SVP एग्री यूनिवर्सिटी ने गेहूं की नई किस्म विकसित की, 109 दिन में 64.8 क्विंटल तक उपज देने में सक्षम
गेहूं किसानों के लिए नई किस्म सरदार समृद्धि उम्मीद की नई किरण बनकर आई है. सिर्फ 109 दिनों में तैयार होने वाली यह किस्म देर से बुवाई के लिए खास है. औसत 45 क्विंटल और अनुकूल परिस्थितियों में 64.8 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उपज मिल सकती है.
गेहूं की खेती करने वाले किसानों के लिए अच्छी खबर सामने आई है. सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय (SVP Agriculture University) ने गेहूं की नई किस्म एसबीडब्ल्यू 2202 (सरदार समृद्धि) विकसित की है, जिसे किसानों के लिए जारी करने की मंजूरी मिल गई है. खास बात यह है कि यह किस्म देर से बुवाई और सिंचाई वाली जमीन के लिए तैयार की गई है. कम अवधि में पकने के साथ बेहतर उपज और रतुआ रोगों के प्रति मजबूत प्रतिरोध इसे किसानों के लिए उपयोगी विकल्प बना सकता है.
पहली बार विश्वविद्यालय ने विकसित की गेहूं की किस्म
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, जयपुर में 18 से 20 अगस्त के बीच आयोजित 65वीं अखिल भारतीय गेहूं एवं जौ शोधकर्ताओं की वार्षिक कार्यशाला में एसबीडब्ल्यू 2202 को आधिकारिक पहचान मिली. भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) की ओर से वर्ष 2023-24 से इस किस्म का परीक्षण किया जा रहा था. परीक्षण के दौरान नई किस्म ने उपज और रोग प्रतिरोधक क्षमता के मामले में पुरानी और मानक किस्मों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया. यह विश्वविद्यालय द्वारा विकसित गेहूं की पहली ऐसी किस्म है, जिसे किसानों के लिए जारी करने की मंजूरी मिली है.
देर से बुवाई करने वाले किसानों के लिए खास
सरदार समृद्धि को मुख्य रूप से उत्तर-पूर्वी मैदानी क्षेत्रों की सिंचित भूमि में देर से बुवाई को ध्यान में रखकर विकसित किया गया है. इसकी औसत उपज करीब 45 क्विंटल प्रति हेक्टेयर बताई गई है. वहीं, अनुकूल परिस्थितियों और बेहतर कृषि प्रबंधन में इसकी अधिकतम उपज 64.8 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक पहुंच सकती है. ऐसे किसान जो किसी कारण से गेहूं की समय पर बुवाई नहीं कर पाते हैं, उनके लिए यह किस्म एक बेहतर विकल्प बन सकती है.
109 दिन में तैयार होगी फसल
सरदार समृद्धि की सबसे बड़ी खासियत इसका कम अवधि में तैयार होना है. यह किस्म करीब 109 दिनों में पककर तैयार हो जाती है. इसके पौधों की औसत ऊंचाई लगभग 100 सेंटीमीटर बताई गई है. इसके अलावा इसमें गेहूं में होने वाले भूरे और पीले रतुआ रोग के प्रति अच्छी प्रतिरोधक क्षमता पाई गई है. रोगों का असर कम होने से किसानों को फसल सुरक्षा पर होने वाला खर्च भी कम करने में मदद मिल सकती है.
जल्द किसानों को मिलेगा बीज
सरदार समृद्धि के दाने आकर्षक होने के साथ अच्छी प्रोटीन मात्रा वाले बताए गए हैं. इसके गुणों के कारण इससे रोटी और बिस्किट दोनों तैयार किए जा सकते हैं. यानी किसान इसे घरेलू इस्तेमाल के साथ बाजार की जरूरतों को ध्यान में रखकर भी उगा सकते हैं. नई किस्म के आधिकारिक रिलीज और नोटिफिकेशन की प्रक्रिया जल्द पूरी होने की उम्मीद है. इसके बाद रबी सीजन 2027-28 से किसानों को इसका बीज उपलब्ध कराया जा सकता है. यदि यह किस्म बड़े स्तर पर किसानों तक पहुंचती है, तो देर से बुवाई वाले क्षेत्रों में गेहूं उत्पादन और किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिल सकती है.