Uttar Pradesh Beej Park News: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में सीड पार्क बनाने की मंजूरी मई 2025 में कैबिनेट दे चुकी है. अब इसके लिए 50.84 करोड़ की पहली किस्त भी जारी कर दी गई है. सीड पार्क को स्थापित करने का कार्य तेज गति से चल रहा है. राज्य के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने कहा कि राज्य के पहले बीज पार्क के निर्माण के साथ ही सरकार उत्तर प्रदेश को बीजों के मामले में आत्मनिर्भर बनाने जा रही है. इसके साथ ही किसानों को उन्नत किस्मों के हाइब्रिड और जलवायु अनुकूल बीजों की मुफ्त उपलब्धता बढ़ने जा रही है.
पहली किस्त के रूप में 50.84 करोड़ जारी
उत्तर प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि राज्य कैबिनेट ने मई महीने में राज्य में पहले आधुनिक सीड पार्क की स्थापना को मंजूरी दे दी थी. भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के नाम पर बन रहे इस सीड पार्क का काम तेज गति से चल रहा है. उन्होंने कहा कि लखनऊ में पहले जमीन चिह्नित करने का काम पूरा किया जा चुका है और अब इसके लिए पहली किस्त के रूप में 50.84 करोड़ रुपये जारी कर दिए गए हैं.
बीज पार्क के लिए 251 करोड़ खर्च किए जाएंगे
कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने कहा कि भारत रत्न चौधरी चरण सिंह सीड पार्क की स्थापना में तेजी लाने के लिए 50.84 करोड़ रुपये की प्रथम किस्त जारी की जा चुकी है. सीड पार्क पर कुल 251 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे. इसमें बिल्डिंग निर्माण के साथ ही बीज प्रोडक्शन लैब और बीजों को हाइब्रिड करने के लिए खेती योग्य जमीन भी अधिग्रहीत की गई है. उन्होंने कहा कि प्रदेश को बीज उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा.
सीड पार्क को 130 एकड़ जमीन अलॉट
कृषि मंत्री ने कहा कि इस सीड पार्क को लखनऊ में 130.63 एकड़ जमीन पर स्थापित किया जाएगा. उन्होंने कहा कि इसके निर्माण के लिए 251.70 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे. इसका उद्देश्य प्रदेश में उन्नत बीज उत्पादन को प्रोत्साहन देना है. बीज पार्क के बनने से किसानों को फसलों की अलग-अलग किस्मों के उन्नत बीज पाना आसान हो जाएगा. स्थानीय स्तर पर बीजों के उत्पादन होने से किसानों को सस्ती दर पर उन्नत किस्म के बीज मिल सकेंगे.
गेहूं-धान के साथ इन फसलों के बीज विकसित होंगे
सीड पार्क में कई प्रकार के बीजों का उत्पादन और प्रोसेसिंग की जाएगी, जिसमें प्रमुख रूप से गेहूं, धान, दलहन, तिलहन और सब्जियों के उन्नत किस्म के बीज शामिल होंगे. इसके अलावा हाइब्रिड बीज, उन्नत रोपण सामग्री और नई कृषि तकनीकों से विकसित किस्मों पर भी काम किया जाएगा, ताकि अलग-अलग जलवायु और मिट्टी के अनुसार किसानों को बेहतर विकल्प मिल सकें और फसल की उत्पादकता में सुधार हो.