यूपी में होगी फ्लोरिडा के ‘सेंसेशन’ आम की खेती, 1.5 गुना ज्यादा पैदावार..12 दिनों की है शेल्फ लाइफ

प्रयागराज मंडल में करीब 2,400 हेक्टेयर क्षेत्र में आम की खेती होती है, जिसमें प्रतापगढ़ का मानिकपुर इलाका दशहरी और चौसा आम  के लिए खास तौर पर जाना जाता है. यह क्षेत्र हर साल लगभग 1.5 लाख टन आम पैदा करता है, जिनमें से करीब 50,000 टन आम हाल के वर्षों में संयुक्त अरब अमीरात और ओमान जैसे देशों में निर्यात किए जाते हैं.

Kisan India
नोएडा | Updated On: 28 Mar, 2026 | 08:48 AM

Mango cultivation: उत्तर प्रदेश को वैश्विक फल बाजार में मजबूत बनाने के लिए राज्य के बागवानी विभाग ने प्रयागराज मंडल में फ्लोरिडा की ‘सेंसेशन’ आम की किस्म लगाना शुरू किया है. यह कदम पारंपरिक किस्मों जैसे दशहरी, चौसा और लंगड़ा से आगे बढ़ने की दिशा में उठाया गया है. प्रयागराज के खुसरो बाग स्थित बागवानी प्रयोग एवं प्रशिक्षण केंद्र इस पहल का नेतृत्व कर रहा है. केंद्र में ‘सेंसेशन’ किस्म के मदर प्लांट लगा दिए गए हैं और उनकी देखभाल की जा रही है. आने वाले एक साल में इन पौधों से नई पौध तैयार कर किसानों को दी जाएगी, ताकि क्षेत्र में आम की खेती को ज्यादा विविध और आधुनिक बनाया जा सके.

अमेरिका के साउथ फ्लोरिडा में विकसित ‘सेंसेशन’ आम अपनी खास प्लम-लाल से बैंगनी रंगत और हल्की मिठास के लिए जाना जाता है. भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI), पूसा के वैज्ञानिकों ने इसे भारतीय मौसम के अनुसार ढालते हुए इसकी 22 किस्में विकसित की हैं, जिनमें से 16 इस समय प्रयागराज केंद्र में उगाई जा रही हैं. अधिकारियों के अनुसार, इस पहल का मकसद देसी आम की किस्मों  की कुछ समस्याओं को दूर करना है, जैसे हर साल नियमित फल न आना और तोड़ाई के बाद कम समय तक टिक पाना, जिससे इन्हें दूर-दराज देशों में भेजना मुश्किल होता है. इसके मुकाबले ‘सेंसेशन’ आम हर साल बेहतर और नियमित पैदावार देता है और 12-15 दिन तक ताजा रह सकता है, इसलिए यह अंतरराष्ट्रीय बाजार के लिए ज्यादा उपयुक्त माना जा रहा है.

पारंपरिक आमों की तुलना में 1.5 गुना ज्यादा पैदावार

हिन्दुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया भर में, खासकर यूरोप में, अब ऐसे आमों की मांग  बढ़ रही है जो दिखने में आकर्षक हों और अच्छी कीमत दिला सकें. ‘सेंसेशन’ आम अपनी चमकदार रंगत की वजह से इस मांग पर पूरी तरह खरा उतरता है. इसी किस्म का उपयोग करके अंबिका, मल्लिका, मनोहरी, दीप्तशिखा, अरुणिमा, प्रतिभा, पितांबरा और ललिमा जैसी लाल रंग वाली नई किस्में भी विकसित की गई हैं. ये किस्में हर साल फल देती हैं और इनकी पैदावार पारंपरिक आमों की तुलना में लगभग 1.5 गुना ज्यादा होती है. साथ ही, पकने के बाद भी इनके फल 11-12 दिन तक अच्छे रहते हैं, जिससे इन्हें निर्यात करना आसान हो जाता है.

इन देशों में है ज्यादा डिमांड

दशहरी और चौसा जैसे आमों की तुलना में ये आम कम मीठे होते हैं. यही वजह है कि जापान, ऑस्ट्रेलिया और यूनाइटेड किंगडम जैसे देशों के लोगों को ये ज्यादा पसंद आते हैं. वहां के ग्राहक ऐसे फल चाहते हैं जो हल्की मिठास वाले हों, दिखने में सुंदर हों और ज्यादा दिनों तक खराब न हों.

1.5 लाख टन आम का होता है उत्पादन

प्रयागराज मंडल में करीब 2,400 हेक्टेयर क्षेत्र में आम की खेती होती है, जिसमें प्रतापगढ़ का मानिकपुर इलाका दशहरी और चौसा आम  के लिए खास तौर पर जाना जाता है. यह क्षेत्र हर साल लगभग 1.5 लाख टन आम पैदा करता है, जिनमें से करीब 50,000 टन आम हाल के वर्षों में संयुक्त अरब अमीरात और ओमान जैसे देशों में निर्यात किए जाते हैं. अब ‘सेंसेशन’ किस्म को शामिल करके बागवानी विभाग का लक्ष्य निर्यात को और बढ़ाना, किसानों की आमदनी में सुधार करना और उत्तर प्रदेश को वैश्विक आम बाजार में ज्यादा मजबूत बनाना है.

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Published: 28 Mar, 2026 | 08:47 AM
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