मई में पशुओं की देखभाल नहीं की तो हो सकता है नुकसान, बिहार सरकार ने जारी की बड़ी चेतावनी

बिहार सरकार के पशुपालन विभाग ने मई महीने में पशुओं की देखभाल को लेकर जरूरी सलाह जारी की है. विभाग ने चमोकन रोग, पेट के कृमि और गर्मी से होने वाली समस्याओं से बचाव पर जोर दिया है. पशुपालकों को समय पर दवा, साफ-सफाई और सही देखभाल करने की अपील की गई है.

नोएडा | Updated On: 12 May, 2026 | 04:12 PM

Animal Care: गर्मी बढ़ने के साथ पशुओं में बीमारियों का खतरा भी तेजी से बढ़ जाता है. इसी को देखते हुए बिहार सरकार के डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग और पशुपालन निदेशालय ने मई महीने के लिए पशुपालकों को जरूरी सलाह जारी की है. विभाग ने कहा है कि इस समय पशुओं की सही देखभाल नहीं करने पर दूध उत्पादन घट सकता है और कई गंभीर बीमारियां फैल सकती हैं. सरकार ने खासतौर पर चमोकन रोग, पेट के कृमि और भेड़ों की देखभाल को लेकर पशुपालकों को सतर्क रहने को कहा है.

गर्मी में बढ़ता है पशुओं में बीमारी का खतरा

मई महीने में तेज गर्मी और बदलते मौसम के कारण पशु जल्दी बीमार  पड़ सकते हैं. पशुपालन विभाग के अनुसार इस समय पशुओं में चमोकन जैसी बीमारी का खतरा ज्यादा रहता है. यह बीमारी पशुओं के लिए जानलेवा भी साबित हो सकती है. सरकार ने पशुपालकों को सलाह दी है कि वे समय पर टीकाकरण करवाएं और पशुओं को साफ-सुथरे स्थान पर रखें. पशुओं के रहने की जगह पर गंदगी और पानी जमा नहीं होने देना चाहिए, क्योंकि इससे संक्रमण तेजी से फैलता है. विशेषज्ञों का कहना है कि अगर पशु सुस्त दिखे, खाना कम खाए या तेज बुखार हो तो तुरंत पशु चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए. समय पर इलाज मिलने से पशु को बचाया जा सकता है.

पेट के कृमि से बचाव बेहद जरूरी

पशुपालन विभाग ने कहा है कि गर्मी और नमी के कारण इस समय पशुओं के पेट में कृमि  यानी कीड़े होने की समस्या बढ़ जाती है. इससे पशु कमजोर होने लगते हैं और दूध उत्पादन भी कम हो सकता है. सरकार ने पशुपालकों को सलाह दी है कि वे पशुओं को समय-समय पर कृमिनाशक दवा जरूर दें. साथ ही साफ पानी और पौष्टिक चारा खिलाने पर भी जोर दिया गया है. अगर पशुओं में कमजोरी, वजन कम होना या भूख कम लगने जैसी समस्या दिखे, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. विभाग का कहना है कि थोड़ी सी सावधानी से पशुओं को गंभीर बीमारी से बचाया जा सकता है.

भेड़ पालकों को ऊन कटाई की सलाह

बिहार सरकार ने भेड़ पालकों के लिए भी जरूरी सलाह जारी की है. विभाग ने कहा है कि मई महीने में भेड़ों के ऊन काटने  का काम जरूर कर लेना चाहिए. गर्मी के मौसम में ज्यादा ऊन रहने से भेड़ों को परेशानी होती है. इससे शरीर का तापमान बढ़ सकता है और कई बार भेड़ बीमार भी पड़ जाती हैं. समय पर ऊन काटने से भेड़ों को राहत मिलती है और उनका स्वास्थ्य बेहतर रहता है. ऊन कटाई के दौरान साफ-सफाई का खास ध्यान रखने को भी कहा गया है. अगर कटाई के समय किसी तरह की चोट लग जाए तो तुरंत दवा लगानी चाहिए, ताकि संक्रमण न फैले.

पशुपालकों को सतर्क रहने की अपील

डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग ने कहा है कि पशुपालन किसानों की आमदनी का बड़ा सहारा है. ऐसे में पशुओं की सेहत का ध्यान रखना बहुत जरूरी है. विभाग लगातार पशुपालकों को जागरूक करने का काम कर रहा है, ताकि बीमारी से होने वाले नुकसान को कम किया जा सके. सरकार ने पशुपालकों से अपील की है कि वे किसी भी बीमारी के लक्षण  दिखने पर तुरंत नजदीकी पशु अस्पताल या पशु चिकित्सक से संपर्क करें. समय पर इलाज और सही देखभाल से पशुओं को स्वस्थ रखा जा सकता है. विशेषज्ञ का मानना है कि अगर किसान सरकार की सलाह मानें, तो पशुओं की सेहत अच्छी रहेगी और दूध, ऊन व दूसरे पशु उत्पादों से बेहतर कमाई भी हो सकेगी. मई महीने में थोड़ी सावधानी पशुपालकों को बड़े नुकसान से बचा सकती है.

Published: 12 May, 2026 | 06:22 PM

Topics: