पोल्ट्री बिजनेस के लिए बेस्ट हैं मुर्गी की ये नस्लें, बहुत तेजी से बड़े होते हैं चूजे.. जमकर होगी कमाई
मुर्गी पालन में सही नस्ल का चयन किसानों की कमाई बढ़ाने में अहम भूमिका निभाता है. अच्छी नस्ल की मुर्गियां कम बीमार पड़ती हैं और ज्यादा अंडे देती हैं. पशुपालन विभाग के अनुसार, स्थानीय मौसम और जरूरत के हिसाब से नस्ल चुनने पर कम खर्च में बेहतर उत्पादन और ज्यादा मुनाफा हासिल किया जा सकता है.
Poultry Farming: देश में तेजी से बढ़ते पोल्ट्री व्यवसाय के बीच अब किसान और युवा मुर्गी पालन को कम लागत में अच्छा मुनाफा देने वाला व्यवसाय मान रहे हैं. लेकिन कई बार सही जानकारी के अभाव में लोग ऐसी नस्ल चुन लेते हैं, जिससे उत्पादन कम होता है और नुकसान उठाना पड़ता है. पशुपालन और डेयरी विभाग के अनुसार मुर्गी पालन में सफलता की सबसे पहली और सबसे जरूरी सीढ़ी सही नस्ल का चयन है. अगर स्थानीय मौसम, उत्पादन का उद्देश्य और सही देखभाल को ध्यान में रखकर नस्ल चुनी जाए, तो कम समय में बेहतर अंडा और मांस उत्पादन हासिल किया जा सकता है. यही वजह है कि अब विभाग किसानों को वैज्ञानिक तरीके से मुर्गी पालन करने के लिए जागरूक कर रहा है.
मुर्गी पालन में नस्ल का सही चयन क्यों जरूरी
मुर्गी पालन शुरू करने से पहले यह तय करना बेहद जरूरी होता है कि पालन अंडा उत्पादन के लिए करना है या मांस उत्पादन के लिए. अलग-अलग उद्देश्य के लिए अलग नस्लें बेहतर मानी जाती हैं. अगर बिना जानकारी के गलत नस्ल चुन ली जाए, तो चारा खर्च बढ़ जाता है और उत्पादन कम हो जाता है. पशुपालन विभाग के अनुसार सही नस्ल का चयन करने से मुर्गियों की बढ़वार अच्छी होती है, बीमारियों का खतरा कम रहता है और उत्पादन भी ज्यादा मिलता है. यही कारण है कि विशेषज्ञ हमेशा स्थानीय जलवायु और बाजार की मांग को ध्यान में रखकर नस्ल चुनने की सलाह देते हैं. ग्रामीण इलाकों में अब कई किसान पारंपरिक तरीके छोड़कर उन्नत नस्लों की ओर बढ़ रहे हैं. इससे उन्हें पहले के मुकाबले ज्यादा अंडे और बेहतर वजन वाली मुर्गियां मिल रही हैं. सही नस्ल चुनने से मुर्गियों की देखभाल भी आसान हो जाती है और कम समय में अच्छा मुनाफा मिलने लगता है.
अंडा और मांस उत्पादन के लिए कौन सी नस्ल बेहतर
अगर किसान अंडा उत्पादन के लिए मुर्गी पालन करना चाहते हैं, तो व्हाइट लेगहॉर्न (White Leghorn) नस्ल को काफी अच्छा माना जाता है. यह नस्ल कम चारे में ज्यादा अंडे देती है. इसके अलावा ग्रामप्रिया और वनराजा नस्ल भी ग्रामीण इलाकों में तेजी से लोकप्रिय हो रही हैं. ये नस्लें खुले वातावरण में भी आसानी से पाली जा सकती हैं. मांस उत्पादन यानी ब्रॉयलर पालन के लिए कॉब (Cobb), रॉस (Ross) और वेंकोब जैसी नस्लें ज्यादा पसंद की जाती हैं. ये मुर्गियां कम समय में तेजी से वजन बढ़ाती हैं, जिससे बाजार में अच्छा दाम मिलता है. इसके अलावा कड़कनाथ नस्ल भी किसानों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रही है. इसकी मांग बाजार में काफी ज्यादा है और इसका मांस सामान्य मुर्गियों की तुलना में महंगा बिकता है. कई किसान अब देसी और उन्नत नस्लों को मिलाकर भी पालन कर रहे हैं ताकि उत्पादन और मुनाफा दोनों बढ़ सके.
सही नस्ल से कैसे बढ़ता है उत्पादन और मुनाफा
विशेषज्ञों के अनुसार सही नस्ल चुनने से मुर्गियों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बेहतर होती है. इससे बीमारी का खतरा कम होता है और दवाओं पर खर्च घट जाता है. अच्छी नस्ल वाली मुर्गियां कम समय में बेहतर वजन हासिल करती हैं और ज्यादा अंडे देती हैं. अगर मुर्गी पालन वैज्ञानिक तरीके से किया जाए, तो किसान कम जगह में भी अच्छा उत्पादन हासिल कर सकते हैं. सही नस्ल की मुर्गियां मौसम के अनुसार जल्दी ढल जाती हैं, जिससे गर्मी और सर्दी का असर कम पड़ता है. पशुपालन विभाग का कहना है कि अब कई राज्यों में किसानों को उन्नत नस्लों की जानकारी देने के लिए प्रशिक्षण भी दिए जा रहे हैं. इससे ग्रामीण युवाओं को रोजगार के नए अवसर मिल रहे हैं और स्वरोजगार को बढ़ावा मिल रहा है.
सफल मुर्गी पालन के लिए इन बातों का रखें ध्यान
सिर्फ सही नस्ल चुनना ही काफी नहीं होता, बल्कि उनकी सही देखभाल भी जरूरी होती है. मुर्गियों को साफ पानी, संतुलित आहार और साफ-सुथरा शेड देना बेहद जरूरी है. समय-समय पर टीकाकरण कराने से बीमारी का खतरा कम होता है. विशेषज्ञों के अनुसार मुर्गी शेड में हवा आने-जाने की अच्छी व्यवस्था होनी चाहिए. ज्यादा भीड़ होने पर संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ जाता है. इसके अलावा चूजों की शुरुआती देखभाल पर खास ध्यान देना चाहिए क्योंकि शुरुआत में हुई छोटी गलती भी बड़ा नुकसान करा सकती है. पशुपालन और डेयरी विभाग का मानना है कि अगर किसान सही नस्ल, सही आहार और वैज्ञानिक तरीके अपनाएं, तो मुर्गी पालन कम समय में स्थायी आय और बेहतर रोजगार का मजबूत जरिया बन सकता है.