Urea Production: ईरान-इजराइल युद्ध के बीच केंद्र सरकार ने उर्वरक उत्पादन के लिए प्राकृतिक गैस की आपूर्ति बढ़ा दी है. ईपीएमसी(Empowered Pool Management Committee) के जरिए अंतरराष्ट्रीय बाजार से स्पॉट खरीद कर 7.31 MMSCMD अतिरिक्त गैस हासिल की गई है. पहले जहां यूरिया प्लांट्स को करीब 32 MMSCMD गैस मिल रही थी, अब यह बढ़कर 39.31 MMSCMD हो गई है. इसका सीधा असर उत्पादन पर पड़ा है और देश में यूरिया उत्पादन 54,500 मीट्रिक टन से बढ़कर लगभग 67,000 मीट्रिक टन प्रतिदिन हो गया है. इससे किसानों को समय पर खाद मिलना आसान होगा.
दरअसल ईरान-इजराइल युद्ध के कारण देशभर में डर का माहौल बन गया था, जिसका असर आम लोगों की जिंदगी पर साफ दिखाई दिया. खेतों से लेकर रसोई तक हर जगह इसका प्रभाव महसूस किया गया. युद्ध की वजह से गैस सप्लाई प्रभावित हुई, जिससे भारत में उर्वरक उत्पादन पर असर पड़ने का खतरा था. इसका सीधा नुकसान किसानों को होता और यूरिया की कमी हो सकती थी. लेकिन इस मुश्किल समय में भारत सरकार ने नई रणनीति अपनाकर स्थिति को संभाल लिया. गैस की अतिरिक्त आपूर्ति सुनिश्चित की गई, जिससे देश में यूरिया उत्पादन में लगभग 23 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है. इससे किसानों को बड़ी राहत मिली है.
समय पर ग्लोबल टेंडर से मजबूत हुई तैयारी

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक्स पर जानकारी दी कि केंद्र सरकार ने समय रहते ग्लोबल टेंडर जारी किए, जिन पर अच्छी प्रतिक्रिया मिली है. उन्होंने कहा कि खरीफ 2026 के लिए देश में उर्वरकों का पर्याप्त भंडार मौजूद है और सरकार पूरी तरह तैयार है. उम्मीद है कि मार्च के अंत तक विभिन्न देशों से अधिकांश ऑर्डर भारत पहुंच जाएंगे, जिससे किसी तरह की कमी नहीं होगी.
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विदेशों से खरीद बढ़ाकर सुनिश्चित की सप्लाई
केंद्र सरकार ने केवल घरेलू उत्पादन पर निर्भर रहने के बजाय विदेशों से भी उर्वरक खरीदने की रणनीति अपनाई है. इसके तहत अलग-अलग देशों से लगातार संपर्क किया जा रहा है और ग्लोबल टेंडर के जरिए खाद की सप्लाई बढ़ाई जा रही है. इसका फायदा यह होगा कि अंतरराष्ट्रीय हालात चाहे जैसे भी हों, भारत में किसानों को खाद की कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा.
देश में उर्वरकों का रिकॉर्ड भंडार तैयार
सरकार ने इस साल पहले से ज्यादा उर्वरक का स्टॉक जमा किया है. पिछले साल जहां कुल भंडार 138.79 LMT था, वहीं अब यह बढ़कर 180.04 LMT हो गया है. खास बात यह है कि डीएपी के स्टॉक में लगभग दोगुनी बढ़ोतरी हुई है, जो किसानों के लिए बड़ी राहत की बात है.
उर्वरकों का ताजा भंडार (LMT में)

गैस सप्लाई बढ़ने से यूरिया उत्पादन और स्टॉक मजबूत हुआ.
कूटनीतिक प्रयासों से किसानों को सुरक्षा
सरकार ने उर्वरक सप्लाई को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय रणनीति अपनाई है. अलग-अलग देशों से बातचीत कर समय पर खरीद सुनिश्चित की जा रही है. अधिकारियों का कहना है कि खरीफ 2026 के लिए देश पूरी तरह तैयार है और किसानों को किसी तरह की परेशानी नहीं होगी. यह कदम न सिर्फ फसल को सुरक्षित रखेगा, बल्कि उत्पादन बढ़ाने में भी मदद करेगा.