पंजाब के बाद UP में गेहूं किसानों को बड़ी राहत, अब होगी तगड़ी कमाई.. सरकार ने लिया फैसला

सरकार के फैसले के मुताबिक, गेहूं में चमक कम होने (लस्टर लॉस) की स्वीकार्य सीमा बढ़ाकर 70 फीसदी कर दी गई है. वहीं सिकुड़े और टूटे दानों  की सीमा, जो पहले 6 फीसदी थी, अब बढ़ाकर 20 फीसदी कर दी गई है. इससे बारिश की वजह से गुणवत्ता खराब होने पर भी किसानों का गेहूं खरीदा जा सकेगा.

Kisan India
नोएडा | Updated On: 24 Apr, 2026 | 12:18 PM

Wheat Procurement: राजस्थान और पंजाब को गेहूं खरीद मानकों में ढील देने के बाद केंद्र सरकार ने उत्तर प्रदेश के किसानों को भी बड़ी राहत दी है. अब 70 फीसदी तक गेहूं की चमक कम होने के बावजूद भी खरीदी की जाएगी. दरअसल, बेमौसम बारिश से राज्य में गेहूं की फसल प्रभावित हुई है. इससे गेहूं की क्वालिटी पर असर पड़ा है. खासकर गेहूं की चमक चली गई है. यही वजह है कि सरकार ने किसानों को बड़ी राहत दी है. यानी रबी मार्केटिंग सीजन 2026-27 के लिए अब गेहूं की खरीद ढीले गुणवत्ता मानकों (रिलैक्स्ड नॉर्म्स) के तहत की जाएगी.

इसका मकसद किसानों को नुकसान से बचाना है, ताकि उन्हें मजबूरी में अपनी फसल कम कीमत पर न बेचनी पड़े. सरकार के फैसले के मुताबिक, गेहूं में चमक कम होने (लस्टर लॉस) की स्वीकार्य सीमा बढ़ाकर 70 फीसदी कर दी गई है. वहीं सिकुड़े और टूटे दानों  की सीमा, जो पहले 6 फीसदी थी, अब बढ़ाकर 20 फीसदी कर दी गई है. इससे बारिश की वजह से गुणवत्ता खराब होने पर भी किसानों का गेहूं खरीदा जा सकेगा. ऐसे गेहूं को सामान्य गेहूं से अलग रखा जाएगा और इसके लिए अलग से हिसाब-किताब भी रखा जाएगा.

किसानों को राहत मिलने की उम्मीद है

केंद्र सरकार ने यह भी साफ किया है कि अगर भंडारण के दौरान इस तरह के गेहूं की गुणवत्ता  और गिरती है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी राज्य सरकार की होगी. इसके अलावा, ऐसे स्टॉक को प्राथमिकता के आधार पर जल्दी निकाला जाएगा. इस फैसले से राज्य के लाखों किसानों को राहत मिलने की उम्मीद है, जिनकी फसल हाल की बारिश से प्रभावित हुई है. इसे किसानों के हितों की सुरक्षा और कृषि क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है.

30 मार्च से गेहूं की खरीदी हो रही है

दरअसल, रबी विपणन सीजन 2026-27 में प्रदेश में 30 मार्च से गेहूं की खरीद शुरू हो चुकी है. इसके लिए कुल 5547 क्रय केंद्र बनाए गए हैं और किसानों को 2585 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) दिया जा रहा है. हालांकि, इस बार बेमौसम बारिश की वजह से गेहूं की फसल को काफी नुकसान हुआ है. दानों की चमक कम हो गई है और उनमें टूटन व सिकुड़न भी देखने को मिल रही है. तय मानकों पर खरा न उतरने के कारण किसान अपनी फसल को क्रय केंद्रों पर बेच नहीं पा रहे हैं, जिससे गेहूं खरीद की रफ्तार भी धीमी पड़ गई है. बुधवार तक प्रदेश में 57,775 किसानों से करीब 3.14 लाख टन गेहूं की ही खरीद हो पाई है.

अब गेहूं खरीदी में आएगी तेजी

ऐसे में किसानों को हो रही दिक्कतों को देखते हुए खाद एवं रसद विभाग ने केंद्र सरकार से गुणवत्ता मानकों में छूट देने का प्रस्ताव भेजा था. अब केंद्र सरकार ने इस पर सहमति जताते हुए नए दिशा-निर्देश जारी किए, जिससे किसानों को अपनी फसल बेचने में राहत मिलने की उम्मीद है. साथ ही सरकार को भी उम्मीद है कि मानकों में ढील देने से गेहूं खरीदी में तेजी आएगी.

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Published: 24 Apr, 2026 | 12:07 PM
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