150 रुपये में बिकने वाली पर्पल पत्तागोभी अब घर पर उगाएं, सेहत भी पाएं और कमाई भी बढ़ाएं
सेहत के प्रति जागरूक लोगों के बीच बैंगनी पत्तागोभी की मांग तेजी से बढ़ी है. आकर्षक रंग, हल्का मीठा स्वाद और पोषक तत्वों से भरपूर होने के कारण इसे सुपरफूड की तरह देखा जा रहा है. अच्छी बात यह है कि थोड़ी समझ और सही देखभाल के साथ इसे घर पर भी आसानी से उगाया जा सकता है.
Purple cabbage farming: आजकल सलाद की प्लेट में अगर गहरे बैंगनी रंग की पत्तागोभी सजी हो, तो पूरा डाइनिंग टेबल ही खास लगने लगता है. यही है पर्पल पत्तागोभी, जिसे रेड कैबेज भी कहा जाता है. पहले यह सब्जी केवल बड़े होटलों और महंगे रेस्टोरेंट तक सीमित थी, लेकिन अब आम लोग भी इसे अपनी रसोई और किचन गार्डन में शामिल कर रहे हैं. सेहत के प्रति जागरूक लोगों के बीच इसकी मांग तेजी से बढ़ी है. आकर्षक रंग, हल्का मीठा स्वाद और पोषक तत्वों से भरपूर होने के कारण इसे सुपरफूड की तरह देखा जा रहा है. अच्छी बात यह है कि थोड़ी समझ और सही देखभाल के साथ इसे घर पर भी आसानी से उगाया जा सकता है.
पोषण से भरपूर खास सब्जी
पर्पल पत्तागोभी सिर्फ दिखने में सुंदर नहीं होती, बल्कि पोषण के मामले में भी बेहद ताकतवर है. इसमें विटामिन ए, बी और सी अच्छी मात्रा में पाए जाते हैं. इसके अलावा जिंक, मैग्नीशियम, आयरन और ओमेगा फैटी एसिड जैसे तत्व भी मौजूद होते हैं. इसका गहरा बैंगनी रंग एंथोसायनिन नामक एंटीऑक्सीडेंट की वजह से होता है, जो शरीर को कई बीमारियों से बचाने में मदद करता है.
वहीं हरी पत्तागोभी की तुलना में इसकी कीमत बाजार में ज्यादा रहती है. कई शहरों में यह 100 से 150 रुपये प्रति पीस तक बिकती है. इसी वजह से किसान और शहरी बागवानी करने वाले लोग इसे कम जगह में उगाकर अच्छा लाभ कमा रहे हैं.
खेती के लिए सही मौसम और जमीन
पर्पल पत्तागोभी ठंडे मौसम की फसल है. इसे अक्टूबर से दिसंबर के बीच बोना बेहतर माना जाता है. हल्की ठंड में इसके पौधे अच्छी तरह बढ़ते हैं और कंद सख्त व रंगीन बनता है. हालांकि जिन इलाकों में तापमान बहुत ज्यादा गिरता है, वहां हल्की सुरक्षा देना जरूरी होता है.
मिट्टी की बात करें तो दोमट या हल्की चिकनी मिट्टी इसमें सबसे अच्छी रहती है. जमीन में पानी रुकना नहीं चाहिए, वरना जड़ें सड़ सकती हैं. मिट्टी का पीएच स्तर लगभग 6 से 7 के बीच हो तो फसल बेहतर मिलती है. बीज बोने से पहले मिट्टी को अच्छी तरह भुरभुरा कर लें और उसमें सड़ी हुई गोबर की खाद या वर्मी कम्पोस्ट मिला दें.
बीज से पौधा तैयार करने की प्रक्रिया
सबसे पहले नर्सरी तैयार की जाती है. बीजों को क्यारी में हल्की गहराई पर बो दें और ऊपर से पतली परत मिट्टी की डाल दें. करीब 8 से 10 दिन में अंकुर निकल आते हैं. जब पौधे 4 से 5 पत्तियां निकाल लें, तब उन्हें मुख्य खेत या गमले में रोप सकते हैं. पौधों के बीच लगभग 45 से 50 सेंटीमीटर की दूरी रखें, ताकि उन्हें फैलने की जगह मिल सके. यदि आप छत या बालकनी में उगाना चाहते हैं तो बड़े गमले या ग्रो बैग का इस्तेमाल करें. एक गमले में एक ही पौधा लगाएं, ताकि वह सही तरीके से विकसित हो सके.
सिंचाई और देखभाल का सही तरीका
पर्पल पत्तागोभी को नियमित लेकिन संतुलित पानी की जरूरत होती है. मिट्टी में हल्की नमी बनी रहनी चाहिए, लेकिन ज्यादा पानी से बचें. हर 7 से 10 दिन में हल्की सिंचाई पर्याप्त रहती है. गर्म मौसम में जरूरत के अनुसार पानी बढ़ाया जा सकता है. वहीं खरपतवार को समय-समय पर हटाना जरूरी है, क्योंकि ये पौधे के पोषण को कम कर देते हैं. पौधों के आसपास मिट्टी को हल्का ढीला करते रहें, इससे जड़ों को हवा मिलती है और वृद्धि बेहतर होती है.
कीट और रोग से बचाव
इस फसल में पत्तों को खाने वाले कीट और फफूंद रोग का खतरा रहता है. जैविक तरीके से बचाव करना बेहतर होता है. नीम का तेल पानी में मिलाकर 10 से 15 दिन के अंतराल पर छिड़काव करने से कीट दूर रहते हैं. खेत में पानी जमा न होने दें और पौधों के बीच उचित दूरी बनाए रखें, ताकि हवा का प्रवाह बना रहे.
कब करें कटाई और कितना होगा उत्पादन
रोपाई के लगभग 4 से 5 महीने बाद पर्पल पत्तागोभी कटाई के लिए तैयार हो जाती है. जब कंद सख्त और पूरी तरह गोल हो जाए, तब उसे चाकू से काट लें. सही देखभाल करने पर एक पौधे से एक अच्छी गुणवत्ता का बड़ा कंद मिलता है. अगर आधा डिसमिल जमीन में इसकी खेती की जाए तो 30 से 40 पौधे आराम से तैयार किए जा सकते हैं. बाजार में अच्छी मांग होने के कारण इससे बढ़िया आमदनी भी संभव है.
घर की सेहत और कमाई दोनों का सहारा
पर्पल पत्तागोभी सिर्फ एक फैशनेबल सब्जी नहीं है, बल्कि सेहत और आय दोनों के लिए फायदेमंद विकल्प है. थोड़ी मेहनत, सही खाद और संतुलित देखभाल से इसे घर की छोटी सी क्यारी में भी उगाया जा सकता है. अगर आप ताजी, पौष्टिक और आकर्षक सब्जी अपने परिवार को देना चाहते हैं या फिर अतिरिक्त आमदनी का साधन ढूंढ रहे हैं, तो पर्पल पत्तागोभी की खेती एक अच्छा कदम साबित हो सकती है.