25 फीसदी महंगा हुआ कपास, टेक्सटाइल उद्योग की टेंशन देख तमिलनाडु के CM ने PM से मांगी राहत

मुख्यमंत्री का कहना है कि देश में कपास उत्पादन कम होने और ट्रेडिंग गतिविधियां बढ़ने के कारण बाजार में कच्चे माल की कमी महसूस हो रही है. ऐसी स्थिति में उद्योग की जरूरत पूरी करने के लिए आयात जरूरी हो गया है. लेकिन फिलहाल कपास आयात पर 11 प्रतिशत शुल्क लगाया जाता है.

Kisan India
नई दिल्ली | Published: 15 May, 2026 | 09:07 AM

Tamil Nadu textile industry: तमिलनाडु में कपास की बढ़ती कीमतों ने टेक्सटाइल और गारमेंट उद्योग की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. इसी को लेकर राज्य के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर कपास पर लगने वाली आयात शुल्क को हटाने की मांग की है. मुख्यमंत्री का कहना है कि अगर जल्द राहत नहीं मिली, तो कपड़ा उद्योग पर बड़ा असर पड़ सकता है और लाखों लोगों के रोजगार पर भी खतरा बढ़ सकता है.

दो महीने में कपास के दाम में भारी उछाल

मुख्यमंत्री ने अपने पत्र में कहा कि पिछले दो महीनों में कपास की कीमतों में करीब 25 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हुई है. पहले जहां कपास की कीमत लगभग 54,700 रुपये प्रति कैंडी थी, वहीं अब यह बढ़कर 67,700 रुपये प्रति कैंडी तक पहुंच गई है.

सिर्फ कपास ही नहीं, धागे यानी यार्न की कीमतों में भी तेजी देखने को मिली है. यार्न का भाव 301 रुपये प्रति किलो से बढ़कर 330 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है. उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि लगातार बढ़ती लागत के कारण छोटे और मध्यम स्तर की यूनिट्स पर सबसे ज्यादा दबाव बन रहा है.

तमिलनाडु के लिए क्यों अहम है टेक्सटाइल सेक्टर?

तमिलनाडु देश का सबसे बड़ा टेक्सटाइल और अपैरल एक्सपोर्ट करने वाला राज्य माना जाता है. यहां लाखों लोग सीधे और अप्रत्यक्ष रूप से इस उद्योग से जुड़े हुए हैं. खासकर ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों की महिलाओं के लिए यह सेक्टर रोजगार का बड़ा माध्यम है. विशेषज्ञों का कहना है कि अगर कच्चे माल की कीमतें लगातार बढ़ती रहीं, तो उत्पादन लागत और ज्यादा बढ़ेगी. इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धा कमजोर हो सकती है.

आयात शुल्क हटाने की मांग क्यों उठी?

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मुख्यमंत्री का कहना है कि देश में कपास उत्पादन कम होने और ट्रेडिंग गतिविधियां बढ़ने के कारण बाजार में कच्चे माल की कमी महसूस हो रही है. ऐसी स्थिति में उद्योग की जरूरत पूरी करने के लिए आयात जरूरी हो गया है. लेकिन फिलहाल कपास आयात पर 11 प्रतिशत शुल्क लगाया जाता है. मुख्यमंत्री ने मांग की है कि इस ड्यूटी को 11 प्रतिशत से घटाकर शून्य किया जाए, ताकि उद्योग को सस्ती दर पर कपास मिल सके. उनका मानना है कि ड्यूटी हटने से टेक्सटाइल कंपनियों को निर्यात ऑर्डर पूरे करने में मदद मिलेगी और भारत वैश्विक बाजार में अपनी प्रतिस्पर्धा बनाए रख सकेगा.

रोजगार पर भी मंडरा रहा खतरा

टेक्सटाइल उद्योग को कृषि के बाद देश में सबसे ज्यादा रोजगार देने वाले क्षेत्रों में गिना जाता है. इसलिए इस सेक्टर में किसी भी तरह की मंदी का असर सीधे लाखों परिवारों पर पड़ सकता है.

उद्योग से जुड़े संगठनों का कहना है कि अगर कच्चे माल की लागत लगातार बढ़ती रही, तो कई यूनिट्स उत्पादन कम करने को मजबूर हो सकती हैं. इससे रोजगार के अवसर भी प्रभावित हो सकते हैं.

निर्यात बढ़ाने पर जोर

मुख्यमंत्री ने अपने पत्र में यह भी कहा कि सरकार को टेक्सटाइल वैल्यू चेन को मजबूत बनाए रखने के लिए जरूरी कदम उठाने चाहिए. उनका मानना है कि अगर कपास आयात सस्ता होगा, तो उद्योग को राहत मिलेगी, निर्यात बढ़ेगा और रोजगार सुरक्षित रहेगा.

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