भयंकर घाटे में आलू किसान, आलू की लागत 1000 रुपये और बिक्री मूल्य 800 रुपये.. कैसे चलेगा अन्नदाता का घर
potato mandi rates today: उत्तर प्रदेश में आलू का औसत मंडी भाव 24 मार्च को 600 रुपये प्रति क्विंटल दर्ज किया गया है. जबकि, किसानों को आलू की लागत 1000 रुपये प्रति क्विंटल आई है. ऐसे में किसानों के इस नुकसान की भरपाई को लेकर मांग शुरू हो गई है.
आलू किसान भयंकर घाटे में हैं उनकी लागत तक नहीं निकल पा रही है. उत्तर प्रदेश में आलू की लागत 1000 रुपये प्रति क्विंटल है और उसका बाजार बिक्री मूल्य 800 रुपये प्रति क्विंटल तय किया जा रहा है. थोक मंडियों में तो दाम और भी कम मिल रहे हैं. सीधे-सीधे 200 रुपये प्रति क्विंटल का घाटा किसान झेल रहे हैं. उत्तर प्रदेश में आलू का औसत मंडी भाव 24 मार्च को 600 रुपये प्रति क्विंटल दर्ज किया गया है. यानी किसान को सीधे 400 रुपये का घाटा हो रहा है. वहीं, अगर कोल्ड स्टोरेज के साथ ही माल ढुलाई-उतराई खर्च जोड़ दें तो किसान का नुकसान और भी बढ़ जाता है. सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने बाजार में आलू की गिरती कीमतों को लेकर BJP सरकार पर जोरदार हमला बोला है.
समाजवादी पार्टी का कहना है कि उत्तर प्रदेश में आलू की खेती एक ढांचागत संकट में फंस गई है. क्योंकि उत्पादन लागत मौजूदा मंडी कीमतों से कहीं ज्यादा हो गई है. पार्टी ने कहा कि भंडारण के अर्थशास्त्र और कीमतों से जुड़े जोखिम को साझा करने की व्यवस्था में सुधार किए बिना, पश्चिमी यूपी में आलू की खेती ढांचागत रूप से अव्यावहारिक बनी रहेगी. इस स्थिति से यह एक लाभदायक नकदी फसल होने के बजाय ग्रामीण संकट को बार-बार उभरने वाला कारण बन जाएगी.
सरकार किसान विरोधी है और आलू किसानों को बर्बाद होते देख रही
समाजवादी पार्टी (SP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बाजार में आलू की गिरती कीमतों को लेकर BJP सरकार पर जोरदार हमला बोला है. उन्होंने मीडिया से कहा कि आलू की गिरती कीमतों ने किसानों को बर्बादी के कगार पर पहुंचा दिया है, लेकिन किसान-विरोधी और कृषि-विरोधी BJP सरकार पूरी तरह से बेपरवाह होकर बैठी है और उनकी मांगों को नजरअंदाज कर रही है. उन्होंने आरोप लगाया कि BJP की पूरी रणनीति ही यह है कि फसलों की कीमतें इतनी कम कर दी जाएं कि किसान अपनी लागत भी न निकाल पाएं. वे थक-हारकर खेती छोड़ दें और अपनी जमीन BJP के अमीर समर्थकों को कौड़ियों के भाव बेचने पर मजबूर हो जाएं. फिर BJP के ये अमीर समर्थक किसानों को उनके ही खेतों में मालिक से मजदूर बना देते हैं.
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भयंकर नुकसान में हैं आलू किसान
सपा की ओर से कहा गया है कि पश्चिमी यूपी के कन्नौज बेल्ट में आलू उत्पादन की लागत बढ़कर 1,000 प्रति क्विंटल से ज्यादा हो गई है, जबकि बाजार में कीमतें लगभग 800 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से तय हो रही हैं. इससे किसानों को भंडारण और मार्केटिंग के खर्चों से पहले ही लगभग 200 रुपये प्रति क्विंटल का नुकसान हो रहा है. इसमें मौजूदा कोल्ड स्टोरेज शुल्क 340-380 रुपये प्रति क्विंटल जोड़ने पर कुल लागत बढ़कर 1,340-1,380 रुपये प्रति क्विंटल हो जाती है, जो कि किसानों को मिलने वाली कीमतों से कहीं ज्यादा है.
हरियाणा और पंजाब में भी आलू किसान परेशान
किसान नेता गुणी प्रकाश ने किसान इंडिया से बात करते हुए कहा कि आलू किसानों की यह स्थिति केवल उत्तर प्रदेश की नहीं है. पंजाब और हरियाणा में भी आलू किसानों का बुरा हाल है. उन्होंने कहा कि हरियाणा की मंडियों में आलू का होलसेल रेट 2 रुपये किलो हो गया है. उन्होंने कहा कि एक किलो आलू उगाने पर 10 रुपये की लागत आती है. ऐसे में अगर किसान 2 से 4 रुपये किलो दी दर से आलू बेचते हैं, तो उन्हें प्रति किलो 6 से 8 रुपये का नुकसान हो रहा है. उन्होंने कहा कि किसानों को नुकसान से बचाने के लिए हरियाणा और पंजाब सरकार 12 रुपये किलो की दर से आलू की खरीद शुरू करे.