लीची में लग रहे हैं खतरनाक कीट, अभी नहीं संभले तो पूरी फसल हो सकती है बर्बाद, कृषि विभाग की एडवाइजरी

Litchi Pest Control Tips: लीची की फसल इस समय लीची की फसल बहुत नाजुक दौर में होती है, इसलिए सही देखभाल बहुत जरूरी है. बाग में नमी बनाए रखें, सही मात्रा में उर्वरक दें और समय पर कीटनाशक का छिड़काव करें. स्टिंक बग और फल बेधक जैसे कीटों से बचाव जरूरी है, वहीं रोग नियंत्रण के लिए फफूंदनाशक का उपयोग करें.

Isha Gupta
नोएडा | Published: 12 Apr, 2026 | 05:23 PM

Litchi Farming: बिहार में लीची की खेती किसानों के लिए अच्छी कमाई का जरिया बन गई है. इस समय पेड़ों पर फल बनने की शुरुआत हो रही है, जो बहुत नाजुक समय होता है. अगर इस दौरान ठीक से देखभाल नहीं की गई, तो कीड़े और बीमारियां पूरी फसल खराब कर सकती हैं. इसीलिए बिहार कृषि विभाग ने किसानों को सलाह दी है कि वे इस समय खास ध्यान रखें और बताए गए उपाय अपनाएं. सही देखभाल करने से लीची की पैदावार भी अच्छी होगी और फल की क्वालिटी भी बेहतर मिलेगी.

बाग में नमी बनाए रखना है जरूरी

लीची के पेड़ों की अच्छी बढ़त के लिए मिट्टी में नमी रहना बहुत जरूरी है. इसलिए समय-समय पर हल्की सिंचाई करते रहें, ताकि जमीन सूखी न हो. इससे पेड़ों में फल अच्छी तरह लगते हैं और पौधे भी स्वस्थ रहते हैं. खाद के तौर पर हर पेड़ में करीब 500-600 ग्राम यूरिया और 600 ग्राम पोटाश डालना फायदेमंद होता है. इसे पेड़ के चारों तरफ मिट्टी में मिला दें. ध्यान रखें कि जब आप खाद डालें, उस समय मिट्टी में थोड़ी नमी जरूर हो, तभी खाद का पूरा असर मिलेगा.

कीटों से बचाव के उपाय

इस समय लीची में सबसे ज्यादा खतरा स्टिंक बग, फल बोरर और फल बेधक कीट से होता है. जिन बागों में इनका असर नहीं है, वहां भी बचाव के लिए कीटनाशक का छिड़काव जरूरी है. अगर कीट दिखाई दें, तो सही दवा मिलाकर समय पर स्प्रे करें ताकि नुकसान को रोका जा सके. मंजर और फल झुलसा जैसे रोग लीची की फसल को तेजी से खराब कर सकते हैं. इससे बचाव के लिए कीटनाशक के साथ फफूंदनाशक (जैसे थायोफेनेट मिथाइल) का छिड़काव करना जरूरी है. इससे फल गिरने की समस्या भी कम होती है.

सही समय पर करें छिड़काव

जब फल छोटे हों, तब ज्यादा दवाओं का इस्तेमाल न करें. जैसे ही फल मटर या बड़ी लौंग के आकार के हो जाएं, तभी कीटनाशक का उपयोग करें. इससे फल की क्वालिटी और आकार दोनों बेहतर होते हैं. कीटनाशक या फफूंदनाशक का असर बढ़ाने के लिए उसमें स्टिकर जरूर मिलाएं. लगभग 0.3 मिली प्रति लीटर पानी में स्टिकर मिलाने से दवा पत्तियों और फलों पर अच्छी तरह चिपकती है और बेहतर परिणाम देती है.

बोरॉन स्प्रे से मिलेगा बेहतर फल

फल के बेहतर आकार और क्वालिटी के लिए 15 दिन के अंतराल पर बोरॉन (20-21 फीसदी) का छिड़काव करें. इससे फल फटने की समस्या कम होती है और बाजार में अच्छी कीमत मिलती है. ससे उत्पादन बढ़ेगा, फल की गुणवत्ता सुधरेगी और बाजार में बेहतर दाम मिलेगा.

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