Punjab News: पिछले साल पंजाब में बाढ़ ने भारी तबाही मचाई. हजारों हेक्टेयर जमीन पर बाढ़ के साथ आई गाद जम गई. इससे गेहूं की फसल में अनजानी जड़ी-बूटियों उग रही हैं. ऐसे में बाढ़ के कारण मिट्टी की सेहत पर लंबे समय तक पड़ने वाले प्रभाव को लेकर किसानों की चिंता बढ़ गई है. साथ ही फसलों को नुकसान पहुंचने की संभावना है. इसी बीच पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (PAU) ने गुरदासपुर और अमृतसर जिलों में टीमों को भेजकर गेहूं के खेतों में उग रही अनजानी जड़ी-बूटियों का सर्वेक्षण करने का काम सौंपा है.
PAU के अनुसार, कई किसानों ने रिपोर्ट किया है कि गेहूं के साथ कुछ नई किस्म की जंगली घास उग आई है, जो पहले इस क्षेत्र में नहीं देखी गई थी. वैज्ञानिकों को खेतों का सर्वेक्षण करने, नमूने लेने और जड़ी-बूटियों के प्रकार को दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं. PAU के कुलपति सतबीर सिंह गोसाल ने द ट्रिब्यून से कहा कि हो सकता है कि बाढ़ के समय मिट्टी के साथ ये जंगली पौधे पहाड़ी क्षेत्रों से आ गए हो. उन्होंने कहा कि अगर समय रहते इन्हें नियंत्रित नहीं किया गया तो इनके बीज तेजी से फैल सकते हैं और अन्य जिलों तक पहुंच सकते हैं. इसके साथ ही फसलों को नुकसान से बचाने के लिए शोध भी किया जाएगा.
पंजाब की मिट्टी में जिंक, लोहा और मैग्नीशियम जैसे सूक्ष्म पोषक तत्व मौजूद
उन्होंने कहा कि बाढ़ के दौरान कृषि भूमि पर बड़ी मात्रा में बालू और कीचड़ जम गया, जिससे मिट्टी की उर्वरता प्रभावित हुई. राज्य सरकार ने नुकसान कम करने के लिए आपदा प्रबंधन के तहत सहायता भी प्रदान की. पिछले साल PAU के मृदा विज्ञान विभाग द्वारा अमृतसर, गुरदासपुर, फतेहपुर, कपूरथला और पटियाला के बाढ़ प्रभावित गांवों में किए गए अध्ययन में पाया गया कि बाढ़ ने खेतों की स्थिति कई तरह से बदल दी थी. गोसाल ने कहा कि पंजाब की मिट्टी दुनिया की सबसे उर्वर मिट्टियों में शामिल है और इसमें मुख्य पोषक तत्व जैसे नाइट्रोजन, पोटैशियम और फॉस्फोरस के साथ-साथ जिंक, लोहा और मैग्नीशियम जैसे सूक्ष्म पोषक तत्व भी पाए जाते हैं.
उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश की पहाड़ियों से आई कीचड़ में लाभकारी सूक्ष्म पोषक तत्व होते हैं, लेकिन इसके जमने से पंजाब की मूल मिट्टी का संतुलन प्रभावित हुआ है. अध्ययन में यह भी पाया गया कि खेतों में कीचड़ की मोटाई, बनावट और संरचना में काफी अंतर था. कुछ जगहों पर रेत और कीचड़ की परत एक मीटर से भी अधिक थी, जबकि कुछ क्षेत्रों में यह पतली थी.
लगभग 4.81 लाख एकड़ फसलें बर्बाद हो गई थीं
बता दें पिछले साल पंजाब में बाढ़ से लगभग 4.81 लाख एकड़ फसलें बर्बाद हो गई थीं. बड़ी मात्रा में खेतों में गाद जम गई थी. तब पंजाब सरकार ने बाढ़ प्रभावित इलाकों में सफाई अभियान शुरू किया था. मुख्यमंत्री भगवंत मान ने वादा किया था कि 24 सितंबर तक सभी प्रभावित गांवों को गाद (सिल्ट) से मुक्त कर दिया जाएगा. इस अभियान पर करीब 100 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान था. सरकार ने खेतों से गाद हटाने के लिए स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) भी जारी किए थे.
2,300 बाढ़ प्रभावित गांवों और शहरी क्षेत्रों में काम शुरू किया गया था
तब मुख्यमंत्री भगवंत मान ने मीडिया से कहा था कि कई इलाकों से बाढ़ का पानी तो उतर गया है, लेकिन खेतों को फिर से खेती योग्य बनाने के लिए गाद हटाना जरूरी है. उन्होंने बताया था कि यह सफाई अभियान 2,300 बाढ़ प्रभावित गांवों और शहरी क्षेत्रों में शुरू किया गया. किसानों ने चिंता जताई थी कि खेतों से जमा गाद हटाने में उन्हें काफी खर्च करना पड़ेगा, जबकि इसकी बिक्री से ज्यादा मुनाफा नहीं होगा. खराब क्वालिटी के कारण एक ट्रॉली गाद के लिए उन्हें सिर्फ लगभग 2,000 रुपये मिल रहे थे.