Maharashtra mango production: भारत में आम को फलों का राजा कहा जाता है और महाराष्ट्र के कोंकण क्षेत्र का हापुस आम (अल्फांसो) दुनिया भर में अपनी खास खुशबू और स्वाद के लिए मशहूर है. लेकिन इस साल हापुस आम के शौकीनों के लिए निराशाजनक खबर सामने आ रही है. मौसम में अचानक हो रहे बदलावों के कारण महाराष्ट्र के कोंकण इलाके में आम की पैदावार पर गंभीर असर पड़ा है. विशेषज्ञों का अनुमान है कि इस बार यहां 80 से 85 प्रतिशत तक फसल खराब हो सकती है.
हिन्दुस्तान टाइम्स की खबर के अनुसार, कोंकण क्षेत्र, जिसमें मुख्य रूप से रत्नागिरी और सिंधुदुर्ग जिले शामिल हैं, देश में हापुस आम का सबसे बड़ा उत्पादन केंद्र माना जाता है. यहां की जलवायु और मिट्टी इस खास किस्म के आम के लिए बेहद अनुकूल मानी जाती है. लेकिन इस बार मौसम की अनियमितता ने किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है.
ठंड, गर्मी और बादलों ने बिगाड़ी फसल
कृषि विभाग की एक रिपोर्ट के मुताबिक पिछले कुछ महीनों में मौसम का मिजाज बार-बार बदलता रहा. दिसंबर में आई असामान्य ठंड और कोल्ड वेव ने आम के पेड़ों में होने वाली परागण प्रक्रिया को प्रभावित कर दिया. इसके बाद कई दिनों तक छाए बादलों और अधिक नमी के कारण आम के फूल सही तरह से विकसित नहीं हो पाए.
आम की खेती में फूलों का सही समय पर आना और उनका सुरक्षित रहना बहुत जरूरी होता है. लेकिन इस बार फूल झड़ने और उनमें रोग लगने की घटनाएं ज्यादा देखी गईं. इसके चलते कई बागों में फल बनने की प्रक्रिया ही प्रभावित हो गई. यही वजह है कि इस साल उत्पादन में भारी गिरावट की आशंका जताई जा रही है.
सर्वे में सामने आई बड़ी गिरावट
रत्नागिरी और सिंधुदुर्ग जिलों में आम किसानों की शिकायतों के बाद राज्य कृषि विभाग और दापोली स्थित डॉ. बालासाहेब सावंत कोंकण कृषि विद्यापीठ के वैज्ञानिकों ने मिलकर एक सर्वे किया. इस सर्वे में पाया गया कि कई बागों में फूल आने के बावजूद फल नहीं बन पाए या बहुत कम मात्रा में बने हैं.
पिछले साल महाराष्ट्र में लगभग 5.19 लाख टन आम का उत्पादन हुआ था, जिसमें रत्नागिरी और सिंधुदुर्ग का बड़ा योगदान था. लेकिन इस बार हालात पूरी तरह बदलते दिखाई दे रहे हैं. कई किसानों का कहना है कि उनकी उपज पिछले साल की तुलना में बहुत कम रह जाएगी.
किसानों की आय पर पड़ेगा गहरा असर
कोंकण क्षेत्र के हजारों किसान हापुस आम की खेती पर ही निर्भर हैं. आम का सीजन उनके लिए साल की सबसे बड़ी कमाई का समय होता है. लेकिन इस बार उत्पादन में भारी गिरावट की संभावना ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है.
सिंधुदुर्ग के देवगढ़ क्षेत्र के एक किसान ने बताया कि पिछले साल उनके बाग से लगभग 9,000 बॉक्स आम निकले थे, जबकि इस साल मुश्किल से 1,500 बॉक्स ही मिलने की उम्मीद है. ऐसे में खेती पर किए गए खर्च को निकालना भी मुश्किल हो सकता है.
आम कारोबार की पूरी श्रृंखला पर असर
हापुस आम की मांग देश के साथ-साथ विदेशों में भी काफी ज्यादा रहती है. लेकिन अगर उत्पादन में इतनी बड़ी गिरावट आती है, तो इसका असर केवल किसानों तक सीमित नहीं रहेगा. इससे आम से जुड़े पूरे कारोबार पर प्रभाव पड़ेगा.
कोंकण क्षेत्र में आम की पैकिंग, प्रोसेसिंग, ट्रांसपोर्ट और निर्यात से जुड़ी कई इकाइयां काम करती हैं. रत्नागिरी और सिंधुदुर्ग में लगभग 60 से अधिक प्रोसेसिंग यूनिट हैं, जहां आम से पल्प और अन्य खाद्य उत्पाद बनाए जाते हैं. फसल कम होने से इन उद्योगों को भी नुकसान उठाना पड़ सकता है.
मुआवजे की मांग तेज
किसानों और किसान संगठनों का कहना है कि इस बार का संकट पिछले कई दशकों में सबसे बड़ा है. उनका मानना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण खेती पर पड़ने वाले असर को देखते हुए सरकार को किसानों की मदद करनी चाहिए. किसान नेताओं ने राज्य सरकार से मांग की है कि प्रभावित किसानों को प्रति हेक्टेयर कम से कम 5 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए, ताकि वे इस नुकसान से उबर सकें और अगली फसल के लिए तैयारी कर सकें.