Tip Of The Day: फरवरी में एक गलती और 30% गेहूं हो जाएगा चौपट! जान लें फसल गिरने से बचाने के 5 पक्के उपाय
Gehun Ki Kheti: फरवरी का महीना गेहूं की फसल के लिए बेहद नाजुक होता है, क्योंकि इसी समय दाना भरने की प्रक्रिया शुरू होती है. तेज हवाएं, गलत समय पर सिंचाई और असंतुलित खाद से फसल गिरने का खतरा बढ़ जाता है, जिससे 20-30% तक नुकसान हो सकता है. ऐसे में इस खबर में किसानों के लिए गेहूं को गिरने से बचाने के 5 आसान लेकिन बेहद जरूरी उपाय बताए गए हैं, जो पैदावार और दानों की क्वालिटी दोनों को बेहतर बना सकते हैं.
Wheat Farming Tips: फरवरी का महीना गेहूं की फसल के लिए सबसे ज्यादा संवेदनशील माना जाता है. इस समय खेतों में गेहूं की बालियां निकल रही होती हैं या दाने भरने की प्रक्रिया, जिसे दूधिया अवस्था कहा जाता है, शुरू हो जाती है. यही वह दौर होता है जब थोड़ी सी लापरवाही पूरी मेहनत पर पानी फेर सकती है. फरवरी के अंत तक तापमान में अचानक बढ़ोतरी, तेज हवाएं और कभी-कभी बेमौसम बारिश गेहूं की फसल को गिरा सकती हैं. अगर पौधे खेत में गिर जाएं तो पैदावार में 20 से 30 प्रतिशत तक का नुकसान हो सकता है. इसलिए जरूरी है कि किसान समय रहते सही कदम उठाएं.
सिंचाई का सही समय और तरीका अपनाएं
फरवरी के अंत में हवाएं तेज हो जाती हैं. अगर इस दौरान खेत में भारी सिंचाई कर दी जाए और उसी समय तेज हवा चल जाए, तो गीली मिट्टी के कारण पौधे जड़ से उखड़कर गिर सकते हैं. इसलिए इस समय हल्की सिंचाई करना ही बेहतर होता है. कोशिश करें कि सिंचाई शाम के समय या तब करें जब हवा की गति कम हो. इस अवस्था में स्प्रिंकलर सबसे सुरक्षित मानी जाती है, क्योंकि इससे मिट्टी ज्यादा गीली नहीं होती और पौधों पर दबाव भी कम पड़ता है.
नाइट्रोजन का अधिक प्रयोग न करें
दाना भरने की अवस्था में ज्यादा यूरिया डालना नुकसानदायक साबित हो सकता है. अधिक नाइट्रोजन से पौधा लंबा तो हो जाता है, लेकिन तना कमजोर रह जाता है, जिससे हवा लगते ही फसल गिरने का खतरा बढ़ जाता है. इस समय 00:52:34 (फॉस्फोरस-पोटाश मिश्रण) या 00:00:50 (पोटाश) का छिड़काव ज्यादा फायदेमंद होता है. पोटाश तने को मजबूत बनाता है और दानों को वजनदार करता है, जिससे पौधे तेज हवाओं का सामना कर पाते हैं.
बोरॉन का छिड़काव जरूर करें
दाना बनते समय अगर बोरॉन की कमी हो जाए तो बालियां सूख सकती हैं या दाने छोटे और कमजोर रह जाते हैं. बोरॉन परागण में मदद करता है और पौधों की कोशिकाओं को लचीला बनाता है. इससे दाने भरपूर, चमकीले और मजबूत बनते हैं. सही मात्रा में बोरॉन का छिड़काव फसल की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों बढ़ाता है.
फसल की ऊंचाई पर रखें नियंत्रण
अगर आपने गेहूं की ऐसी किस्म बोई है जो ज्यादा लंबी होती है, तो पौधों के गिरने का खतरा और बढ़ जाता है. ऐसे में कृषि विशेषज्ञों की सलाह लेकर प्लांट ग्रोथ रेगुलेटर (PGR) का उपयोग किया जा सकता है. यह पौधे की बेवजह बढ़ने वाली लंबाई को रोकता है और उसकी ताकत बालियों और दानों की ओर मोड़ देता है. इससे तने का निचला हिस्सा मोटा और मजबूत बनता है.
मौसम की जानकारी पर रखें नजर
आजकल मोबाइल ऐप्स और मौसम अलर्ट के जरिए पहले से जानकारी मिल जाती है. अगर अगले दो-तीन दिनों में तेज हवा या बारिश की चेतावनी हो, तो सिंचाई तुरंत रोक दें. अक्सर फसल तभी गिरती है जब मिट्टी ज्यादा गीली होती है और हवा का दबाव बढ़ जाता है.
फरवरी में थोड़ी सी समझदारी और सही तकनीक अपनाकर गेहूं की फसल को गिरने से बचाया जा सकता है. सही समय पर सिंचाई, संतुलित खाद, सूक्ष्म पोषक तत्वों का उपयोग और मौसम पर नजर रखकर किसान न सिर्फ नुकसान से बच सकते हैं, बल्कि बेहतर और भरपूर पैदावार भी हासिल कर सकते हैं.