योगी सरकार का बड़ा फैसला, GPS से होगा गन्ने का सर्वे.. जानें हर किसान के लिए क्यों है जरूरी

उत्तर प्रदेश में 1 मई से 30 जून 2026 तक गन्ने का GPS सर्वे होगा. किसानों को SMS से सूचना मिलेगी और डेटा ऑनलाइन अपलोड होगा. 30 सितंबर तक रजिस्ट्रेशन जरूरी है. इस व्यवस्था से पारदर्शिता बढ़ेगी, सही उत्पादन आंकड़े मिलेंगे और किसानों को बेहतर मूल्य व सुविधाएं मिल सकेंगी.

Kisan India
नोएडा | Published: 25 Apr, 2026 | 12:10 PM

Uttar Pradesh News: उत्तर प्रदेश सरकार ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की हिदायत पर नई गन्ना सर्वे नीति जारी की है, जिसमें फसल का सही और पारदर्शी आंकलन करने के लिए GPS सिस्टम का इस्तेमाल होगा. इस नीति के तहत, गन्ना विकास और शुगर इंडस्ट्री विभाग 1 मई से 30 जून 2026 तक पूरे राज्य में गन्ने का GPS सर्वे करेगा. सभी रजिस्टर्ड किसानों को सर्वे की तारीख से कम से कम तीन दिन पहले SMS के जरिए जानकारी दी जाएगी.

हर सर्वे टीम में एक सरकारी गन्ना सुपरवाइजर और संबंधित शुगर मिल का प्रतिनिधि शामिल होगा. दोनों को सर्वे से पहले ट्रेनिंग दी जाएगी. सर्वे के दौरान किसानों का अपने खेतों में मौजूद होना जरूरी होगा, क्योंकि टीमें फसल का डेटा वहीं रिकॉर्ड करेंगी और GPS डिवाइस से सीधे विभाग के सर्वर पर अपलोड करेंगी. सर्वे पूरा होने के बाद किसानों को SMS के जरिए उनकी फसल से जुड़ी जानकारी भेजी जाएगी, जैसे सर्वे किया गया क्षेत्र, गन्ने की किस्म और अन्य जरूरी डिटेल्स. गन्ना आयुक्त वीना कुमारी मीणा ने कहा है कि यह नीति 2026-27 के पेराई सत्र के लिए लागू की गई है.

कितना देना होगा शुल्क

अंतिम सर्वे डेटा शुगर मिलों द्वारा ऑनलाइन अपलोड किया जाएगा और इसे विभाग व मिल की वेबसाइट पर देखा जा सकेगा. किसान अपनी जमीन की जानकारी UP भूलेख पोर्टल पर भी चेक कर सकते हैं. सर्वे के दौरान नए किसानों का रजिस्ट्रेशन भी जारी रहेगा, लेकिन गन्ना सप्लाई  का लाभ केवल उन्हीं किसानों को मिलेगा जो 30 सितंबर 2026 तक रजिस्टर होंगे. इसके अलावा, उपज बढ़ाने के लिए आवेदन भी इसी तारीख तक किए जा सकेंगे, जिसमें किसान की श्रेणी के अनुसार मामूली शुल्क लिया जाएगा. अनुसूचित जाति/जनजाति के लिए 10 रुपये, लघु किसानों के लिए 100 रुपये और अन्य किसानों के लिए 200 रुपये प्रति किसान होगा.

GPS सर्वे से खेतों का सटीक माप होगा

यह शुल्क सर्वे के दौरान या फिर 30 सितंबर 2026 तक कभी भी जमा किया जा सकता है. विभाग का कहना है कि इस GPS सर्वे से खेतों का सटीक माप होगा, गन्ने की किस्म की सही पहचान हो पाएगी और उत्पादन के भरोसेमंद आंकड़े मिलेंगे. इससे चीनी मिलों और सरकार के बीच पारदर्शिता बढ़ेगी और किसानों को सही कीमत, सब्सिडी और दूसरी सुविधाएं दिलाने में आसानी होगी.

गन्ना किसानों को डिजिटल तरीके से राहत देने की तैयारी

वहीं, पिछले हफ्ते खबर सामने आई थी कि यूपी सरकार गन्ना किसानों को डिजिटल तरीके से राहत देने की तैयारी कर रही है. बेहतर पैदावार के लिए गन्ने को नए ‘सीड ट्रैकिंग सिस्टम’ से जोड़ा जाएगा, ताकि उत्पादन और किसानों की आय बढ़ाई जा सके. सरकार की योजना के तहत  गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग विभाग एक नया मोबाइल ऐप बना रहा है. इस ऐप के जरिए गन्ना शोध केंद्रों से निकलने वाले बीजों की खेत तक पहुंचने की पूरी प्रक्रिया डिजिटल रूप से ट्रैक की जाएगी. अपर आयुक्त गन्ना वीके शुक्ला ने कहा था कि उत्तर प्रदेश गन्ना उत्पादन में अहम भूमिका निभाता है, इसलिए किसानों की सुविधाएं बढ़ाने पर लगातार काम हो रहा है. इस नए ऐप से बीज वितरण पर नजर रखना आसान होगा और किसानों को अच्छी गुणवत्ता वाले बीज मिल सकेंगे.

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