New Model of Tomato Farming: एक युवा किसान ने यह साबित कर दिया कि अगर सोच आधुनिक हो, नजर दूर तक जाती हो और मेहनत में ईमानदारी हो, तो गांव की जमीन भी सफलता की मिसाल बन सकती है.उन्होने अपनी आधुनिक सोच और वैज्ञानिक तरीके से की गई टमाटर की खेती से स्थानीय युवा किसानों के लिए प्रेरणा स्रोत बन रहें है.
जहां हौसला बुलंद हो और सोच वैज्ञानिक हो, वहां खेत भी सफलता की नई कहानी लिख देते हैं. मध्य प्रदेश के युवा किसानों ने यह साबित कर दिखाया है. पढ़ाई और खेती को एक साथ जोड़कर उन्होंने ऐसा मॉडल खड़ा किया है, जिसकी चर्चा अब गांव की चौपाल से निकलकर डिजिटल मंचों तक पहुंच चुकी है.
9 बीघा में आधुनिक टमाटर की खेती
युवक ने बीएससी, एमएससी और बायो जैसे विषयों में शिक्षा प्राप्त की है. करीब आठ साल इंदौर में रहकर पढ़ाई पूरी करने के बाद जब वे अपने गांव लौटे तो उनके सामने दो विकल्प थे नौकरी या पुश्तैनी खेती. उन्होंने खेती को चुना, लेकिन परंपरागत तरीके से नहीं, बल्कि आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक समझ के साथ. पिता के सहयोग से उन्होंने 9 बीघा जमीन में टमाटर की उन्नत खेती शुरू की. अगस्त में पौध रोपई की गई. पूरी खेती ड्रिप सिंचाई, बेड सिस्टम और संतुलित पोषण प्रबंधन पर आधारित रही. नतीजा यह हुआ कि 60 से 70 दिनों में ही खेतों में लाल टमाटर लहलहाने लगे. नवंबर से शुरू हुई फसल की आमदनी अब तक जारी है और इसके अप्रैल के अंत तक चलने की उम्मीद है.
उन्नत किस्मों ने बढ़ाया मुनाफा
इस प्रयोग में किसान ने टमाटर की दो उन्नत किस्में अभिराज और परी का चयन किया. उनके अनुभव के अनुसार अभिराज किस्म में फल का आकार बड़ा होने से प्रति क्रेट वजन अधिक निकलता है और बाजार में बेहतर भाव मिलता है. वहीं परी किस्म की गुणवत्ता अच्छी है, लेकिन वजन थोड़ा कम रहता है. यही अंतर आगे चलकर मुनाफे की गणना में अहम साबित हुआ.
लागत, आमदनी और मुनाफा
खेती की लागत प्रति बीघा करीब डेढ़ से दो लाख रुपये आई. बीज, खाद, दवा, मजदूरी और सिंचाई सहित हर खर्च की पहले से योजना बनाई गई थी. अब तक खर्च निकालने के बाद करीब पांच लाख रुपये की शुद्ध कमाई हो चुकी है, जबकि कुल आमदनी 15 लाख रुपये के आसपास पहुंचने का अनुमान है.
परिवार बना सफलता की मजबूत नींव
किसान बताते है कि इस सफलता के पीछे परिवार की भूमिका भी अहम रही है. पिता ने खेत की जिम्मेदारी संभाली, वहीं छोटा भाई, जो कोटा में नीट की तैयारी कर रहा है, छुट्टियों में गांव आकर खेती में हाथ बंटाता है. पढ़ाई और खेती का यह तालमेल आज के युवाओं की नई सोच को दर्शाता है.
खुद बनाया औजार, घटी लागत
इस वैज्ञानिक तरीके से की गई की खास बात यह है कि किसान ने बाजार से हर उपकरण खरीदने के बजाय कई कृषि औजार खुद तैयार किया हैं. टमाटर के बेड बनाने के उपकरण और छोटे ढांचे घर पर ही बनाए जाते हैं, जिससे लागत घटती है और काम पर पूरा नियंत्रण रहता है.
युवाओं के लिए प्रेरणा बनी कहानी
किसान का मानना है कि खेती अब सिर्फ हल और बैल तक सीमित नहीं रह गई है. सही जानकारी, समय पर निर्णय और वैज्ञानिक तरीका अपनाकर गांव में रहकर भी बड़े सपने साकार किए जा सकते हैं. गांव के खेतों से निकली यह कहानी उन युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो खेती को पिछड़ा काम मानते हैं. यह सफलता बताती है कि मिट्टी में आज भी अपार ताकत है, जरूरत है तो बस नजरिया बदलने की.