूत होने लगती हैं और शुरुआती विकास के लिए नाइट्रोजन की जरूरत होती है. दूसरी खुराक रोपाई के 20 से 25 दिन बाद कल्ले निकलने की अवस्था में देनी चाहिए. इस समय नाइट्रोजन मिलने से पौधे में ज्यादा कल्ले बनते हैं और फसल का विकास बेहतर होता है. तीसरी और अंतिम खुराक बालियां बनने की शुरुआती अवस्था में देने से दाने अच्छी तरह भरते हैं और उत्पादन बढ़ता है.
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यूरिया के साथ संतुलित खाद प्रबंधन भी जरूरी
कृषि विशेषज्ञ प्रमोद कुमार ने बताया कि केवल यूरिया का अधिक इस्तेमाल करने से फसल को फायदा नहीं होता. धान में नाइट्रोजन के साथ फास्फोरस और पोटाश की संतुलित मात्रा भी जरूरी होती है. इससे पौधों की जड़ें मजबूत होती हैं और फसल रोगों से बची रहती है. उन्होंने किसानों को सलाह दी कि मिट्टी की जांच के आधार पर ही खाद का इस्तेमाल करें. जरूरत से ज्यादा यूरिया डालने से जमीन की उर्वरता प्रभावित हो सकती है और फसल में रोगों का खतरा भी बढ़ सकता है. नीम लेपित यूरिया का इस्तेमाल करने से नाइट्रोजन धीरे-धीरे पौधों को मिलती रहती है.
शाम के समय करें यूरिया का छिड़काव
कृषि विशेषज्ञ के अनुसार, यूरिया का प्रयोग सुबह तेज धूप में करने से बचना चाहिए. शाम के समय खाद डालना ज्यादा लाभकारी रहता है, क्योंकि इस दौरान नाइट्रोजन के उड़ने की संभावना कम होती है. किसान खेत में नमी की स्थिति देखकर ही यूरिया का छिड़काव करें. उन्होंने कहा कि सही समय, सही मात्रा और सही तरीके से यूरिया का इस्तेमाल करने से खाद की बचत होती है, लागत कम होती है और धान की गुणवत्ता व उत्पादन दोनों में सुधार आता है. किसानों को वैज्ञानिक तरीके से उर्वरक प्रबंधन अपनाकर बेहतर पैदावार हासिल करनी चाहिए.