दो दिनों में 7 पशुओं की मौत…सरकारी गौशाला में लापरवाही उजागर, केयरटेकर पर FIR

उत्तर प्रदेश के पीलीभीत की एक सरकारी गौशाला में लापरवाही के कारण कई गोवंशीय पशुओं की मौत हो गई. हरे चारे की कमी और खराब भोजन से पशु बीमार पड़े. प्रशासन ने मामले में केयरटेकर पर FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और व्यवस्था सुधारने के निर्देश दिए हैं.

नोएडा | Updated On: 27 Mar, 2026 | 03:51 PM

Uttar Pradesh Cow Shelter: गांव की सुबह जहां आमतौर पर पशुओं की आवाज से जीवंत होती है, वहीं उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले की खबर ने हर किसी को झकझोर दिया. यहां बनी सरकारी गोशाला में बेजुबान गोवंशीय पशु भूख और लापरवाही की वजह से तड़पते रहे और कई ने दम तोड़ दिया. यह घटना न सिर्फ सिस्टम की खामियों को उजागर करती है, बल्कि पशुओं की देखभाल को लेकर गंभीर सवाल भी खड़े करती है.

भूख और लापरवाही बनी मौत की वजह

पीलीभीत जिले के मूसेपुर जयसिंह गांव में करीब 1.60 करोड़ रुपये की लागत से बनी इस गौशाला का उद्घाटन कुछ ही महीने पहले हुआ था. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, चार महीने के अंदर ही यहां हालात बिगड़ गए. गौशाला में रखे गए 381 गोवंशीय पशुओं में से कई बीमार  पड़ने लगे. गांव के प्रधान प्रतिनिधि दिगंबर दयाल ने मीडिया से बताया कि दो दिनों में सात पशुओं की मौत हो गई, जबकि प्रशासन तीन मौतों की पुष्टि कर रहा है.

चारे में गड़बड़ी से बिगड़ी हालत

जांच में सामने आया कि पशुओं को सही और पौष्टिक चारा  नहीं दिया जा रहा था. भूसे में सरसों के तनों यानी तुरी मिलाकर खिलाया जा रहा था, जिससे पशु कमजोर होते गए. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. हरपाल ने पहले ही विजिट रजिस्टर में लिखकर चेतावनी दी थी कि गोशाला में पिछले 20-22 दिनों से हरे चारे की भारी कमी है. इसके बावजूद गोशाला संचालित कर रही एनजीओ ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया. धीरे-धीरे पशु बीमार पड़ते गए और आखिरकार कई की मौत हो गई. यह लापरवाही सीधे तौर पर उनकी जान पर भारी पड़ी.

प्रशासन ने लिया एक्शन, FIR दर्ज

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, घटना की जानकारी मिलते ही उपजिलाधिकारी नागेंद्र पांडेय मौके पर पहुंचे और हालात का जायजा लिया. उन्होंने तुरंत एनजीओ की सप्लाई पर रोक लगाने के निर्देश खंड विकास अधिकारी को दिए. इसके साथ ही गौशाला के केयरटेकर  के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई है. प्रशासन ने मीडिया से कहा कि मामले की जांच जारी है और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी. फिलहाल तीन बीमार पशुओं का इलाज कराया जा रहा है, ताकि और जानें न जाएं.

सवालों के घेरे में व्यवस्था

यह घटना कई बड़े सवाल खड़े करती है. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खुद गोवंशीय पशुओं को हरा चारा देने के निर्देश दे चुके हैं, तो फिर ऐसी लापरवाही कैसे हो गई? क्या निगरानी में कमी थी या जिम्मेदार लोगों ने जानबूझकर अनदेखी की? ग्रामीणों का कहना है कि अगर समय रहते ध्यान दिया जाता, तो इन बेजुबानों की जान बचाई जा सकती थी. अब जरूरत है कि सिर्फ कार्रवाई ही नहीं, बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों, इसके लिए पुख्ता व्यवस्था बनाई जाए.

Published: 27 Mar, 2026 | 03:44 PM

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