शिवराज सिंह ने किसान इंडिया को बताया- पारंपरिक बीजों का संरक्षण करेगी सरकार, बीज ग्राम बनाने का ऐलान

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 'किसान इंडिया' को बताया कि हमें अच्छे बीजों की जरूरत है. उन्होंने कहा कि हर ब्लॉक में बीज ग्राम बनाए जाएंगे. ताकि किसान बेहतर बीज हासिल कर सकें और उन्होंने 20 फीसदी तक उत्पादन बढ़ने की उम्मीद जताई है. जबकि, पारंपरिक फसलों के बीजों का संरक्षण किया जाएगा.

शैलेश चतुर्वेदी
भोपाल | Updated On: 12 Apr, 2026 | 06:46 PM

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि हमें अच्छे बीजों की जरूरत है. उन्होंने किसान इंडिया’ से बातचीत करते हुए कहा कि हर ब्लॉक में बीज ग्राम बनाए जाएंगे. ताकि किसान बेहतर बीज हासिल कर सकें और उन्होंने 20 फीसदी तक उत्पादन बढ़ने की उम्मीद जताई है. इसके अलावा उन्होंने खाद की उपलब्धता के सवाल पर बताया कि वैश्विक हालातों के चलते आपूर्ति पर असर पड़ा है, लेकिन देश में पर्याप्त मात्रा में खाद मौजूद है. उन्होंने कहा कि बीते सप्ताह ही खाद सब्सिडी को मंजूरी दी गई है. इसके अलावा केंद्रीय कृषि मंत्री टिकाऊ खेती, इंटीग्रेटेड फार्मिंग के साथ ही कई अन्य बिंदुओं पर भी बात की.

केंद्रीय कृषि मंत्री ने किसान इंडिया को बताया बीज संरक्षण का प्लान

मध्य प्रदेश के रायसेन में राष्ट्रीय कृषि मेले के दूसरे दिन केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ‘किसान इंडिया’ के उन्नत बीजों की उपलब्धता और पारंपरिक बीजों को बचाए रखने और उनके संरक्षण पर पूछे गए सवाल पर केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि सबसे बड़ी बात बीजों की उपलब्धता की है. खेती की पैदावार बढ़ाने के लिए अच्छे बीजों की जरूरत बहुत अधिक है. अगर अच्छे बीज नहीं हैं तो पैदावार ज्यादा कैसे होगी. स्थानीय स्तर पर अच्छे बीज तैयार कर सकें और गांव में ही अच्छे बीजों को मल्टीप्लाई कर सकें, इसके लिए बीज ग्राम की स्थापना की जा रही है. उन्होंने कहा कि पारंपरिक बीजों के संरक्षण के सवाल पर उन्होंने कहा कि इनके संरक्षण के लिए बीज ग्राम बनाए जा रहे हैं, जहां नई किस्मों के साथ ही पुरानी किस्मों के बीजों की उपलब्धता रहेगी.

हर ब्लॉक में बीज ग्राम बनाकर 20 फीसदी उपज बढ़ाने का टारगेट

उन्होंने किसान इंडिया के सवाल पर कहा कि हर ब्लॉक में बीज ग्राम बनेंगे, ताकि किसान बेहतर बीज हासिल कर सकें और उन्होंने 20 फीसदी तक उत्पादन बढ़ने की उम्मीद जताई है. केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि उत्पादन बढ़ाने के लिए अच्छा बीज सबसे महत्वपूर्ण आधार है. विभिन्न फसलों, फल और सब्जियों के साथ-साथ नई संभावनाओं वाली खेती जैसे ड्रैगन फ्रूट, एवोकाडो और ब्लूबेरी को भी रोडमैप में शामिल किया गया है. इन नई फसलों के बारे में किसानों को प्रशिक्षण दिया जाएगा. केंद्रीय मंत्री ने कहा कि यह पहल केवल महोत्सव तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि किसानों को लगातार मार्गदर्शन और प्रशिक्षण दिया जाएगा, ताकि वे नई तकनीकों और फसलों को अपनाकर लाभ कमा सकें.

ICAR की मदद से हर ब्लॉक में बीज ग्राम बनेंगे

उन्होंने कहा कि हर ब्लॉक में कुछ गांवों को ‘बीज ग्राम’ के रूप में विकसित किया जाए, जहां उच्च गुणवत्ता वाले बीजों का उत्पादन किया जा सके. आईसीएआर इस दिशा में पूरी मदद करेगा और ब्रीडर सीड उपलब्ध कराएगा. शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि यदि प्रत्येक ब्लॉक में लगभग 10 गांवों को बीज ग्राम बनाकर किसानों को वहीं से अच्छे बीज उपलब्ध कराए जाएं, तो इससे उत्पादन में करीब 20 फीसदी तक वृद्धि संभव है. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि बीज ग्राम विकसित करने के लिए केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं का उपयोग किया जाएगा. कृषि मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि इस योजना के तहत आवश्यक कार्ययोजना तैयार कर जल्द से जल्द इसे जमीन पर लागू किया जाए, ताकि किसानों को बेहतर बीज उपलब्ध हो सके और उनकी कमाई में बढ़ोत्तरी हो.

खाद सब्सिडी मंजूरी और बजट बढ़ोत्तरी

खाद उपलब्धता के सवाल पर केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि देश में पर्याप्त मात्रा में खाद मौजूद है. हालांकि, पश्चिम देशों में संघर्ष से खाद के कच्चे माल की आपूर्ति प्रभावित जरूर हुई है, लेकिन भारत ने अपने कूटनीतिक रिश्तों के जरिए जरूरी वस्तुएं हासिल कर ली हैं. उन्होंने कहा कि बीते सप्ताह ही खाद सब्सिडी को मंजूरी दी गई है. इसके अलावा खाद के लिए जरूरी बजट को बढ़ाकर लगभग 41,533.81 करोड़ रुपये कर दिया है, जो खरीफ सीजन 2025 के बजटीय जरूरत से लगभग 4,317 करोड़ रुपये अधिक है. खरीफ सीजन 2025 का खाद बजट 37,216.15 करोड़ रुपये था.

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देश में भरपूर खाद का स्टॉक.

देश की खाद की मांग कितनी है और स्टॉक कितना है

केंद्रीय उर्वरक विभाग के अनुसार 18 मार्च 2026 तक देश में यूरिया का स्टॉक 439.87 लाख मीट्रिक टन मौजूद है. जबकि, यूरिया खाद की जरूरत किसान को 375.18 लाख मीट्रिक टन है. इस हिसाब से खपत की तुलना में स्टॉक में 65 लाख मीट्रिक टन यूरिया ज्यादा मौजूद है. डीएपी की बात करें तो इस खाद की मांग 109.39 लाख मीट्रिक टन है और स्टॉक में 120.41 लाख मीट्रिक टन मौजूद है. इस हिसाब से जरूरत से लगभग 11 लाख मीट्रिक टन खाद ज्यादा उपलब्ध है. इसी तरह एनपीकेएस खाद का स्टॉक 194.92 लाख मीट्रिक टन है, जबकि मांग इससे 40 लाख मीट्रिक टन कम है. इसी तरह एमओपी भी मांग के अनुरूप 3 लाख मीट्रिक टन अधिक स्टॉक में मौजूद है.

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Published: 12 Apr, 2026 | 06:36 PM
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