डेयरी किसानों के लिए आई बड़ी सरकारी योजना, 75 फीसदी छूट पर दिए जा रहे मुर्रा नस्ल के भैंसे

Animal Husbandry Scheme: पशुपालकों के लिए समुन्नत पशु प्रजनन योजना बड़ी राहत लेकर आई है. अब सिर्फ 25 प्रतिशत अंशदान पर हाई नस्ल का मुर्रा भैंसा मिल सकता है. सरकार 75 प्रतिशत अनुदान दे रही है, जिससे देसी भैंसों की नस्ल सुधरेगी, दूध उत्पादन बढ़ेगा और किसानों की आय में सीधा फायदा देखने को मिलेगा.

नोएडा | Updated On: 23 Apr, 2026 | 01:30 PM

Murrah Buffaloes Subsidy: अगर आपकी भैंस देसी नस्ल की है और आप उससे ज्यादा दूध देने वाली अच्छी नस्ल तैयार करना चाहते हैं, तो अब यह काम आसान हो गया है. मध्य प्रदेश सरकार की समुन्नत पशु प्रजनन योजना (Samunnat Pashu Prajanan Yojana) के तहत पशुपालकों को उच्च वंशावली का मुर्रा पड़ा (सांड) दिया जा रहा है. इस योजना का मकसद देसी भैंसों की नस्ल सुधारना, दूध उत्पादन बढ़ाना और पशुपालकों की कमाई मजबूत करना है. सबसे अच्छी बात यह है कि इसकी कीमत का 75 प्रतिशत हिस्सा सरकार देती है, जबकि लाभार्थी को सिर्फ 25 प्रतिशत अंशदान देना होता है. सरकारी यूनिट लागत 45,000 रुपये तय है.

कम खर्च में मिलेगा हाई नस्ल का मुर्रा पड़ा

मध्य प्रदेश पशुपालन विभाह के अनुसार, इस योजना के तहत पशुपालक को एक उन्नत नस्ल का मुर्रा सांड दिया जाता है. इसका इस्तेमाल देसी भैंसों के प्रजनन  के लिए किया जाता है, जिससे अगली पीढ़ी में अच्छी नस्ल की पड़िया और पड़े तैयार होते हैं. इससे भैंसों का दूध उत्पादन बढ़ता है और आने वाले समय में पशुपालक को बेहतर नस्ल के पशु भी मिलते हैं. सरकारी जानकारी के अनुसार इसकी कुल लागत 45,000 रुपये है. इसमें से 33,750 रुपये सरकार अनुदान के रूप में देती है, जबकि पशुपालक को सिर्फ 11,250 रुपये जमा करना होता है. यह योजना छोटे और मध्यम पशुपालकों के लिए बहुत फायदेमंद मानी जा रही है.

हर वर्ग के पशुपालक उठा सकते हैं लाभ

इस योजना की अच्छी बात यह है कि इसमें सभी वर्गों के किसान और पशुपालक  आवेदन कर सकते हैं. SC, ST, OBC और सामान्य वर्ग-सभी के लिए 75 फीसदी अनुदान का प्रावधान है. हालांकि सरकारी पात्रता के अनुसार पशुपालक के पास आमतौर पर कम से कम 5 भैंसें होना जरूरी माना जाता है, ताकि नस्ल सुधार का सीधा फायदा दिख सके. यह योजना खासकर उन पशुपालकों के लिए बहुत उपयोगी है जो दूध का व्यवसाय बढ़ाना चाहते हैं, लेकिन अच्छी नस्ल के सांड की ऊंची कीमत के कारण खरीद नहीं कर पाते.

दूध उत्पादन बढ़ाने का मजबूत रास्ता

मुर्रा नस्ल अपनी बेहतर दूध क्षमता और मजबूत जेनेटिक क्वालिटी के लिए जानी जाती है. जब देसी भैंसों का प्रजनन मुर्रा सांड से होता है, तो अगली पीढ़ी में दूध देने की क्षमता काफी बढ़ जाती है. यही वजह है कि यह योजना सीधे पशुपालकों की आय बढ़ाने से जुड़ी हुई है. सरकार हर साल ब्लॉक स्तर पर लक्ष्य तय करती है और उसी हिसाब से आवेदन लिए जाते हैं. इसलिए पशुपालकों को सलाह है कि नजदीकी पशु चिकित्सालय में समय रहते आवेदन जरूर करें. सीधी बात यह है कि सिर्फ 25 फीसदी खर्च में हाई नस्ल का मुर्रा सांड मिलना दूध और मुनाफा दोनों  बढ़ाने का शानदार मौका है

ये दस्तावेज लगेंगे, आवेदन प्रक्रिया आसान

योजना का लाभ लेने के लिए आवेदन प्रक्रिया काफी आसान रखी गई है. पशुपालक को आधार कार्ड, बैंक खाता, पासपोर्ट फोटो और पंचायत स्तर का प्रस्ताव तैयार कराना होता है. इसके बाद इन दस्तावेजों के साथ अपने नजदीकी पशु चिकित्सालय या ब्लॉक स्तर के पशु चिकित्सा केंद्र में आवेदन फॉर्म जमा करना होता है. फॉर्म ब्लॉक स्तर से जिला कार्यालय भेजा जाता है. अगर आवेदन संख्या तय लक्ष्य से ज्यादा हो जाती है, तो चयन लॉटरी सिस्टम से किया जाता है. चयन होने के बाद लाभार्थी को सूचना  दी जाती है और फिर मुर्रा पड़ा उपलब्ध कराया जाता है. सरकार का मकसद यह है कि ज्यादा से ज्यादा गांवों में नस्ल सुधार का फायदा पहुंचे.

Published: 16 Apr, 2026 | 11:36 AM

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