महंगी खाद छोड़िए…1 देसी नुस्खा अपनाइए, कम खर्च में फसल को मिलेगा जबरदस्त पोषण

रासायनिक खादों की बढ़ती लागत के बीच किसान अब एक सस्ते और प्रभावी जैविक विकल्प की ओर बढ़ रहे हैं. ये देसी लिक्विड खाद फसलों को जरूरी पोषण देने, मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने और उत्पादन बेहतर करने में मदद करती है. खास बात ये है कि इसे घर या खेत पर आसानी से तैयार किया जा सकता है.

नोएडा | Updated On: 16 Aug, 2026 | 08:12 PM

Liquid Fertilizer: देशभर में किसान अब रासायनिक खादों पर निर्भरता कम करके जैविक खेती की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं. इसी क्रम में वर्मीवॉश एक प्रभावी और कम लागत वाला विकल्प बनकर उभर रहा है. ये केंचुओं की सहायता से तैयार की जाने वाली तरल जैविक खाद है, जो फसलों को आवश्यक पोषक तत्व उपलब्ध कराती है. कृषि विशेषज्ञ प्रमोद कुमार के अनुसार, वर्मीवॉश का नियमित उपयोग फसलों की वृद्धि को बढ़ावा देता है और मिट्टी की उर्वरता को लंबे समय तक बनाए रखने में मदद करता है.

क्या है वर्मीवॉश और क्यों है खास?

कृषि विशेषज्ञ प्रमोद कुमार के अनुसार, वर्मीवॉश एक हल्के भूरे रंग का तरल पदार्थ होता है, जो वर्मी कम्पोस्ट तैयार करने की प्रक्रिया के दौरान प्राप्त होता है. इसमें नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश, सूक्ष्म पोषक तत्व और लाभकारी सूक्ष्म जीव पाए जाते हैं. यही कारण है कि ये पौधों के लिए प्राकृतिक  टॉनिक की तरह काम करता है. इसके उपयोग से पौधों की वृद्धि बेहतर होती है और फसलें अधिक स्वस्थ एवं मजबूत बनती हैं. जैविक खेती करने वाले किसान इसे पोषण प्रबंधन के लिए बड़े पैमाने पर अपना रहे हैं.

घर पर ऐसे तैयार करें वर्मीवॉश

कृषि विशेषज्ञ प्रमोद कुमार बताते हैं कि वर्मीवॉश तैयार करने के लिए किसी ड्रम, प्लास्टिक टंकी या मिट्टी के बड़े बर्तन का उपयोग किया जा सकता है. सबसे पहले बर्तन के निचले हिस्से में एक छोटा छेद कर उसमें टोटी लगा दें, ताकि तैयार तरल खाद आसानी से निकाली जा सके. इसके बाद सबसे नीचे कंकड़ और रेत की परत बिछाएं. फिर गोबर, सूखे पत्ते, फसल अवशेष और अन्य जैविक कचरे  की परत डालें.

अब इसमें केंचुए छोड़कर पर्याप्त नमी बनाए रखें. नमी बनाए रखने के लिए ऊपर एक पानी का पात्र रखा जा सकता है, जिसमें छोटे-छोटे छेद हों ताकि पानी धीरे-धीरे नीचे टपकता रहे. लगभग 30 से 45 दिनों के भीतर नीचे एकत्र होने वाला तरल पदार्थ वर्मीवॉश के रूप में प्राप्त होने लगता है. इसे टोटी की सहायता से निकालकर सुरक्षित रूप से संग्रहित किया जा सकता है.

फसलों को मिलते हैं कई फायदे

कृषि विशेषज्ञ प्रमोद कुमार के अनुसार, वर्मीवॉश पौधों को संतुलित पोषण प्रदान  करता है, जिससे उनकी जड़ें मजबूत होती हैं और विकास तेजी से होता है. इसके नियमित उपयोग से पौधों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है तथा फसल की गुणवत्ता में भी सुधार देखने को मिलता है. यह मिट्टी में लाभकारी सूक्ष्म जीवों की संख्या बढ़ाकर उसकी उर्वरता बनाए रखने में मदद करता है.

वर्मीवॉश का उपयोग हमेशा पानी में मिलाकर करना चाहिए. 1 लीटर वर्मीवॉश को 8 से 10 लीटर पानी में मिलाकर फसलों पर छिड़काव  किया जाता है. सुबह या शाम के समय इसका प्रयोग अधिक प्रभावी माना जाता है. विशेषज्ञों का कहना है कि इस देसी लिक्विड खाद के इस्तेमाल से रासायनिक खादों की जरूरत कम होती है, जिससे खेती की लागत घटती है और किसानों को बेहतर उत्पादन प्राप्त करने में मदद मिलती है.

Published: 16 Aug, 2026 | 11:30 PM

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