अपनी मेढ़ अपना पेड़ मॉडल से शुरू हुई सिंदूर की खेती, 9 लाख रुपये कमा रहीं महिलाएं

Sindoor Plant: मध्य प्रदेश में सिंदूर की खेती करके महिलाओं ने अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में कामयाबी हासिल की है. जर्मन कंपनी की ओर से फूलों की खरीद करने से स्थानीय महिला किसानों को उम्मीद से अधिक भाव मिल रहा है.

रिजवान नूर खान
नोएडा | Updated On: 17 Apr, 2026 | 03:45 PM

मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में सिंदूर यानी कुसुम की खेती अपनी मेढ़ अपना पेड़ मॉडल के तहत महिलाएं कर रही हैं. यह फसल महिला किसानों की कमाई बढ़ाने के चलते ‘लाल सोना’ कही जा रही है. महिलाएं स्वयं सहायता समूह के जरिए जुड़कर सिंदूर की खेती कर रही हैं और इसमें उन्हें सरकारी सहायता दी जा रही है. जबकि, उत्पादन खरीद के लिए जर्मनी की कंपनी से समझौता किया गया है. वहीं, खेती का प्रयोग सफल होने के बाद अब 2 लाख सिंदूर के पौधों की रोपाई शुरू की जा रही है.

‘लाल सोना’ की खेती से बढ़ रही कमाई

खंडवा जिले की निमाड़ भूमि से अब एक नई खेती क्रांति की शुरुआत हो रही है, जहां ‘लाल सोना’ यानी सिंदूर की खेती किसानों की आय का नया जरिया बन गई है. पंधाना ब्लॉक के ग्राम जलकुआं में महिला स्व सहायता समूहों के जरिए संचालित कृषि नमामि फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी ने सिंदूर की खेती का एक मॉडल विकसित किया है, जिसे अपनी मेढ़ अपना पेड़ की अवधारणा के तहत खेतों की सीमाओं पर सिंदूर के पौधे लगाए जा रहे हैं. इससे मुख्य फसल सुरक्षित रहती है और किसानों को अतिरिक्त कमाई का मौका मिल रहा है.

जर्मन कंपनी कर रही उपज खरीद

जर्मनी की एक कंपनी के साथ हुए अनुबंध के तहत यहां उत्पादित सिंदूर का उपयोग फूड कलर और औद्योगिक उत्पादों में किया जाएगा. इससे किसानों को बाजार और उचित कीमत की गारंटी मिल रही है. जर्मनी की एक कंपनी ने सिंदूर के लिए इन किसानों को खंडवा जिला पंचायत विभाग की ओर से कांट्रेक्ट स्व सहायता समूह की महिलाओं को दिलवाया है. जर्मन कंपनी कुसुम के फूलों से सिंदूर बनाने के साथ ही फूड कलर बनाने में इनका इस्तेमाल करेगी.

सिंदूर की खेती के लिए 2 लाख पौधों की रोपाई

खंडवा जिला पंचायत के सीईओ डॉक्टर नागार्जुन बी गौड़ा ने मीडिया से कहा कि पंधाना ब्लाक के ग्राम जलकुआं स्थित महिला स्वयं सहायता समूहों की ओर से संचालित कृषि नमामि संस्थान सिंदूर की फार्मिंग करने वाली मध्य प्रदेश की पहली कंपनी होगी. जलकुआं के पास सिंदूर की फसल का प्रयोग सफल रहा है. अब महिला किसानों के जरिए इलाके में सिंदूर के दो लाख पौधे रोपने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है.

1.50 लाख की लागत में 9 लाख रुपये की कमाई

सिंदूर यानी कुसुम के फूलों की खेती करने में एक एकड़ की फसल के लिए मात्र 1.50 लाख रुपये की लागत आती है. स्थानीय महिलाएं इतनी लागत लगाकर सालभर में 9 लाख रुपये से अधिक की कमाई कर पा रही हैं. महिला किसानों के स्वयं सहायता समूह कृषि नमामि संस्थान महिला और पुरुष किसानों को खेती के लिए प्रोत्साहित कर रहा है.

safflower farming in khandwa madhya pradesh

सिंदूर के खेत में महिलाएं (ऊपर की तस्वीर). खंडवा जिला पंचायत के सीईओ डॉक्टर नागार्जुन बी गौड़ा (नीचे तस्वीर).

सिंदूर पौधा से सही उत्पादन मिल रहा

खंडवा जिला पंचायत के सीईओ डॉक्टर नागार्जुन बी गौड़ा ने मीडिया को बताया कि जितना सिंदूर एक पौधा से आना चाहिए उतना आ रहा है. इसके बाद ही जिले में इसकी खेती बड़े स्तर पर करने का निर्णय लिया गया है. सिंदूर की डिमांड पूरे विश्व में है, भारत में भी इसका आयात अन्य देशों से होता है. जर्मन कंपनी के जुड़ने से किसानों को अच्छा भाव मिलने का रास्ता साफ हुआ है, जिसकी वजह से किसानों में उत्साह बढ़ा है.

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Published: 17 Apr, 2026 | 03:43 PM
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